आध्यात्मिक स्वास्थ्य

आध्यात्मिक स्वास्थ्य

आध्यात्मिक स्वास्थ्य: जीवन के अर्थ की एक भावना का विकास:- नमस्कार साथियो, आध्यात्मिक स्वास्थ्य  हमें मन की शांति और सच्ची खुशी प्रदान करता है, आत्मिकता और पवित्रता दो बहुत सामर्थी शब्द हमारे जीवन को सही दिशा निर्देश के लिये आवश्यक हैं।आध्यात्मिक स्वास्थ्य: जीवन के अर्थ की एक भावना का विकास। वचन मनन (Meditation), धार्मिक वचन के अध्धयन, भक्ति संगीत साधना, प्राणायाम करते हुये आत्मिक जीवन में उन्नति स्वरूप प्राप्त होता है।

  • (2) समय और असमय तैयार रहें, हर परिस्थिति से निपटने के लिए परमेश्वर से सामर्थ्य पाने के लिए प्रार्थना करें ।
  • (3) सही और अच्छी शिक्षा को ग्रहण करें ।
  • (4) पवित्र लोगों की संगति करें । परमेश्वर के लोगों के साथ संगति में बने रहें।
  • (5) दूसरों के दुखों में हमदर्द बनें और अपनी खुशियों में लोगों को शामिल करें ।

आध्यात्मिक स्वास्थ्य: जीवन के अर्थ की एक भावना का विकास।

(1) परमेश्वर का भय मानें और परमेश्वर की उपस्थिति में चलें।

आपका जीवन प्रार्थना का जीवन हो ।

न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है! परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है॥ भजन संहिता 1:

(2) कोई तेरी जवानी को तुच्छ न समझने पाए;

पर वचन, और चाल चलन, और प्रेम, और विश्वास, और पवित्रता में विश्वासियों के लिये आदर्श बन जा। उन बातों को सोचता रह, और इन्हीं में अपना ध्यान लगाए रह ताकि तेरी उन्नति सब पर प्रगट हो। अपनी और अपने उपदेश की चौकसी रख। इन बातों पर स्थिर रह, क्योंकि यदि ऐसा करता रहेगा, तो तू अपने, और अपने सुनने वालों के लिये भी उद्धार का कारण होगा॥1 तीमुथियुस 4:12,15,16

 (3) सही और अच्छी शिक्षा को ग्रहण करें ।

कि तू वचन को प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह, सब प्रकार की सहनशीलता, और शिक्षा के साथ उलाहना दे, और डांट, और समझा।पर तू सब बातों में सावधान रह, दुख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर और अपनी सेवा को पूरा कर। 2 तीमुथियुस 4:2,& 5

 (4) पवित्र लोगों की संगति करें । परमेश्वर के लोगों के साथ संगति में बने रहें।

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सद्भावना प्रदर्शित करने के लिए आत्मिक अनुष्ठान के लिए हमेशा तैयार रहें । अच्छी बातें सीखें, उन पर अमल भी करें और लोगों को भी सिखाए । परमेश्वर से पाए हुए अनमोल उपहारों को लोगों को बांट दें । पर तू ने उपदेश, चाल चलन, मनसा, विश्वास, सहनशीलता, प्रेम, धीरज, और सताए जाने, और दुख उठाने में मेरा साथ दिया।2 तीमुथियुस 3:10

 (5) दूसरों के दुखों में हमदर्द बनें और अपनी खुशियों में लोगों को शामिल करें ।

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