बाइबल के अनुसार मूर्खता क्या है?

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बाइबल के अनुसार मूर्खता क्या है?

5. बुद्धिमान महिमा को पाएंगे, और मूर्खों की बढ़ती अपमान ही की होगी॥नीतिवचन 3:35

बाइबल के अनुसार मूर्खता क्या है? तू ने तो मुझे अपने बेटे बेटियों को चूमने तक न दिया? तू ने मूर्खता की है। उत्पत्ति 31:28 और याकूब के पुत्र सुनते ही मैदान से बहुत उदास और क्रोधित हो कर आए: क्योंकि शकेम ने याकूब की बेटी के साथ कुकर्म करके इस्राएल के घराने से मूर्खता का ऐसा काम किया था, जिसका करना अनुचित था। उत्पत्ति 34:7 । तब हारून मूसा से कहने लगा, हे मेरे प्रभु, हम दोनों ने जो मूर्खता की वरन पाप भी किया, यह पाप हम पर न लगने दे। गिनती 12:11

  • शमूएल ने शाऊल से कहा, तू ने मूर्खता का काम किया है; तू ने अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा को नहीं माना;

  • नहीं तो यहोवा तेरा राज्य इस्राएलियों के ऊपर सदा स्थिर रखता।1 शमूएल 13:13
  • शाऊल ने कहा, मैं ने पाप किया है, हे मेरे बेटे दाऊद लौट आ; मेरा प्राण आज के दिन तेरी दृष्टि में अनमोल ठहरा,
  • इस कारण मैं फिर तेरी कुछ हानि न करूंगा; सुन, मैं ने मूर्खता की, और मुझ से बड़ी भूल हुई है। 1 शमूएल 26:21
  • तब दाऊद को यह समाचार मिला, कि अबशालोम के संगी राजद्रोहियों के साथ अहीतोपेल है।
  • दाऊद ने कहा, हे यहोवा, अहीतोपेल की सम्मति को मूर्खता बना दे। 2 शमूएल 15:31

  • प्रजा की गणना करने के बाद दाऊद का मन व्याकुल हुआ।
  • और दाऊद ने यहोवा से कहा, यह काम जो मैं ने किया वह महापाप है।
  • तो अब, हे यहोवा, अपने दास का अधर्म दूर कर; क्योंकि मुझ से बड़ी मूर्खता हुई है। 2 शमूएल 24:10
  • और दाऊद ने परमेश्वर से कहा, यह काम जो मैं ने किया, वह महापाप है। परन्तु अब अपने दास का अधर्म दूर कर; मुझ से तो बड़ी मूर्खता हुई है। 1 इतिहास 21:8
  • देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। तूने यह काम मूर्खता से किया है, इसलिये अब से तू लड़ाइयों में फंसा रहेगा। 2 इतिहास 16:9
  • इन सब बातों में भी अय्यूब ने न तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया। अय्यूब 1:22

देख, वह अपने सेवकों पर भरोसा नहीं रखता, और अपने स्वर्गदूतों को मूर्ख ठहराता है; अय्यूब 4:18

  • वह मंत्रियों को लूटकर बन्धुआई में ले जाता, और न्यायियों को मूर्ख बना देता है। अय्यूब 12:17
  • वे बड़े नगर में कराहते हैं, और घायल किए हुओं का जी दोहाई देता है; परन्तु ईश्वर मूर्खता का हिसाब नहीं लेता। अय्यूब 24:12
  • मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने घिनौने काम किए हैं, कोई सुकर्मी नहीं। भजन संहिता 14:1
  • क्योंकि देखने में आता है, कि बुद्धिमान भी मरते हैं, और मूर्ख और पशु सरीखे मनुष्य भी दोनोंनाश होते हैं, और अपनी सम्पत्ति औरों के लिये छोड़ जाते हैं। भजन संहिता 49:10
  • उनकी यह चाल उनकी मूर्खता है, तौभी उनके बाद लोग उनकी बातों से प्रसन्न होते हैं। भजन संहिता 49:13
  • मैं कान लगाए रहूंगा, कि ईश्वर यहोवा क्या कहता है, वह तो अपनी प्रजा से जो उसके भक्त है, शान्ति की बातें कहेगा; परन्तु वे फिर के मूर्खता न करने लगें। भजन संहिता 85:8
  • पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता: भजन संहिता 92:6
  • तुम जो प्रजा में पशु सरीखे हो, विचार करो; और हे मूर्खों तुम कब तक बुद्धिमान हो जाओगे? भजन संहिता 94:8
  • हे भोले लोगो, तुम कब तक भोलेपन से प्रीति रखोगे? और हे ठट्ठा करने वालो, तुम कब तक ठट्ठा करने से प्रसन्न रहोगे? और हे मूर्खों, तुम कब तक ज्ञान से बैर रखोगे? नीतिवचन 1:22

