बाइबिल से 400+ “धन्य” वचन (भाग 1) | Bible Se 400+ DHANYWAD Ke Vachan (Blessing Verses)

1) बाइबिल से 400+ “धन्य” वचन (भाग 1) | Bible Se 400+ DHANYWAD Ke Vachan (Blessing Verses)

बाइबिल से 400+ “धन्य” वचन (भाग 1) | Bible Se 400+ DHANYWAD Ke Vachan (Blessing Verses) (बाइबिल से धन्य वचन (Attitude Of Gratitude), परमेश्वर का धन्यवाद करो, क्योंकि वो भला है और उसकी करूणा सदा की है।

numbers 6 24 bibleverse scriptures blessing wall clocks 1

पुराने नियम

उत्पत्ति 9:26, 14:19, 20, 22:18, 24:27, 31, 48

  • (1). फिर उसने कहा, शेम का परमेश्वर यहोवा धन्य है, और कनान शेम का दास होवे। उत्पत्ति 9:26
  • (2). उसने अब्राम को यह आशीर्वाद दिया, कि परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो। उत्पत्ति 14:19
  • (3). धन्य है परमप्रधान ईश्वर, जिसने तेरे द्रोहियों को तेरे वश में कर दिया है।तब अब्राम ने उसको सब का दशमांश दिया। उत्पत्ति 14:20
  • (4). पृथ्वी की सारी जातियां अपने को तेरे वंश के कारण धन्य मानेंगी:क्योंकि तू ने मेरी बात मानी है। उत्पत्ति 22:18
  • (5). धन्य है मेरे स्वामी इब्राहीम का परमेश्वर यहोवा,कि उसने अपनी करूणा और सच्चाई को मेरे स्वामी पर से हटा नहीं लिया:यहोवा ने मुझ को ठीक मार्ग पर चला कर मेरे स्वामी के भाई बन्धुओं के घर पर पहुचा दिया है। उत्पत्ति 24:27
  • (6). उसने कहा, हे यहोवा की ओर से धन्य पुरूष भीतर आ: तू क्यों बाहर खड़ा है? मैं ने घर को, और ऊंटो के लिये भी स्थान तैयार किया है। उत्पत्ति 24:31
  • (7). फिर मैं ने सिर झुका कर यहोवा को दण्डवत किया, और अपने स्वामी इब्राहीम के परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा,क्योंकि उसने मुझे ठीक मार्ग से पहुंचाया कि मैं अपने स्वामी के पुत्र के लिये उसकी भतीजी को ले जाऊं। उत्पत्ति 24:48
  • (8). मैं तेरे वंश को आकाश के तारागण के समान करूंगा। और मैं तेरे वंश को ये सब देश दूंगा, और पृथ्वी की सारी जातियां तेरे वंश के कारण अपने को धन्य मानेंगी। उत्पत्ति 26:4
  • (9). उन्होंने कहा, हम ने तो प्रत्यक्ष देखा है, कि यहोवा तेरे साथ रहता है: सो हम ने सोचा, कि तू तो यहोवा की ओर से धन्य है, सो हमारे तेरे बीच में शपथ खाई जाए, और हम तुझ से इस विषय की वाचा बन्धाएं; उत्पत्ति 26:28
  • (10) फिर वह गर्भवती हुई और उसके एक और पुत्र उत्पन्न हुआ; और उसने कहा, अब की बार तो मैं यहोवा का धन्यवाद करूंगी, इसलिये उसने उसका नाम यहूदा रखा; तब उसकी कोख बन्द हो गई॥ उत्पत्ति 29:35

उत्पत्ति 30:13

  • (11) तब लिआ: ने कहा, मैं धन्य हूं; निश्चय स्त्रियां मुझे धन्य कहेंगी:सो उसने उसका नाम आशेर रखा। उत्पत्ति 30:13
  • (12) हे यहूदा, तेरे भाई तेरा धन्यवाद करेंगे, तेरा हाथ तेरे शत्रुओं की गर्दन पर पड़ेगा; तेरे पिता के पुत्र तुझे दण्डवत करेंगे॥ उत्पत्ति 49:8

