google.com, pub-9683471800292205, DIRECT, f08c47fec0942fa0 दुनिया में रहने वाले

दुनिया में रहने वाले, क्या तुझको ये खबर है, दो दिन की जिंदगी है, पल भर का ये सफर है। 

दुनिया में रहने वाले, क्या तुझको ये खबर है, दो दिन की जिंदगी है, पल भर का ये सफर है।  

जिंदगी की सच्चाई को ब्यान करती हुई विजय बताल्वी जी की गज़ल- दुनिया में रहने वाले, क्या तुझको ये खबर है, द्वारा  विजय बिताल्बी जी आम इंसान को ज़िंदगी की उस सच्चाई से अवगत कराते हैं, जिससे इंसान जानते हुये भी अंजान बन बैठा है।

दुनिया में रहने वाले, क्या तुझको ये खबर है? 

दुनिया में रहने वाले, क्या तुझको ये खबर है, दो दिन की जिंदगी है, पल भर का ये सफर है।  x 2

 

  1. जीना जो चाहते थे, वो भी तो जी ना पाये,

घर बार छोड़ कर, मिट्टी में जा समाये । x 2 

कल तेरा मेरा सबका, अंजामे ए हशर है,

दो दिन की जिंदगी है, पल भर का ये सफर है। 

दुनिया में रहने वाले…!

 

      2.  आँखों ने तेरी तुझको, कितने दिखाये मुर्दे,

काँधों पे तूने अपने कितने उठाये मुर्दे। x 2 

फिर भी बना है अंधा, जब के तेरी नज़र है,

दो दिन की जिंदगी है, पल भर का ये सफर है। 

दुनिया में रहने वाले…!

                        

      3. जब मौत ने पुकारा, कुछ भी ना काम आया,

जाते हुयों को देखो, कोई ना रोक पाया। x 2

सच्चाई से इसकी क्यों आज बेखबर है?

दो दिन की जिंदगी है, पल भर का ये सफर है। 

दुनिया में रहने वाले…!

                  

     4. मत नाज़ कर तू अपने अहबाब दोस्तों पर,

लौट आयेंगे ये तुझको बस, खाक में मिला के। x 2

तेरा वहाँ ना कोई, हमदम ना हमसफर है,

दो दिन की जिंदगी है, पल भर का ये सफर है। 

दुनिया में रहने वाले…!

                    

       5. मरने से पहले तौबा, अपने गुनाह से कर ले,

अंजान मान जा तू, राहे खुदा पे चल दे। x 2 

मरने के बाद तेरा, मुश्किल बहुत सफर है,

दो दिन की जिंदगी है, पल भर का ये सफर है ,

दुनिया में रहने वाले, क्या तुझको ये खबर है? दो दिन की जिंदगी है, पल भर का ये सफर है। 

विजय बताल्वी जी की गज़ल- दुनिया में रहने वाले,क्या तुझको ये खबर है? दुनिया में रहने वाले, क्या तुझको ये खबर है? -लीरिक्स। विजय बिताल्बी जी की बहुत सी गज़लें जीवन की सच्चाईयों से परिपूर्ण हैं, उनमें से ये गजल भी शामिल है, संभवतः आपको आपके जीवन की राह मिल सके। जियो तो ऐसे कि लोग जाने के बाद में भी याद करें, वरना खाक में तो मिल जाना ही है। विजय बताल्वी जी की गज़ल- दुनिया में रहने वाले,क्या तुझको ये खबर है?-लीरिक्स आप तक ये गजल पहुंचाने का मक़सद सिर्फ इतना है, कि हमें जाग्रत होने की जरूरत है, कभी भी देर नहीं होती, अंत भला सो सब भला।

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