google.com, pub-9683471800292205, DIRECT, f08c47fec0942fa0 भजन संहिता 37-स्तुति और प्रार्थना पूर्ण भजन - Optimal Health

भजन संहिता 37-स्तुति और प्रार्थना पूर्ण भजन

भजन संहिता 37-स्तुति और प्रार्थना पूर्ण भजन

भजन संहिता 37-स्तुति और प्रार्थना पूर्ण भजन- 1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर! भजन संहिता 37:1

 

भजन संहिता 37-स्तुति और प्रार्थना पूर्ण भजन
भजन संहिता 37-स्तुति और प्रार्थना पूर्ण भजन

 

 

2 क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाईं मुर्झा जाएंगे।
भजन संहिता 37:2

3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह।
भजन संहिता 37:3

4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा॥
भजन संहिता 37:4

भजन संहिता 37

5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा।

6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा॥
भजन संहिता 37:6

7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सुफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है!
भजन संहिता 37:7

8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उससे बुराई ही निकलेगी।
भजन संहिता 37:8

9 क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे; और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
भजन संहिता 37:9

भजन संहिता 37

10 थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं; और तू उसके स्थान को भलीं भांति देखने पर भी उसको न पाएगा।
भजन संहिता 37:10

11 परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे।
भजन संहिता 37:11

12 दुष्ट धर्मी के विरुद्ध बुरी युक्ति निकालता है, और उस पर दांत पीसता है;
भजन संहिता 37:12

13 परन्तु प्रभु उस पर हंसेगा, क्योंकि वह देखता है कि उसका दिन आने वाला है॥
भजन संहिता 37:13

भजन संहिता 37

14 दुष्ट लोग तलवार खींचे और धनुष बढ़ाए हुए हैं, ताकि दीन दरिद्र को गिरा दें, और सीधी चाल चलने वालों को वध करें।
भजन संहिता 37:14

15 उनकी तलवारों से उन्हीं के हृदय छिदेंगे, और उनके धनुष तोड़े जाएंगे॥
भजन संहिता 37:15

16 धर्मी का थोड़ा से माल दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है।
भजन संहिता 37:16

17 क्योंकि दुष्टोंकी भुजाएं तो तोड़ी जाएंगी; परन्तु यहोवा धर्मियों को सम्भालता है॥
भजन संहिता 37:17

18 यहोवा खरे लोगों की आयु की सुधि रखता है, और उनका भाग सदैव बना रहेगा।
भजन संहिता 37:18

19 विपत्ति के समय, उनकी आशा न टूटेगी और न वे लज्जित होंगे, और अकाल के दिनों में वे तृप्त रहेंगे॥
भजन संहिता 37:19

भजन संहिता 37

20 दुष्ट लोग नाश हो जाएंगे; और यहोवा के शत्रु खेत की सुथरी घास की नाईं नाश होंगे, वे धूएं की नाईं बिलाय जाएंगे॥
भजन संहिता 37:20

21 दुष्ट ऋण लेता है, और भरता नहीं परन्तु धर्मीं अनुग्रह करके दान देता है;
भजन संहिता 37:21

22 क्योंकि जो उससे आशीष पाते हैं वे तो पृथ्वी के अधिकारी होंगे, परन्तु जो उससे शापित होते हैं, वे नाश को जाएंगे॥
भजन संहिता 37:22

भजन संहिता 37

23 मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है;
भजन संहिता 37:23

24 चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है॥
भजन संहिता 37:24

25 मैं लड़कपन से लेकर बुढ़ापे तक देखता आया हूं; परन्तु न तो कभी धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को टुकड़े मांगते देखा है।
भजन संहिता 37:25
25 I have been young, and now am old; and I have not seen the just forsaken, nor his seed seeking bread.
Psalms 37:25

26 वह तो दिन भर अनुग्रह कर करके ऋण देता है, और उसके वंश पर आशीष फलती रहती है॥
भजन संहिता 37:26

27 बुराई को छोड़ भलाई कर; और तू सर्वदा बना रहेगा।
भजन संहिता 37:27

भजन संहिता 37

28 क्योंकि यहोवा न्याय से प्रीति रखता; और अपने भक्तों को न तजेगा। उनकी तो रक्षा सदा होती है, परन्तु दुष्टों का वंश काट डाला जाएगा।
भजन संहिता 37:28

29 धर्मी लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और उस में सदा बसे रहेंगे॥
भजन संहिता 37:29

30 धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है।
भजन संहिता 37:30

31 उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते॥
भजन संहिता 37:31

भजन संहिता 37

32 दुष्ट धर्मी की ताक में रहता है। और उसके मार डालने का यत्न करता है।
भजन संहिता 37:32

33 यहोवा उसको उसके हाथ में न छोड़ेगा, और जब उसका विचार किया जाए तब वह उसे दोषी न ठहराएगा॥
भजन संहिता 37:33

34 यहोवा की बाट जोहता रह, और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर पृथ्वी का अधिकारी कर देगा; जब दुष्ट काट डाले जाएंगे, तब तू देखेगा॥
भजन संहिता 37:34

35 मैं ने दुष्ट को बड़ा पराक्रमी और ऐसा फैलता हुए देखा, जैसा कोई हरा पेड़ अपने निज भूमि में फैलता है।
भजन संहिता 37:35

36 परन्तु जब कोई उधर से गया तो देखा कि वह वहां है ही नहीं; और मैं ने भी उसे ढूंढ़ा, परन्तु कहीं न पाया॥
भजन संहिता 37:36

37 खरे मनुष्य पर दृष्टि कर और धर्मी को देख, क्योंकि मेल से रहने वाले पुरूष का अन्तफल अच्छा है।
भजन संहिता 37:37

भजन संहिता 37

38 परन्तु अपराधी एक साथ सत्यानाश किए जाएंगे; दुष्टों का अन्तफल सर्वनाश है॥
भजन संहिता 37:38

39 धर्मियों की मुक्ति यहोवा की ओर से होती है; संकट के समय वह उनका दृढ़ गढ़ है।
भजन संहिता 37:39

40 और यहोवा उनकी सहायता करके उन को बचाता है; वह उन को दुष्टों से छुड़ाकर उनका उद्धार करता है, इसलिये कि उन्होंने उस में अपनी शरण ली है॥
भजन संहिता 37:40

भजन संहिता 51-दाऊद की प्रार्थना और पापों से पछताप का भजन 

https://youtu.be/vE-DAzvslMU