बुद्धिमान महिमा को पाएंगे, और मूर्खों की बढ़ती अपमान ही की होगी॥नीतिवचन 3:35

  • वह शिक्षा प्राप्त किए बिना मर जाएगा, और अपनी ही मूर्खता के कारण भटकता रहेगा॥ नीतिवचन 5:23
  • हे भोलो, चतुराई सीखो; और हे मूर्खों, अपने मन में समझ लो नीतिवचन 8:5
  • मूर्खता रूपी स्त्री हौरा मचाने वाली है; वह तो भोली है, और कुछ नहीं जानती। नीतिवचन 9:13
  • सुलैमान के नीतिवचन॥ बुद्धिमान पुत्र से पिता आनन्दित होता है, परन्तु मूर्ख पुत्र के कारण माता उदास रहती है। नीतिवचन 10:1
  • जो बैर को छिपा रखता है, वह झूठ बोलता है, और जो अपवाद फैलाता है, वह मूर्ख है। नीतिवचन 10:18
  • मूर्ख को तो महापाप करना हंसी की बात जान पड़ती है, परन्तु समझ वाले पुरूष में बुद्धि रहती है। नीतिवचन 10:23
  • सब चतुर तो ज्ञान से काम करते हैं, परन्तु मूर्ख अपनी मूढ़ता फैलाता है। नीतिवचन 13:16
  • लालसा का पूरा होना तो प्राण को मीठा लगता है, परन्तु बुराई से हटना, मूर्खों के प्राण को बुरा लगता है। नीतिवचन 13:19
  • बुद्धिमानों की संगति कर, तब तू भी बुद्धिमान हो जाएगा, परन्तु मूर्खों का साथी नाश हो जाएगा। नीतिवचन 13:20

  • मूर्ख से अलग हो जा, तू उस से ज्ञान की बात न पाएगा। नीतिवचन 14:7
  • चतुर की बुद्धि अपनी चाल का जानना है, परन्तु मूर्खों की मूढ़ता छल करना है। नीतिवचन 14:8
  • बुद्धिमान डर कर बुराई से हटता है, परन्तु मूर्ख ढीठ हो कर निडर रहता है। नीतिवचन 14:16
  • बुद्धिमानों का धन उन का मुकुट ठहरता है, परन्तु मूर्खों की मूढ़ता निरी मूढ़ता है। नीतिवचन 14:24
  • समझ वाले के मन में बुद्धि वास किए रहती है, परन्तु मूर्खों के अन्त:काल में जो कुछ है वह प्रगट हो जाता है। नीतिवचन 14:33
  • बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। नीतिवचन 15:2
  • बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता। नीतिवचन 15:7
  • समझने वाले का मन ज्ञान की खोज में रहता है, परन्तु मूर्ख लोग मूढ़ता से पेट भरते हैं। नीतिवचन 15:14
  • बुद्धिमान पुत्र से पिता आनन्दित होता है, परन्तु मूर्ख अपनी माता को तुच्छ जानता है। नीतिवचन 15:20

