यहोवा का धन्यवाद हो, धन्यवाद हो, धन्यवाद हो,

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यहोवा का धन्यवाद हो, धन्यवाद हो, धन्यवाद हो

यहोवा का धन्यवाद हो, धन्यवाद हो, धन्यवाद हो,

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Psalm-103:1

ये मेरे मन गा तू, ये मेरे मन गा तू,

मेरा प्राण और सब कुछ मेरा

करे स्तुति, करे स्तुति उसके पाक नाम की,

ये मेरे मन सुन तू, भूल ना उपकार उसका।

यहोवा…!

 

पापों को वो है मिटाता, हाँ मिटाता

रोगों से चंगा वो करता, हाँ वो करता  × 2

तुझे नाश होने से वो है बचाता

तुझ पर करुणा का ताज रखता

यहोवा…!

 

प्रभु दया का सागर , है सागर

नहीं क्रोधी वो सदा तक, वो सदा तक × 2

पूरब से जितना पश्चिम है दूर

उतने ही करता पाप हमारे दूर

यहोवा…!

इंसां है फूल की मानिंद, हाँ मानिंद

कुछ पल खिला मुरझाया, मुरझाया × 2

प्रभु के लोगों पर उसकी दया

सदा सदा तक बनी रहती 

यहोवा का धन्यवाद हो, धन्यवाद हो, धन्यवाद हो,

ये मेरे मन गा तू, ये मेरे मन गा तू,

मेरा प्राण और सब कुछ मेरा

करे स्तुति, करे स्तुति उसके पाक नाम की,

ये मेरे मन सुन तू, भूल ना उपकार उसका।

यहोवा…!

 

परमेश्‍वर का प्रेम-भजन संहिता 103:1-9

1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!
भजन संहिता 103:1

2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
भजन संहिता 103:2

3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,
भजन संहिता 103:3

4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,
भजन संहिता 103:4

5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है॥
भजन संहिता 103:5

6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।
भजन संहिता 103:6

7 उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए।
भजन संहिता 103:7

8 यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।
भजन संहिता 103:8

9 वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।
भजन संहिता 103:9

भजन संहिता 103:10-22


10 उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है।
भजन संहिता 103:10

11 जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।
भजन संहिता 103:11

12 उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
भजन संहिता 103:12

13 जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।
भजन संहिता 103:13

14 क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है॥
भजन संहिता 103:14

15 मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है,
भजन संहिता 103:15

16 जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
भजन संहिता 103:16

17 परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती- पोतों पर भी प्रगट होता रहता है,
भजन संहिता 103:17

18 अर्थात उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण करके उन पर चलते हैं॥
भजन संहिता 103:18

19 यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है।
भजन संहिता 103:19

20 हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो!
भजन संहिता 103:20

21 हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके टहलुओं, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो!
भजन संहिता 103:21

22 हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!
भजन संहिता 103:22

Psalms 103:1-22


1 For David himself. Bless the Lord, O my soul: and let all that is within me bless his holy name.
Psalms 103:1

2 Bless the Lord, O my soul, and never forget all he hath done for thee.
Psalms 103:2

3 Who forgiveth all thy iniquities: who healeth all thy diseases.
Psalms 103:3

4 Who redeemeth thy life from destruction: who crowneth thee with mercy and compassion.
Psalms 103:4

5 Who satisfieth thy desire with good things: thy youth shall be renewed like the eagle’s.
Psalms 103:5

6 The Lord doth mercies, and judgment for all that suffer wrong.
Psalms 103:6

7 He hath made his ways known to Moses: his wills to the children of Israel.
Psalms 103:7

8 The ford is compassionate and merciful: longsuffering and plenteous in mercy.
Psalms 103:8

9 He will not always be angry: nor will he threaten for ever.
Psalms 103:9

10 He hath not dealt with us according to our sins: nor rewarded us according to our iniquities.
Psalms 103:10

Psalms 103:11-22

11 For according to the height of the heaven above the earth: he hath strengthened his mercy towards them that fear him.
Psalms 103:11

12 As far as the east is from the west, so far hath he removed our iniquities from us.
Psalms 103:12

13 As a father hath compassion on his children, so hath the Lord compassion on them that fear him:
Psalms 103:13

14 for he knoweth our frame. He remembereth that we are dust:
Psalms 103:14

15 man’s days are as grass, as the flower of the field so shall he flourish.
Psalms 103:15

16 For the spirit shall pass in him, and he shall not be: and he shall know his place no more.
Psalms 103:16

17 But the mercy of the Lord is from eternity and unto eternity upon them that fear him: And his justice unto children’s children,
Psalms 103:17

18 to such as keep his covenant, And are mindful of his commandments to do them.
Psalms 103:18

19 The Lord hath prepared his throne in heaven: and his kingdom shall rule over all.
Psalms 103:19

20 Bless the Lord, all ye his angels: you that are mighty in strength, and execute his word, hearkening to the voice of his orders.
Psalms 103:20

21 Bless the Lord, all ye his hosts: you ministers of his that do his will.
Psalms 103:21

22 Bless the Lord, all his works: in every place of his dominion, O my soul, bless thou the Lord.
Psalms 103:22

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