निर्गमन 18:10, लैव्यवस्था 7:12-15, 22:29

  • (13) धन्य है यहोवा, जिसने तुम को फिरौन और मिस्रियों के वश से छुड़ाया, जिसने तुम लोगों को मिस्रियों की मुट्ठी में से छुड़ाया है। निर्गमन 18:10
  • (15) यदि वह उसे धन्यवाद के लिये चढ़ाए, तो धन्यवाद-बलि के साथ तेल से सने हुए अखमीरी फुलके,और तेल से चुपड़ी हुई अखमीरी फुलके, और तेल से चुपड़ी हुई अखमीरी रोटियां, और तेल से सने हुए मैदे के फुलके तेल से तर चढ़ाए। लैव्यवस्था 7:12
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  • (16) वह अपने धन्यवाद वाले मेलबलि के साथ अखमीरी रोटियां भी चढ़ाए। लैव्यवस्था 7:13
  • (17) उस धन्यवाद वाले मेलबलि का मांस बलिदान चढ़ाने के दिन ही खाया जाए; उस में से कुछ भी भोर तक शेष न रह जाए। लैव्यवस्था 7:15
  • (18 जब तुम यहोवा के लिये धन्यवाद का मेलबलि चढ़ाओ, तो उसे इसी प्रकार से करना जिस से वह ग्रहणयोग्य ठहरे॥ लैव्यवस्था 22:29
  • (19) इसलिये आ, और उन लोगों को मेरे निमित्त शाप दे, क्योंकि वे मुझ से अधिक बलवन्त हैं, तब सम्भव है कि हम उन पर जयवन्त हों, और हम सब इन को अपने देश से मारकर निकाल दें; क्योंकि यह तो मैं जानता हूं कि जिस को तू आशीर्वाद देता है वह धन्य होता है, और जिस को तू शाप देता है वह स्रापित होता है। गिनती 22:6
  • (20) तू सब देशों के लोगों से अधिक धन्य होगा; तेरे बीच में न पुरूष न स्त्री निर्वंश होगी, और तेरे पशुओं में भी ऐसा कोई न होगा। व्यवस्थाविवरण 7:14
  • (21) तू पेट भर खाएगा, और उस उत्तम देश के कारण जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देगा उसका धन्य मानेगा। व्यवस्थाविवरण 8:10

गिनती 22:6, व्यवस्थाविवरण 7:14, 28:3-6, 33:20, 29

  • (22) धन्य हो तू नगर में, धन्य हो तू खेत में। व्यवस्थाविवरण 28:3
  • (23) धन्य हो तेरी सन्तान, और तेरी भूमि की उपज, और गाय और भेड़-बकरी आदि पशुओं के बच्चे। व्यवस्थाविवरण 28:4
  • (24) धन्य हो तेरी टोकरी और तेरी कठौती। व्यवस्थाविवरण 28:5
  • (25) धन्य हो तू भीतर आते समय, और धन्य हो तू बाहर जाते समय। व्यवस्थाविवरण 28:6
  • (26) फिर गाद के विषय में उसने कहा, धन्य वह है जो गाद को बढ़ाता है! गाद तो सिंहनी के समान रहता है, और बांह को, वरन सिर के चांद तक को फाड़ डालता है॥व्यवस्थाविवरण 33:20
  • (27) हे इस्राएल, तू क्या ही धन्य है! हे यहोवा से उद्धार पाई हुई प्रजा, तेरे तुल्य कौन है? वह तो तेरी सहायता के लिये ढाल, और तेरे प्रताप के लिये तलवार है; तेरे शत्रु तुझे सराहेंगे,और तू उनके ऊंचे स्थानों को रौंदेगा॥ व्यवस्थाविवरण 33:29

यहोशू 22:33, न्यायियों 5:2, 9, 24

  • (28) तब इस्राएली प्रसन्न हुए; और परमेश्वर को धन्य कहा, और रूबेनियों और गादियों से लड़ने और उनके रहने का देश उजाड़ने के लिये चढ़ाई करने की चर्चा फिर न की। यहोशू 22:33
  • (29) कि इस्राएल के अगुवों ने जो अगुवाई की और प्रजा जो अपनी ही इच्छा से भरती हुई, इसके लिये यहोवा को धन्य कहो! न्यायियों 5:2
  • (30) मेरा मन इस्राएल के हाकिमों की ओर लगा है, जो प्रजा के बीच में अपनी ही इच्छा से भरती हुए। यहोवा को धन्य कहो॥ न्यायियों 5:9
  • (31) सब स्त्रियों में से केनी हेबेर की स्त्री याएल धन्य ठहरेगी; डेरों में से रहनेवाली सब स्त्रियों में वह धन्य ठहरेगी॥ न्यायियों 5:24
  • (32) उसकी सास ने उस से पूछा, आज तू कहां बीनती, और कहां काम करती थी?

