DIL MERA LE LE PYARE

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DIL MERA LE LE PYARE

यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है। जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है। जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है॥Hindi Christian Worship Song-DIL MERA LE LE PYARE. 

Dil mera le le pyaare yeeshu, toone ise banaaya hai. 

isamen too apana ghar bana le, jisake liye banaaya hai.

(1) Duniya kee sab cheezen nikaal kar, ise paak aur saaph kar, 

gandagee gunaah kee dhokar,  us khoon se jo bahaaya hai. 

dil mera le le…!

(2) Kaee saal main raha tujh se door, laaparavaahee ne kiya door,

 phazal pyaar raham kee, bakhsh sneh kee,  sabr kar toone sikhaaya hai. 

dil mera le le…!

(3) Jab padhata hoon kalaam-e-paak, jo raasta hai shaah-e-raah,

 raah-haq aur jindagee abdee, eemaan-ummeed badhaaya hai. 

dil mera le le…!

(4) Roohe paak ka ho jaaye masakan, roohe paak ke baptismen se, 

har waqt, har jagah doon gavaahee, jaisa usane sikhaaya hai. 

 

भजन संहिता 136:1-10

1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है।

2 जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।

3 जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है॥

4 उसको छोड़कर कोई बड़े बड़े अशचर्यकर्म नहीं करता, उसकी करूणा सदा की है।

5 उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करूणा सदा की है।

6 उसने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है, उसकी करूणा सदा की है।

7 उसने बड़ी बड़ी ज्योतियों बनाईं, उसकी करूणा सदा की है।

8 दिन पर प्रभुता करने के लिये सूर्य को बनाया, उसकी करूणा सदा की है।

9 और रात पर प्रभुता करने के लिये चन्द्रमा और तारागण को बनाया, उसकी करूणा सदा की है।

10 उसने मिस्त्रियों के पहिलौठों को मारा, उसकी करूणा सदा की है॥

भजन संहिता 136:11-18

11 और उनके बीच से इस्राएलियों को निकाला, उसकी करूणा सदा की है।

12 बलवन्त हाथ और बढ़ाई हुई भुजा से निकाल लाया, उसकी करूणा सदा की है।

13 उसने लाल समुद्र को खण्ड खण्ड कर दिया, उसकी करूणा सदा की है।

14 और इस्राएल को उसके बीच से पार कर दिया, उसकी करूणा सदा की है।

15 और फिरौन को सेना समेत लाल समुद्र में डाल दिया, उसकी करूणा सदा की है।

16 वह अपनी प्रजा को जंगल में ले चला, उसकी करूणा सदा की है।

17 उसने बड़े बड़े राजा मारे, उसकी करूणा सदा की है।

18 उसने प्रतापी राजाओं को भी मारा, उसकी करूणा सदा की है।

भजन संहिता 136:19-26

19 एमोरियों के राजा सीहोन को, उसकी करूणा सदा की है।

20 और बाशान के राजा ओग को घात किया, उसकी करूणा सदा की है।

21 और उनके देश को भाग होने के लिये, उसकी करूणा सदा की है।

22 अपने दास इस्राएलियों के भाग होने के लिये दे दिया, उसकी करूणा सदा की है।

23 उसने हमारी दुर्दशा में हमारी सुधि ली, उसकी करूणा सदा की है।

24 और हम को द्रोहियों से छुड़ाया है, उसकी करूणा सदा की है।

25 वह सब प्राणियों को आहार देता है, उसकी करूणा सदा की है।

26 स्वर्ग के परमेश्वर का धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।

Psalms 136:1-10

1 Praise the Lord, for he is good: for his mercy endureth for ever.

2 Praise ye the God of gods: for his mercy endureth forever.

3 Praise ye the Lord of lords: for his mercy endureth forever.

4 Who alone doth great wonders: for his mercy endureth forever.

5 Who made the heavens in understanding: for his mercy endureth forever.

6 Who established the earth above the waters: for his mercy endureth forever.

7 Who made the great lights: for his mercy endureth forever.

8 The sun to rule over the day: for his mercy endureth forever.

9 The moon and the stars to rule the night: for his mercy endureth forever.

10 Who smote Egypt with their firstborn: for his mercy endureth forever.

Psalms 136:11-16

11 Who brought Israel from among them: for his mercy endureth forever.

12 With a mighty hand and a stretched-out arm: for his mercy endureth forever.

13 Who divided the Red Sea into parts: for his mercy endureth forever.

14 And brought out Israel through the midst thereof: for his mercy endureth forever.

15 And overthrew Pharao and his host in the Red Sea: for his mercy endureth forever.

16 Who led his people through the desert: for his mercy endureth forever.

Psalms 136:17-26

17 Who smote great kings: for his mercy endureth forever.

18 And slew strong kings: for his mercy endureth forever.

19 Sehon king of the Amorrhites: for his mercy endureth forever.

20 And Og king of Basan: for his mercy endureth forever.

21 And he gave their land for an inheritance: for his mercy endureth forever.

22 For an inheritance to his servant Israel: for his mercy endureth forever.

23 For he was mindful of us in our affliction: for his mercy endureth forever.

24 And he redeemed us from our enemies: for his mercy endureth forever.

25 Who giveth food to all flesh: for his mercy endureth forever.

26 Give glory to the God of heaven: for his mercy endureth forever. Give glory to the Lord of lords: for his mercy endureth forever.

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