  • एक घुड़की समझने वाले के मन में जितनी गड़ जाती है, उतना सौ बार मार खाना मूर्ख के मन में नहीं गड़ता। नीतिवचन 17:10
  • बच्चा-छीनी-हुई-रीछनी से मिलना तो भला है, परन्तु मूढ़ता में डूबे हुए मूर्ख से मिलना भला नहीं। नीतिवचन 17:12
  • बुद्धि मोल लेने के लिये मूर्ख अपने हाथ में दाम क्यों लिए है? वह उसे चाहता ही नहीं। नीतिवचन 17:16
  • जो मूर्ख को जन्माता है वह उस से दु:ख ही पाता है; और मूढ़ के पिता को आनन्द नहीं होता। नीतिवचन 17:21
  • बुद्धि समझने वाले के साम्हने ही रहती है, परन्तु मूर्ख की आंखे पृथ्वी के दूर दूर देशों में लगी रहती है। नीतिवचन 17:24
  • बाइबल के अनुसार मूर्खता क्या है? मूर्ख पुत्र से पिता उदास होता है, और जननी को शोक होता है। नीतिवचन 17:25

  • और सब प्रकार की खरी बुद्धि से बैर करता है। मूर्ख का मन समझ की बातों में नहीं लगता, वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है। नीतिवचन 18:2
  • बात बढ़ाने से मूर्ख मुकद्दमा खड़ा करता है, और अपने को मार खाने के योग्य दिखाता है। नीतिवचन 18:6
  • मूर्ख का विनाश उस की बातों से होता है, और उसके वचन उस के प्राण के लिये फन्दे होते हैं। नीतिवचन 18:7
  • जो निर्धन खराई से चलता है, वह उस मूर्ख से उत्तम है जो टेढ़ी बातें बोलता है। नीतिवचन 19:1
  • जब सुख से रहना मूर्ख को नहीं फबता, तो हाकिमों पर दास का प्रभुता करना कैसे फबे! नीतिवचन 19:10
  • मूर्ख पुत्र पिता के लिये विपत्ति ठहरता है, और पत्नी के झगड़े-रगड़े सदा टपकने के समान है। नीतिवचन 19:13
  • ठट्ठा करने वालों के लिये दण्ड ठहराया जाता है, और मूर्खों की पीठ के लिये कोड़े हैं। नीतिवचन 19:29
  • बुद्धिमान के घर में उत्तम धन और तेल पाए जाते हैं, परन्तु मूर्ख उन को उड़ा डालता है। नीतिवचन 21:20

  • मूर्ख के साम्हने न बोलना, नहीं तो वह तेरे बुद्धि के वचनों को तुच्छ जानेगा। नीतिवचन 23:9
  • मूर्खता का विचार भी पाप है, और ठट्ठा करने वाले से मनुष्य घृणा करते हैं॥ नीतिवचन 24:9
  • जैसा धूपकाल में हिम का, और कटनी के समय जल का पड़ना, वैसा ही मूर्ख की महिमा भी ठीक नहीं होती। नीतिवचन 26:1
  • घोड़े के लिये कोड़ा, गदहे के लिये बाग, और मूर्खों की पीठ के लिये छड़ी है। नीतिवचन 26:3
  • मूर्ख को उस की मूर्खता के अनुसार उत्तर न देना ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे। नीतिवचन 26:4
  • मूर्ख को उसकी मूढ़ता के अनुसार उत्तर न देना, ऐसा न हो कि वह अपने लेखे बुद्धिमान ठहरे। नीतिवचन 26:5
  • जो मूर्ख के हाथ से संदेशा भेजता है, वह मानो अपने पांव में कुल्हाड़ा मारता और विष पीता है। नीतिवचन 26:6
  • जैसे लंगड़े के पांव लड़खड़ाते हैं, वैसे ही मूर्खों के मुंह में नीतिवचन होता है। नीतिवचन 26:7