धन्य वह हो जिसने तेरी सुधि ली है। रूत 2:19

  • तब उसने अपनी सास को बता दिया, कि मैं ने किस के पास काम किया, और कहा, कि जिस पुरूष के पास मैं ने आज काम किया उसका नाम बोअज है। रूत 2:19
  • (33) तब स्त्रियों ने नाओमी से कहा, यहोवा धन्य है, जिसने तुझे आज छुड़ाने वाले कुटुम्बी के बिना नहीं छोड़ा; इस्राएल में इसका बड़ा नाम हो। रूत 4:14
  • (34) ज्योंही तुम नगर में पहुंचो त्योंही वह तुम को ऊंचे स्थान पर खाना खाने को जाने से पहिले मिलेगा; क्योंकि जब तक वह न पहुंचे तब तक लोग भोजन करेंगे, इसलिये कि यज्ञ के विषय में वही धन्यवाद करता; तब उसके पीछे ही न्योतहरी भोजन करते हैं। इसलिये तुम अभी चढ़ जाओ, इसी समय वह तुम्हें मिलेगा। 1 शमूएल 9:13
  • (35) दाऊद ने अबीगैल से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य है, जिसने आज के दिन मुझ से भेंट करने के लिये तुझे भेजा है। 1 शमूएल 25:32
  • (36) तेरा विवेक धन्य है, और तू आप भी धन्य है कि तू ने मुझे आज के दिन खून करने और अपना पलटा आप लेने से रोक लिया है। 1 शमूएल 25:33
  • (37) नाबाल के मरने का हाल सुनकर दाऊद ने कहा, धन्य है यहोवा जिसने नाबाल के साथ मेरी नामधराई का मुकद्दमा लड़कर अपने दास को बुराई से रोक रखा; और यहोवा ने नाबाल की बुराई को उसी के सिर पर लाद दिया है। तब दाऊद ने लोगों को अबीगैल के पास इसलिये भेजा कि वे उस से उसकी पत्नी होने की बातचीत करें। 1 शमूएल 25:39
बाइबिल से 400+ "धन्य" वचन (भाग 1) | Bible Se 400+ DHANYWAD Ke Vachan (Blessing Verses)

बाइबिल से “धन्य” वचन | Blessing Verses from the Bible

  • (38) शाऊलने दाऊद से कहा, हे मेरे बेटे दाऊद तू धन्य है! तू बड़े बड़े काम करेगा और तेरे काम सफल होंगे।तब दाऊद ने अपना मार्ग लिया, और शाऊल भी अपने स्थान को लौट गया॥ 1 शमूएल 26:25
  • (39) तो अब प्रसन्न हो कर अपने दास के घराने पर ऐसी आशीष दे, कि वह तेरे सम्मुख सदैव बना रहे; क्योंकि, हे प्रभु यहोवा, तू ने ऐसा ही कहा है, और तेरे दास का घराना तुझ से आशीष पाकर सदैव धन्य रहे। 2 शमूएल 7:29
  • (40) तब अहीमास ने पुकार के राजा से कहा, कल्याण। फिर उसने भूमि पर मुंह के बल गिर राजा को दण्डवत् करके कहा, तेरा परमेश्वर यहोवा धन्य है, जिसने मेरे प्रभु राजा के विरुद्ध हाथ उठाने वाले मनुष्यों को तेरे वश में कर दिया है! 2 शमूएल 18:28

