अपने को सकारात्मक प्रभाव से घिरे रखना

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अपने को सकारात्मक प्रभाव से घिरे रखना

अपने को सकारात्मक प्रभावों से घिरे रखना

1 आकर्षण के नियम का प्रयोग करें: 

  • हमारे कार्य और विचार चुंबक की तरह होते हैं।
  • जब तक हम किसी भी समस्या को हल करने से बचने का प्रयास करते हैं,
  • तब तक वह समस्या बनी ही रहती है, या कभी-कभी और भी बिगड़ जाती है।
  • हमारी अपनी नकारात्मकता पूरे दिन को प्रभावित करती है।
  • परंतु हम जितना अधिक सकारात्मक रूप से सोचेंगे उतना ही अधिक हम अग्र-सक्रियता (proactively) से कार्य कर पाएंगे,
  • अपना लक्ष्य प्राप्त कर पाएंगे और सकारात्मक विकल्पों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्हें अपना पाएंगे और यही सब चीजें करने से हम पुरस्कृत होंगे।
  • वास्तव में, सकारात्मक विचार आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बूस्ट कर सकते हैं।

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2 वही कार्य करें जिसे आप करना पसंद करते हैं: 

  • सुनने में यह बहुत आसान लगता है परंतु कई बार उनका पालन कर पाना मुश्किल होता है।
  • आपकी दिनचर्या बेहद व्यस्त हो सकती है फिर भी उसमें कुछ ऐसे कार्यों को शामिल करें जो आपको लगातार प्रसन्नता प्रदान करते रहें।
  • उनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

संगीत सुनना।

  • संगीत की जो भी शैली आपको पसंद हो उसे सुनें।

पढ़ना।

  • पढ़ना आपके लिए अच्छा होता है।
  • यह आपको सहानभूति की भी शिक्षा दे सकती है।
  • साथ ही, यदि आप कथेतर साहित्य पढ़ रहे हैं, तो आप विश्व की नई जानकारी और दृष्टिकोण के बारे में भी ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

रचनात्मक अभिव्यक्ति जैसे कि पेंटिंग, लेखन, ओरिगामी आदि।

खेल-कूद, शौक आदि।

प्रेरणादायक विस्मय:

  • शोध ऐसा दर्शाते हैं कि आप द्वारा प्रकृति की गोद में घूमते समय हुई कोई विस्मयकारी अनुभूति,
  • किसी अद्भुत पेंटिंग को देखना,
  • या अपने पसंदीदा सिम्फ़नी का श्रवण आदि आपके स्वास्थ्य, शारीरिक और भौतिक दोनों, के लिए अत्यंत अच्छे होते हैं।
  • इसलिए जब भी आप कर सकें इन छोटे-छोटे विस्मयकारी चीजों को अपने जीवन में शामिल करने का प्रयास करें।

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3 स्वयं को मित्रों से घिरा हुआ रखें:

  • उन लोगों की सराहना करें जिन्होंने आपके जीवन के हर सुख-दुख के समय में आपका साथ दिया।
  • उनके सहयोग की सूची बनाएँ ताकि उससे आपको और ज्यादा सकारात्मक बनने में सहायता मिले,
  • और इस प्रक्रिया में हो सकता है कि आप उनकी भी कुछ सहायता कर सकें।
  • जो मित्र होते हैं वो एक दूसरे की सहायता सुख और दुख दोनों ही समय में करते हैं।

शोधों ने दर्शाया है कि ऐसे लोगों के अपने जीवन में ज्यादा प्रसन्न और सकरात्मक होने की संभावना होती है,

  • जो अपने ही समान मूल्यों से युक्त और दृष्टिकोण रखने वाले मित्रों के बीच रहते हैं,
  • अपेक्षाकृत उन लोगों के जो ऐसा नहीं करते हैं।
  • जिन लोगों से आप प्रेम करते हैं जब उनसे आप बात-चीत करते हैं,
  • तो आपका ब्रेन न्यूरोट्रांसमिटर्स रिलीज करता है जो आपको प्रसन्नता प्रदान करते हैं (डोपामीन) और आराम पहुंचाते हैं (सेरोटोनिन)।
  • अपने मित्रों और परिजनों के साथ समय व्यतीत करने से आप रासायनिक स्तर पर ज्यादा प्रसन्नता और सकारात्मकता का अनुभव करते हैं।
  • आप अपने मित्रों और परिजनों को अपना कृतज्ञता-सहभागी (gratitude partners) बनने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
  • यदि आप एक नेटवर्क बनाकर उन चीजों को आपस में साझा करेंगे जो आपकी कृतज्ञता के सूचक हैं,
  • तो सोचें कि आप एक दूसरे में कितनी अधिक सकारात्मकता विकसित कर सकते हैं।

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4 दूसरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें: 

  • किसी अन्य के प्रति दयालुता दर्शाने को अनुकंपा कहते हैं,
  • विशेषकर यदि वह व्यक्ति आपकी तुलना में कम सुविधा-सम्पन्न हो।
  • यह वास्तव में आपकी सकारात्मकता को बूस्ट कर सकता है।
  • उदाहरण के लिए, शोध यह दर्शाते हैं कि जब कोई व्यक्ति परोपकार के रूप में दान देता है,
  • तो वास्तव में वह उतनी ही प्रसन्नता का अनुभव करता है जितना वह स्वयं धन पाने पर होता।
  • यह औरों के लिए ही अच्छा नहीं है बल्कि आपके अपने स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा होगा।