  • और जैसे पत्थरों के ढेर में मणियों की थैली, वैसे ही मूर्ख को महिमा देनी होती है। नीतिवचन 26:8
  • जैसे मतवाले के हाथ में कांटा गड़ता है, वैसे ही मूर्खों का कहा हुआ नीतिवचन भी दु:खदाई होता है। नीतिवचन 26:9
  • जैसा कोई तीरन्दाज जो अकारण सब को मारता हो, वैसा ही मूर्खों वा बटोहियों का मजदूरी में लगाने वाला भी होता है। नीतिवचन 26:10
  • जैसे कुत्ता अपनी छाँट को चाटता है, वैसे ही मूर्ख अपनी मूर्खता को दुहराता है। नीतिवचन 26:11
  • यदि तू ऐसा मनुष्य देखे जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान बनता हो, तो उस से अधिक आशा मूर्ख ही से है। नीतिवचन 26:12
  • चाहे तू मूर्ख को अनाज के बीच ओखली में डाल कर मूसल से कूटे, तौभी उसकी मूर्खता नहीं जाने की। नीतिवचन 27:22
  • जो अपने ऊपर भरोसा रखता है, वह मूर्ख है; और जो बुद्धि से चलता है, वह बचता है। नीतिवचन 28:26
  • मूर्ख अपने सारे मन की बात खोल देता है, परन्तु बुद्धिमान अपने मन को रोकता, और शान्त कर देता है।नीतिवचन 29:11
  • क्या तू बातें करने में उतावली करने वाले मनुष्य को देखता है? उस से अधिक तो मूर्ख ही से आशा है। नीतिवचन 29:20

  • और मैं ने अपना मन लगाया कि बुद्धि का भेद लूं और बावलेपन और मूर्खता को भी जान लूं। मुझे जान पड़ा कि यह भी वायु को पकड़ना है॥ सभोपदेशक 1:17
  • मैं ने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से क्योंकर बहलाऊं,
  • और क्योंकर मूर्खता को थामे रहूं, जब तक मालूम न करूं कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य जीवन भर करता रहे। सभोपदेशक 2:3
  • फिर मैं ने अपने मन को फेरा कि बुद्धि और बावलेपन और मूर्खता के कार्यों को देखूं;
  • क्योंकि जो मनुष्य राजा के पीछे आएगा, वह क्या करेगा? केवल वही जो होता चला आया है। सभोपदेशक 2:12
  • तब मैं ने देखा कि उजियाला अंधियारे से जितना उत्तम है, उतना बुद्धि भी मूर्खता से उत्तम है। सभोपदेशक 2:13

  • जो बुद्धिमान है, उसके सिर में आंखें रहती हैं, परन्तु मूर्ख अंधियारे में चलता है; तौभी मैं ने जान लिया कि दोनों की दशा एक सी होती है। सभोपदेशक 2:14
  • तब मैं ने मन में कहा, जैसी मूर्ख की दशा होगी, वैसी ही मेरी भी होगी; फिर मैं क्यों अधिक बुद्धिमान हुआ? और मैं ने मन में कहा, यह भी व्यर्थ ही है। सभोपदेशक 2:15
  • क्योंकि न तो बुद्धिमान का और न मूर्ख का स्मरण सर्वदा बना रहेगा, परन्तु भविष्य में सब कुछ बिसर जाएगा। सभोपदेशक 2:16
  • बुद्धिमान क्योंकर मूर्ख के समान मरता है! इसलिये मैं ने अपने जीवन से घृणा की,
  • क्योंकि जो काम संसार में किया जाता है मुझे बुरा मालूम हुआ; क्योंकि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है। सभोपदेशक 2:17
  • यह कौन जानता है कि वह मनुष्य बुद्धिमान होगा वा मूर्ख?
  • तौभी धरती पर जितना परिश्रम मैं ने किया,
  • और उसके लिये बुद्धि प्रयोग की उस सब का वही अधिकारी होगा।
  • यह भी व्यर्थ ही है। सभोपदेशक 2:19
  • बाइबल के अनुसार मूर्खता क्या है? मूर्ख छाती पर हाथ रखे रहता और अपना मांस खाता है। सभोपदेशक 4:5

  • बुद्धिमान लड़का दरिद्र होन पर भी ऐसे बूढ़े और मूर्ख राजा से अधिक उत्तम है जो फिर सम्मति ग्रहण न करे, सभोपदेशक 4:13
  • जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना;
  • बाइबल के अनुसार मूर्खता क्या है? सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है;

  • क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। सभोपदेशक 5:1
  • क्योंकि जैसे कार्य की अधिकता के कारण स्वप्न देखा जाता है, वैसे ही बहुत सी बातों का बोलने वाला मूर्ख ठहरता है। सभोपदेशक 5:3
  • जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना;
  • क्यांकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तू ने मानी हो उसे पूरी करना। सभोपदेशक 5:4
  • जो बुद्धिमान है वह मूर्ख से किस बात में बढ़कर है?