2 शमूएल 22:47-48, 2 शमूएल 22:50, 1 राजा 1:47-48

  • (41)यहोवा जीवित है; मेरी चट्टान धन्य है, और परमेश्वर जो मेरे उद्धार की चट्टान है, उसकी महिमा हो। 2 शमूएल 22:47
  • (42) धन्य है मेरा पलटा लेनेवाला ईश्वर, जो देश देश के लोगों को मेरे वश में कर देता है, 2 शमूएल 22:48
  • (43) इस कारण, हे यहोवा, मैं जाति जाति के साम्हने तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम का भजन गाऊंगा। 2 शमूएल 22:50
  • (44) फिर राजा के कर्मचारी हमारे प्रभु दाऊद राजा को यह कहकर धन्य कहने आए, कि तेरा परमेश्वर, सुलैमान का नाम, तेरे नाम से भी महान करे, उसका राज्य तेरे राज्य से भी अधिक बढ़ाए; और राजा ने अपने पलंग पर दण्डवत् की। 1 राजा 1:47
  • (45) फिर राजा ने यह भी कहा, कि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य है, जिसने आज मेरे देखते एक को मेरी गद्दी पर विराजमान किया है। 1 राजा 1:48
  • (46) परन्तु राजा सुलैमान धन्य रहेगा,और दाऊद का राज्य यहोवा के साम्हने सदैव दृढ़ रहेगा। 1 राजा 2:45
  • (47) सुलैमान की ये बातें सुनकर, हीराम बहुत आनन्दित हुआ, और कहा, आज यहोवा धन्य है, जिसने दाऊद को उस बड़ी जाति पर राज्य करने के लिये एक बुद्धिमान पुत्र दिया है। 1 राजा 5:7
  • (48) उसने कहा, धन्य है इस्राएल का परमेश्वर यहोवा! जिसने अपने मुंह से मेरे पिता दाऊद को यह वचन दिया था, और अपने हाथ से उसे पूरा किया है, 1 राजा 8:15
  • (49) और खड़ा हो, समस्त इस्राएली सभा को ऊंचे स्वर से यह कहकर आशीर्वाद दिया,

कि धन्य है यहोवा, 1 राजा 8:55

  • (50) और वे राजा को धन्य, धन्य, कहकर उस सब भलाई के कारण जो यहोवा ने अपने दास दाऊद और अपनी प्रजा इस्राएल से की थी, आनन्दित और मगन हो कर अपने अपने डेरे को चले गए। 1 राजा 8:66
  • (51) धन्य हैं तेरे जन! धन्य हैं तेरे ये सेवक!जो नित्य तेरे सम्मुख उपस्थित रहकर तेरी बुद्धि की बातें सुनते हैं। 1 राजा 10:8
  • (52) धन्य है तेरा परमेश्वर यहोवा! जो तुझ से ऐसा प्रसन्न हुआ कि तुझे इस्राएल की राजगद्दी पर विराजमान किया: यहोवा इस्राएल से सदाप्रेम रखता है, इस कारण उसने तुझे न्याय और धर्म करने को राजा बना दिया है। 1 राजा 10:9
  • (53) तब उसने कई लेवियों को इसलिये ठहरा दिया, कि यहोवा के सन्दूक के साम्हने सेवा टहल किया करें, और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की चर्चा और उसका धन्यवाद और स्तुति किया करें।
  • (54) 1 इतिहास 16:4 तब उसी दिन दाऊद ने यहोवा का धन्यवाद करने का काम आसाप और उसके भाइयों को सौंप दिया। 1 इतिहास 16:7
  • (55) यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो। 1 इतिहास 16:8
  • (56) यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करुणा सदा की है। 1 इतिहास 16:34
  • (57) और यह कहो, कि हे हमारे उद्धार करने वाले परमेश्वर हमारा उद्धार कर, और हम को इकट्ठा कर के अन्यजातियों से छुड़ा, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरे विषय बड़ाई करें। 1 इतिहास 16:35
  • (58) अनादिकाल से अनन्तकाल तक इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य है। तब सब प्रजा ने आमीन कहा: और यहोवा की स्तुति की। 1 इतिहास 16:36
  • (59) उनके संग उसने हेमान और यदूतून और दूसरों को भी जो नाम ले कर चुने गए थे ठहरा दिया, कि यहोवा की सदा की करुणा के कारण उसका धन्यवाद करें।1 इतिहास 16:41

1 इतिहास 23:30

  • उसकी करुणा सदा की है, तब यहोवा के भवन मे बादल छा गया, 2 इतिहास 5:13
  • (66) उसने कहा, धन्य है इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिसने अपने मुंह से मेरे पिता दाऊद को यह वचन दिया था, और अपने हाथों से इसे पूरा किया है, 2 इतिहास 6:4
  • (67) जब आग गिरी और यहोवा का तेज भवन पर छा गया, तब सब इस्राएली देखते रहे, और फर्श पर झुक कर अपना अपना मुंह भूमि की ओर किए हुए दण्डवत किया, यों कह कर यहोवा का धन्यवाद किया कि, वह भला है, उसकी करुणा सदा की है। 2 इतिहास 7:3
  • (68) याजक अपना अपना कार्य करने को खड़े रहे, और लेवीय भी यहोवा के गीत के गाने के लिये बाजे लिये हुए खड़े थे, जिन्हें दाऊद राजा ने यहोवा की सदा की करुणा के कारण उसका धन्यवाद करने को बनाकर उनके द्वारा स्तुति कराई थी; और इनके साम्हने याजक लोग तुरहियां बजाते रहे; और सब इस्राएली खड़े रहे। 2 इतिहास 7:6