हर अच्छाई दूसरे अच्छाई को जन्म देती है।

  • यदि हम किसी अन्य के लिए कुछ अच्छा करते हैं, विशेषकर यदि यह अनपेक्षित हो,
  • तो इस बात की ज्यादा संभावना होती है कि वह व्यक्ति आपके उपकार का बदला दे,
  • हो सकता है कि सीधा हमे न देकर किसी और को दे।
  • अंततः, चाहे सीधे या किसी अन्य रास्ते से, उस अच्छाई का प्रतिफल हमारे पास तक वापस पहुँच ही जाएगा।
  • कुछ लोग इसे कर्म (karma) कहते हैं। इसे चाहे जो भी नाम दिया जाये,
  • वैज्ञानिक शोध यह दर्शाते हैं कि उपकार के संदर्भ में “आगे बढ़ा दो” (pay it forward) का सिद्धान्त एक वास्तविकता है।
  • शिक्षण और स्वयं-सेवा करने का प्रयास करें या किसी भी सेवा-संस्थान से पूछें कि आप उनके उद्देश्य-पूर्ति में किस तरह काम आ सकते हैं।

किसी जरूरतमन्द को छोटा-मोटा ऋण दें।

  • विकासशील देश में किसी व्यक्ति को दिया गया छोटा-मोटा ऋण भी उसे अपने व्यापार को बढ़ाने में सहायता प्रदान कर सकता है,
  • या उसे आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर बनने में सहायता प्रदान कर सकता है।
  • यहाँ पर यह ध्यान देने योग्य बात है कि छोटे-मोटे ऋणों के मामलों में पुनर्भुगतान 95% से भी अधिक पाया गया है।
  • अपने आस-पास के व्यक्तियों को और यहाँ तक कि अजनबियों को भी छोटे-मोटे उपहार देने का प्रयास करें।

कतार में खड़े किसी व्यक्ति को काफी पिलाएँ।

  • अपने किसी मित्र को कुछ ऐसा भेजें जो आपने उसके साथ मन ही मन में बनाया हो।
  • उपहार देने से आपके ब्रेन में डोपामीन का उत्पादन शुरू हो जाता है,
  • बल्कि सच तो यहाँ तक है कि आप, उपहार पाने वाले व्यक्ति की तुलना में, कहीं ज्यादा बड़े “प्रसन्नता के झोंके” का एहसास कर पाते हैं।

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5 किसी आशावादी कहावत या उद्धरण को ढूंढ कर अपने पर्स या जेब में रखें:

  •  जब आप किसी अनिश्चितता के शिकार हों या ऐसा महसूस कर रहे हों कि “कोई मुझे भी सहारा देता” तब आप उस उद्धरण या कहावत को त्वरित संदर्भ के लिए देखें।
  • आपके शुरुआत के लिए यहाँ कुछ उद्धरण दिये गए हैं:
  • यह कैसा आश्चर्य है कि दुनिया को सुधारने से पहले किसी को एक पल भी इंतज़ार करने की आवश्यकता नहीं होती है ― एनी फ्रैंक (Anne Frank)
  • आशावादी यह घोषणा करता है, कि हम सर्वोत्तम दुनिया में रहते हैं जबकि निराशावादी डरता है कि शायद यह सच है ― जेम्स ब्रांच केबेल (James Branch Cabell)
  • आज तक का महानतम आविष्कार यह सोच है, कि एक व्यक्ति मात्र अपने रवैये में परिवर्तन लाकर अपने भविष्य को परिवर्तित कर सकता है ― ओपरा विनफ्रे (Oprah Winfrey)
  • यदि आपके अंदर से कोई आवाज़ ये कहती सुनाई दे “आप पेंट नहीं कर सकते हैं: तो कुछ भी करके पेंट अवश्य करें, आप पाएंगे की वह आवाज़ अपने आप शांत हो जाएगी ― विन्सेंट वान गोघ (Vincent Van Gogh)

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6 किसी चिकत्सक से मिलें: 

  • एक आम गलत-धारणा के अनुसार लोगों को किसी चिकित्सक या परामर्शदाता से तभी मिलने की “आवश्यकता” होती है जब कुछ “गड़बड़” हो।
  • लेकिन विचार करें: किसी डेन्टिस्ट के पास आप केवल तभी नहीं जाते हैं,
  • जब आपके दांतों में कैविटीज हों बल्कि केवल दांतों की सफाई के लिए भी जाते हैं।
  • आप बीमार न भी हों तब भी आप डाक्टर के पास वार्षिक चेक-अप के लिए जाते हैं।

किसी चिकित्सक से मिलना आपके लिए एक सहायक “निवारक” तकनीक हो सकती है।

  • यदि आप यह सीखना चाहते हैं, कि आप कैसे ज्यादा सकारात्मक रूप से सोचें,
  • और व्यवहार करें तो एक चिकित्सक या परामर्शदाता आपके सोच में विघ्नकारी पैटर्न को पहचानने में,
  • और नए सकारात्मक रणनीतियों को विकसित करने में आपकी सहायता कर सकता है।
  • आप किसी ऐसे चिकित्सक के बारे में अपने डाक्टर से पूछ सकते हैं या आन-लाइन डायरेक्ट्री के माध्यम से जान सकते हैं।
  • यदि आपने हेल्थ-इंश्योरेंस करा रखा है तो आपका सर्विस प्रोवाईडर आपके नेटवर्क में उपलब्ध किसी काउंसेलर के बारे में बता सकता है।
  • अक्सर कम खर्च वाले विकल्प भी उपलब्ध होते हैं।
  • मेंटल हेल्थ क्लिनिक्स, कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर्स और यहाँ तक कि कालेज,
  • और यूनिवर्सिटीज़ द्वारा चलाये जा रहे पब्लिक-सर्विस काउंसेलिंग सेंटर्स के बारे में आप आन-लाइन जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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