  • और कंगाल जो यह जानता है कि इस जीवन में किस प्रकार से चलना चाहिये, वह भी उस से किस बात में बढ़कर है? सभोपदेशक 6:8
  • बुद्धिमानों का मन शोक करने वालों के घर की ओर लगा रहता है परन्तु मूर्खों का मन आनन्द करने वालों के घर लगा रहता है। सभोपदेशक 7:4
  • मूर्खों के गीत सुनने से बुद्धिमान की घुड़की सुनना उत्तम है। सभोपदेशक 7:5

  • क्योंकि मूर्ख की हंसी हांडी के नीचे जलते हुए कांटो ही चरचराहट के समान होती है; यह भी व्यर्थ है। सभोपदेशक 7:6
  • अपने मन में उतावली से क्रोधित न हो, क्योंकि क्रोध मूर्खों ही के हृदय में रहता है। सभोपदेशक 7:9
  • अत्यन्त दुष्ट भी न बन, और न मूर्ख हो; तू क्यों अपने समय से पहिले मरे? सभोपदेशक 7:17
  • बाइबल के अनुसार मूर्खता क्या है?

  • मैं ने अपना मन लगाया कि बुद्धि के विषय में जान लूं; कि खोज निकालूं और उसका भेद जानूं,
  • और कि दुष्टता की मूर्खता और मूर्खता जो निरा बावलापन है जानूं। सभोपदेशक 7:25
  • बुद्धिमानों के वचन जो धीमे धीमे कहे जाते हैं वे मूर्खों के बीच प्रभुता करने वाले के चिल्ला चिल्लाकर कहने से अधिक सुने जाते हैं। सभोपदेशक 9:17
  • मरी हुई मक्खियों के कारण गन्धी का तेल सड़ने और बसाने लगता है; और थोड़ी सी मूर्खता बुद्धि और प्रतिष्ठा को घटा देती है। सभोपदेशक 10:1
  • बुद्धिमान का मन उचित बात की ओर रहता है परन्तु मूर्ख का मन उसके विपरीत रहता है। सभोपदेशक 10:2

  • वरन जब मूर्ख मार्ग पर चलता है, तब उसकी समझ काम नहीं देती, अैर वह सब से कहता है, मैं मूर्ख हूं॥ सभोपदेशक 10:3
  • अर्थात मूर्ख बड़ी प्रतिष्ठा के स्थानों में ठहराए जाते हैं, और धनवाल लोग नीचे बैठते हैं। सभोपदेशक 10:6
  • बुद्धिमान के वचनों के कारण अनुग्रह होता है, परन्तु मूर्ख अपने वचनों के द्वारा नाश होते हैं। सभोपदेशक 10:12
  • उसकी बात का आरम्भ मूर्खता का, और उनका अन्त दुखदाई बावलापन होता है। सभोपदेशक 10:13
  • मूर्ख बहुत बातें बढ़ा कर बोलता है,

  • तौभी कोई मनुष्य नहीं जानता कि क्या होगा, और कौन बता सकता है कि उसके बाद क्या होने वाला है? सभोपदेशक 10:14
  • मूर्ख को परिश्रम से थकावट ही होती है, यहां तक कि वह नहीं जानता कि नगर को कैसे जाए॥ सभोपदेशक 10:15
  • इस कारण प्रभु न तो इनके जवानों से प्रसन्न होगा, और न इनके अनाथ बालकों और विधवाओं पर दया करेगा;
  • क्योंकि हर एक भक्तिहीन और कुकर्मी है, और हर एक के मुख से मूर्खता की बातें निकलती हैं।

  • इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ और उसका हाथ अब तक बढ़ा हुआ है॥ यशायाह 9:17
  • निश्चय सोअन के सब हाकिम मूर्ख हैं; और फिरौन के बुद्धिमान मन्त्रियों की युक्ति पशु की सी ठहरी।
  • फिर तुम फिरौन से कैसे कह सकते हो कि मैं बुद्धिमानों का पुत्र और प्राचीन राजाओं की सन्तान हूं? यशायाह 19:11

बाइबल के अनुसार मूर्खता क्या है?

