भजन संहिता 51-प्रार्थना और पापों से पच्छताप का भजन 

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भजन संहिता 51-प्रार्थना और पापों से पच्छताप का भजन

भजन संहिता 51- प्रार्थना और पापों से पच्छताप का भजन । दाऊद के स्तुति और प्रार्थना पूर्ण भजन।

1 हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
भजन संहिता 51:1

भजन संहिता 51:2-4

मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!

मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।

मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।

भजन संहिता 51:5-7

देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा॥

देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।

7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।

भजन संहिता 51:8-11

मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।

अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल॥

हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।

मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।

भजन संहिता 51:12-14

अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल॥

तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।

हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, तब मैं तेरे धर्म का जयजयकार करने पाऊंगा॥

भजन संहिता 51:15-19

हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा।

क्योंकि तू मेलबलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता; होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता।

टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता॥

प्रसन्न होकर सिय्योन की भलाई कर, यरूशलेम की शहरपनाह को तू बना,

तब तू धर्म के बलिदानों से अर्थात सर्वांग पशुओं के होमबलि से प्रसन्न होगा; तब लोग तेरी वेदी पर बैल चढ़ाएंगे॥

Psalms 51:1-19

1 Unto the end, a psalm of David, when Nathan the prophet came to him after he had sinned with Bethsabee. Have mercy on me, O God, according to thy great mercy. And according to the multitude of thy tender mercies blot out my iniquity.
Psalms 51:1

2 Wash me yet more from my iniquity and cleanse me from my sin.
Psalms 51:2

3 For I know my iniquity, and my sin is always before me.
Psalms 51:3

4 To thee only have I sinned, and have done evil before thee: that thou mayst be justified in thy words and mayst overcome when thou art judged.
Psalms 51:4

5 For behold I was conceived in iniquities, and in sins did my mother conceive me.
Psalms 51:5

6 For behold thou hast loved truth: the uncertain and hidden things of thy wisdom thou hast made manifest to me.
Psalms 51:6

7 Thou shalt sprinkle me with hyssop, and I shall be cleansed: thou shalt wash me, and I shall be made whiter than snow.
Psalms 51:7

8 To my hearing thou shalt give joy and gladness: and the bones that have been humbled shall rejoice.
Psalms 51:8

9 Turn away thy face from my sins and blot out all my iniquities.
Psalms 51:9

10 Create a clean heart in me, O God: and renew a right spirit within my bowels.
Psalms 51:10

11 Cast me not away from thy face; and take not thy holy spirit from me.
Psalms 51:11

12 Restore unto me the joy of thy salvation and strengthen me with a perfect spirit.
Psalms 51:12

13 I will teach the unjust thy ways: and the wicked shall be converted to thee.
Psalms 51:13

14 Deliver me from blood, O God, thou God of my salvation: and my tongue shall extol thy justice.
Psalms 51:14

15 O Lord, thou wilt open my lips: and my mouth shall declare thy praise.
Psalms 51:15

16 For if thou hadst desired sacrifice, I would indeed have given it: with burnt offerings thou wilt not be delighted.
Psalms 51:16

17 A sacrifice to God is an afflicted spirit: a contrite and humbled heart, O God, thou wilt not despise.
Psalms 51:17

18 Deal favorably, O Lord, in thy goodwill with Sion; that the walls of Jerusalem may be built up.
Psalms 51:18

19 Then shalt thou accept the sacrifice of justice, oblations, and whole burnt offerings: then shall they lay calves upon thy altar.
Psalms 51:19

MUKTI DILAYE YEESHU NAAM

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बुद्धि और ज्ञान के वचन-धन्यवाद दीजिये।भाग 4/4