2 इतिहास 7:3, 2 इतिहास 9:8, 20:21, 26, 29:31, 31:2

  • (69) धन्य हैं तेरे जन, धन्य हैं तेरे ये सेवक, जो नित्य तेरे सम्मुख उपस्थित रहकर तेरी बुद्धि की बातें सुनते हैं। 2 इतिहास 9:7
  • (70) धन्य है तेरा परमेश्वर यहोवा, जो तुझ से ऐसा प्रसन्न हुआ, कि तुझे अपनी राजगद्दी पर इसलिये विराजमान किया कि तू अपने परमेश्वर यहोवा की ओर से राज्य करे; तेरा परमेश्वर जो इस्राएल से प्रेम कर के उन्हें सदा के लिये स्थिर करना चाहता था, उसी कारण उसने तुझे न्याय और धर्म करने को उनका राजा बना दिया। 2 इतिहास 9:8
  • (71) तब उसने प्रजा के साथ सम्मति कर के कितनों को ठहराया, जो कि पवित्रता से शोभायमान हो कर हथियारबन्दों के आगे आगे चलते हुए यहोवा के गीत गाएं, और यह कहते हुए उसकी स्तुति करें, कि यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि उसकी करुणा सदा की है। 2 इतिहास 20:21
  • (72) चौथे दिन वे बराका नाम तराई में इकट्ठे हुए और वहां यहोवा का धन्यवाद किया; इस कारण उस स्थान का नाम बराका की ताराई पड़ा, जो आज तक है। 2 इतिहास 20:26
  • (73) तब हिजकिय्याह कहने लगा, अब तुम ने यहोवा के निमित्त अपना अर्पण किया है; इसलिये समीप आ कर यहोवा के भवन में मेलबलि और धन्यवादबलि पहुंचाओ। तब मण्डली के लोगों ने मेलबलि और धन्यवादबलि पहुंचा दिए, और जितने अपनी इच्छा से देना चाहते थे उन्होंने भी होमबलि पहुंचाए। 2 इतिहास 29:31
  • (74) हिजकिय्याह ने याजकों के दलों को और लेवियों को वरन याजकों, लेवियों दोनों को, प्रति दल के अनुसार और एक एक मनुष्य को उसकी सेवकाई के अनुसार इसलिये ठहरा दिया, कि वे यहोवा की छावनी के द्वारों के भीतर होमबलि, मेलबलि, सेवा टहल, धन्यवाद और स्तुति किया करें। 2 इतिहास 31:2
  • (75) जब हिजकिय्याह और हाकिमों ने आ कर उन ढेरों को देखा, तब यहोवा को और उसकी प्रजा इस्राएल को धन्य धन्य कहा। 2 इतिहास 31:8
  • (76) तब उसने यहोवा की वेदी की मरम्मत की, और उस पर मेलबलि और धन्यवादबलि चढ़ाने लगा, और यहूदियों को इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की उपासना करने की आज्ञा दी। 2 इतिहास 33:16