  • और वहां एक सड़क अर्थात राजमार्ग होगा, उसका नाम पवित्र मार्ग होगा; कोई अशुद्ध जन उस पर से न चलने पाएगा;
  • वह तो उन्हीं के लिये रहेगा और उस मार्ग पर जो चलेंगे वह चाहे मूर्ख भी हों तौभी कभी न भटकेंगे। यशायाह 35:8
    मैं झूठे लोगों के कहे हुए चिन्हों को व्यर्थ कर देता और भावी कहने वालों को बावला कर देता हूं;
  • जो बुद्धिमानों को पीछे हटा देता और उनकी पण्डिताई को मूर्खता बनाता हूं; यशायाह 44:25
  • क्योंकि मेरी प्रजा मूढ़ है, वे मुझे नहीं जानते; वे ऐसे मूर्ख लड़के हैं जिन में कुछ भी समझ नहीं।

  • बुराई करने को तो वे बुद्धिमान हैं, परन्तु भलाई करना वे नहीं जानते। यिर्मयाह 4:22
  • हे मूर्ख और निर्बुद्धि लोगो, तुम जो आंखें रहते हुए नहीं देखते, जो कान रहते हुए नहीं सुनते, यह सुनो। यिर्मयाह 5:21
  • परन्तु वे पशु सरीखे निरे मूर्ख हैं; मूर्त्तियों से क्या शिक्षा? वे तो काठ ही हैं! यिर्मयाह 10:8
  • शोमरोन के भविष्यद्वक्ताओं में मैं ने यह मूर्खता देखी थी कि वे बाल के नाम से भविष्यद्वाणी करते और मेरी प्रजा इस्राएल को भटका देते थे। यिर्मयाह 23:13
  • बड़ा बोल बोलने वालों पर तलवार चलेगी, और वे मूर्ख बनेंगे! उसके शूरवीरों पर भी तलवार चलेगी, और वे विस्मित हो जाएंगे! यिर्मयाह 50:36
  • तेरे भविष्यद्वक्ताओं ने दर्शन का दावा कर के तुझ से व्यर्थ और मूर्खता की बातें कही हैं;

  • उन्होंने तेरा अधर्म प्रगट नहीं किया, नहीं तो तेरी बंधुआई न होने पाती;
  • परन्तु उन्होंने तुझे व्यर्थ के और झूठे वचन बताए।
  • जो तेरे लिये देश से निकाल दिए जाने का कारण हुए। विलापगीत 2:14
  • दण्ड के दिन आए हैं; बदला लेने के दिन आए हैं; और इस्राएल यह जान लेगा।
  • उनके बहुत से अधर्म और बड़े द्वेष के कारण भविष्यद्वक्ता तो मूर्ख, और जिस पुरूष पर आत्मा उतरता है, वह बावला ठहरेगा॥ होशे 9:7
  • परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई अपने भाई पर क्रोध करेगा, वह कचहरी में दण्ड के योग्य होगा:

  • और जो कोई अपने भाई को निकम्मा कहेगा वह महासभा में दण्ड के योग्य होगा;
  • और जो कोई कहे “अरे मूर्ख” वह नरक की आग के दण्ड के योग्य होगा। मत्ती 5:22
  • हे मूर्खों, और अन्धों, कौन बड़ा है, सोना या वह मन्दिर जिस से सोना पवित्र होता है? मत्ती 23:17
  • उन में पांच मूर्ख और पांच समझदार थीं। मत्ती 25:2
  • मूर्खों ने अपनी मशालें तो लीं, परन्तु अपने साथ तेल नहीं लिया। मत्ती 25:3

  • और मूर्खों ने समझदारों से कहा, अपने तेल में से कुछ हमें भी दो, क्योंकि हमारी मशालें बुझी जाती हैं। मत्ती 25:8
  • चोरी, हत्या, पर स्त्रीगमन, लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। मरकुस 7:22
  • परन्तु परमेश्वर ने उस से कहा; हे मूर्ख, इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा:
  • तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है, वह किस का होगा? लूका 12:20
  • वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए। रोमियो 1:22
  • क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है,

  • परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। 1 कुरिन्थियों 1:18
  • कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? और कहां इस संसार का विवादी?
  • क्या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया? 1 कुरिन्थियों 1:20
  • क्योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्छा लगा,
  • कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे। 1 कुरिन्थियों 1:21
  • परन्तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं,
  • जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है। 1 कुरिन्थियों 1:23
  • बाइबल के अनुसार मूर्खता क्या है? क्योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है;

  • और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है॥ 1 कुरिन्थियों 1:25
  • परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे;
  • और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे।1 कुरिन्थियों 1:27
  • परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उस की दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं,
  • और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है। 1 कुरिन्थियों 2:14
  • कोई अपने आप को धोखा न दे:
  • यदि तुम में से कोई इस संसार में अपने आप को ज्ञानी समझे, तो मूर्ख बने; कि ज्ञानी हो जाए। 1 कुरिन्थियों 3:18
  • क्योंकि इस संसार का ज्ञान परमेश्वर के निकट मूर्खता है,

  • जैसा लिखा है; कि वह ज्ञानियों को उन की चतुराई में फंसा देता है। 1 कुरिन्थियों 3:19
  • हम मसीह के लिये मूर्ख है; परन्तु तुम मसीह में बुद्धिमान हो:
  • हम निर्बल हैं परन्तु तुम बलवान हो: तुम आदर पाते हो, परन्तु हम निरादर होते हैं। 1 कुरिन्थियों 4:10
  • क्योंकि हमें यह हियाव नहीं कि हम अपने आप को उन में से ऐसे कितनों के साथ गिनें,
  • या उन से अपने को मिलाएं, जो अपनी प्रशंसा करते हैं,
  • और अपने आप को आपस में नाप तौलकर एक दूसरे से मिलान करके मूर्ख ठहरते हैं। 2 कुरिन्थियों 10:12
  • यदि तुम मेरी थोड़ी मूर्खता सह लेते तो क्या ही भला होता; हां, मेरी सह भी लेते हो। 2 कुरिन्थियों 11:1
  • मैं फिर कहता हूं, कोई मुझे मूर्ख न समझे; नहीं तो मूर्ख ही समझकर मेरी सह लो,

  • ताकि थोड़ा सा मैं भी घमण्ड करूं। 2 कुरिन्थियों 11:16
  • इस बेधड़क घमण्ड से बोलने में जो कुछ मैं कहता हूं वह प्रभू की आज्ञा के अनुसार नहीं पर मानों मूर्खता से ही कहता हूं। 2 कुरिन्थियों 11:17
  • तुम तो समझदार होकर आनन्द से मूर्खों की सह लेते हो। 2 कुरिन्थियों 11:19
  • मेरा कहना अनादर की रीति पर है, मानो कि हम निर्बल से थे;
  • परन्तु जिस किसी बात में कोई हियाव करता है (मैं मूर्खता से कहता हूं) तो मैं भी हियाव करता हूं। 2 कुरिन्थियों 11:21
  • क्योंकि यदि मैं घमण्ड करना चाहूं भी तो मूर्ख न हूंगा, क्योंकि सच बोलूंगा; तोभी रुक जाता हूं,

  • ऐसा न हो, कि जैसा कोई मुझे देखता है, या मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर समझे। 2 कुरिन्थियों 12:6
  • मैं मूर्ख तो बना, परन्तु तुम ही ने मुझ से यह बरबस करवाया:
  • तुम्हें तो मेरी प्रशंसा करनी चाहिए थी, क्योंकि यद्यपि मैं कुछ भी नहीं, तौभी उन बड़े से बड़े प्रेरितों से किसी बात में कम नहीं हूं। 2 कुरिन्थियों 12:11
  • पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं। 2 तीमुथियुस 2:23
  • पर मूर्खता के विवादों, और वंशावलियों, और बैर विरोध, और उन झगड़ों से, जो व्यवस्था के विषय में हों बचा रह; क्योंकि वे निष्फल और व्यर्थ हैं। तीतुस 3:9

21 मूर्खतापूर्ण बातों से बचें-भाग-1

मूर्खता पूर्ण बातें: मानो प्रभावहीन जीवन तुल्य हैं

बुद्धि और ज्ञान देने वाले नीति वचन