एज्रा 3:11, 7:27, नहेमायाह 8:6, 9:5, 11:17

  • (77) सो वे यह गा गाकर यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, कि वह भला है, और उसकी करुणा इस्राएल पर सदैव बनी है। जब वे यहोवा की स्तुति करने लगे तब सब लोगों ने यह जान कर कि यहोवा के भवन की नेव अब पड़ रही है, ऊंचे शब्द से जयजयकार किया। एज्रा 3:11
  • (78) धन्य है हमारे पितरों का परमेश्वर यहोवा, जिसने ऐसी मनसा राजा के मन में उत्पन्न की है, कि यहोवा के यरूशलेम के भवन को संवारे, एज्रा 7:27
  • (79) तब एज्रा ने महान परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा; और सब लोगों ने अपने अपने हाथ उठा कर आमेन, आमेन, कहा; और सिर झुका कर अपना अपना माथा भूमि पर टेक कर यहोवा को दण्डवत किया। नहेमायाह 8:6
  • (80) फिर येशू, कदमीएल, बानी, हशब्नयाह, शेरेब्याह, होदिय्याह, शबन्याह, और पतह्याह नाम लेवियों ने कहा, खड़े हो; अपने परमेश्वर यहोवा को अनादिकाल से अनन्तकाल तक धन्य कहो।तेरा महिमायुक्त नाम धन्य कहा जाए, जो सब धन्यवाद और स्तुति से परे है। नहेमायाह 9:5
  • (81) मत्तन्याह जो मीका का पुत्र और जब्दी का पोता, और आसाप का परपोता था; वह प्रार्थना में धन्यवाद करने वालों का मुखिया था, और बकबुक्याह अपने भाइयों में दूसरा पद रखता था; और अब्दा जो शम्मू का पुत्र, और गालाल का पोता, और यदूतून का परपोता था। नहेमायाह 11:17
  • (82) फिर ये लेवीय गए: अर्थात येशू, बिन्नूई, कदमीएल, शेरेब्याह, यहूदा और वह मत्तन्याह जो अपने भाइयों समेत धन्यवाद के काम पर ठहराया गया था। नहेमायाह 12:8
  • (83) लेवियों के मुख्य पुरुष ये थे: अर्थात हसब्याह, शेरेब्याह और कदमीएल का पुत्र येशू; और उनके साम्हने उनके भाई

परमेश्वर के भक्त दाऊद की आज्ञा के अनुसार आम्हने-साम्हने स्तुति और धन्यवाद करने पर नियुक्त थे। नहेमायाह 12:24

  • (84) यरूशलेम की शहरपनाह की प्रतिष्ठा के समय लेवीय अपने सब स्थानों में ढूंढ़े गए, कि यरूशलेम को पहुंचाए जाएं, जिस से आनन्द और धन्यवाद कर के और झांझ, सारंगी और वीणा बजाकर, और गाकर उसकी प्रतिष्ठा करें। नहेमायाह 12:27
  • (85) तब मैं ने यहूदी हाकिमों को शहरपनाह पर चढ़ाकर दो बड़े दल ठहराए,

जो धन्यवाद करते हुए धूमधाम के साथ चलते थे।

  • इनमें से एक दल तो दक्खिन ओर, अर्थात कूड़ाफाटक की ओर शहरपनाह के ऊपर ऊपर से चला; नहेमायाह 12:31
  • (86) धन्यवाद करने और धूमधाम से चलने वालों का दूसरा दल, और उनके पीछे पीछे मैं, और आधे लोग उन से मिलने को शहरपनाह के ऊपर ऊपर से भट्ठों के गुम्मट के पास से चौड़ी शहरपनाह तक। नहेमायाह 12:38
  • (87) तब धन्यवाद करने वालों के दोनों दल और मैं और मेरे साथ आधे हाकिम परमेश्वर के भवन में खड़े हो गए। नहेमायाह 12:40
  • (88) प्राचीनकाल, अर्थात दाऊद और आसाप के दिनों में तो गवैयों के प्रधान थे, परमेश्वर की स्तुति और धन्यवाद के गीत गाए जाते थे। नहेमायाह 12:46
  • (89) मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है। अय्यूब 1:21

(90) देख, क्या ही धन्य वह मनुष्य, जिस को ईश्वर ताड़ना देता है;

  • इसलिये तू सर्वशक्तिमान की ताड़ना को तुच्छ मत जान। अय्यूब 5:17
  • (91) क्योंकि जब कोई मेरा समाचार सुनता, तब वह मुझे धन्य कहता था, और जब कोई मुझे देखता, तब मेरे विषय साक्षी देता था; अय्यूब 29:11
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Harshit Brave

I am a Health Care Advisor, Guide, Teacher, and Trainer. I am also a Life Counselling Coach. I have served in the healthcare field for over three decades. My work has focused on patient care, counselling, teaching, and guiding young professionals. This journey has given me profound insight into health, human behaviour, emotional resilience, and achieving a balanced life. I created Optimal Health to share practical knowledge gained through real experience. My goal is to help you build a healthy body, cultivate a calm mind, develop financial awareness, make informed decisions, and achieve spiritual peace. I believe true health means complete well-being. When your body, mind, purpose, and spirit work together, life becomes meaningful. Through my articles, videos, and guidance, I support you in: • Managing health challenges • Building positive habits • Strengthening mental resilience • Finding life direction • Growing in wisdom and spirituality I walk this path with you, not ahead of you. My role is to guide, teach, and support your journey toward a balanced and fulfilling life. Welcome to Optimal Health.