क्या तुम नहीं जानते? “Do You Not Know”? [Hindi]

5) क्या तुम नहीं जानते?; और क्या तुम ने नहीं सुना?

1. क्या तुम नहीं जानते? “Do You Not Know”? [Hindi]

2. क्या तुम नहीं जानते? और क्या तुम ने नहीं सुना?

3. अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा?

4. क्या तुम नहीं जानते?; और क्या तुम ने नहीं सुना?

5. क्या तुम नहीं जानते,

6. क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा। रोमियो 6:7

7. परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है।रोमियो 6:10

8. तो क्या हुआ क्या ?

9. क्या तुम नहीं जानते,

10. जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्र थे। रोमियो 6:20

11. हे भाइयो, क्या तुम नहीं जानते मैं व्यवस्था के जानने वालों से कहता हूं,

12. जो मरे हुओं में से जी उठा: ताकि हम परमेश्वर के लिये फल लाएं। रोमियो 7:4

13. तो हम क्या कहें? क्या व्यवस्था पाप है? कदापि नहीं!

14. और आज्ञा के द्वारा पाप बहुत ही पापमय ठहरे। रोमियो 7:13

15. परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं। रोमियो 7:19

16. मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा? रोमियो 7:24

17. क्या तुम नहीं जानते, कि पवित्र शास्त्र एलियाह की कथा में क्या कहता है;

18. सो परिणाम क्या हुआ यह? कि इस्त्राएली जिस की खोज में हैं, वह उन को नहीं मिला;

19. सो मैं कहता हूं क्या उन्होंने इसलिये ठोकर खाई, कि गिर पड़ें?

20. और जब जड़ पवित्र ठहरी, तो डालियां भी ऐसी ही हैं। रोमियो 11:16

21. फिर तू कहेगा डालियां इसलिये तोड़ी गई, कि मैं साटा जाऊं। रोमियो 11:19

22. और इस रीति से सारा इस्त्राएल उद्धार पाएगा;

23. आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है!

24. प्रभु कि बुद्धि को किस ने जाना या उसका मंत्री कौन हुआ? रोमियो 11:34

25. क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है,

26. क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो,

27. क्या तुम नहीं जानते, कि पवित्र लोग जगत का न्याय करेंगे?

28. क्या तुम नहीं जानते, कि हम स्वर्गदूतों का न्याय करेंगे? तो क्या सांसारिक बातों का निर्णय न करें? 1 कुरिन्थियों 6:

29. क्या तुम नहीं जानते, कि अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे?

30. क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं?

31. क्या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है?

32. क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है;

33. क्या तुम नहीं जानते कि जो पवित्र वस्तुओं की सेवा करते हैं,

34. सो मेरी कौन सी मजदूरी है?

35. क्या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो।

36. 1 कुरिन्थियों 9:24

क्या तुम नहीं जानते? “Do You Not Know”? [Hindi] 

क्या तुम नहीं जानते?; क्या तुम ने नहीं सुना?, और क्या तुम को आरम्भ ही से नहीं बताया गया?  | The Holy Word of God: In 14 Scriptures Says-“Do you not know”? [Hindi]  From the holy Word of God:

क्या तुम नहीं जानते? और क्या तुम ने नहीं सुना?

  •  क्या तुम को आरम्भ ही से नहीं बताया गया? क्या तुम ने पृथ्वी की नेव पड़ने के समय ही से विचार नहीं किया? यशायाह 40:21
  • यह वह है जो पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान है;
  • और पृथ्वी के रहने वाले टिड्डी के तुल्य है; जो आकाश को मलमल की नाईं फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिये तम्बू ताना जाता है; यशायाह 40:2
  • जो बड़े बड़े हाकिमों को तुच्छ कर देता है, और पृथ्वी के अधिकारियों को शून्य के समान कर देता है॥ यशायाह 40:
  • वे रोपे ही जाते, वे बोए ही जाते, उनके ठूंठ भूमि में जड़ ही पकड़ पाते कि वह उन पर पवन बहाता
  • और वे सूख जाते, और आंधी उन्हें भूसे की नाईं उड़ा ले जाती है॥ यशायाह 40:24 From Word of God
  • सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है। यशायाह 40:25

अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा?

  • वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है?
  • वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता॥ यशायाह 40:26
  • हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है,
  • मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? यशायाह 40:27

क्या तुम नहीं जानते?; और क्या तुम ने नहीं सुना?

  • यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है,
  • वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। यशायाह 40:28
  • वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। यशायाह 40:29
  • तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; यशायाह 40:30
  • परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे,
  • वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे॥ यशायाह 40:31

क्या तुम नहीं जानते,

  • कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा ?रोमियो 6:3
  • सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए,
  • ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया,
  • वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। रोमियो 6:4
  • क्योंकि यदि हम उस की मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं,
  • तो निश्चय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएंगे।रोमियो 6:5
  •  हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया,
  • ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें। रोमियो 6:6

क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा। रोमियो 6:7

  • सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी। रोमियो 6:8
  • क्योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठकर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की।रोमियो 6:9
  • क्योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया;

परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है।रोमियो 6:10

  • ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा,
  • परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।रोमियो 6:11
  • इसलिये पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे,
  • कि तुम उस की लालसाओं के आधीन रहो। रोमियो 6:12
  • और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो,
  • पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो,
  • और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो। रोमियो 6:13
  • तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो॥ रोमियो 6:14

तो क्या हुआ क्या ?

  • हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं? कदापि नहीं। रोमियो-6:1

क्या तुम नहीं जानते,

  • कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो:
  • और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्त धामिर्कता है ।रोमियो 6:16
  • परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे।रोमियो 6:17
  • और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए। रोमियो 6:18
  • मैं तुम्हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं,
  • जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था,
  • वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो। रोमियो 6:19

जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्र थे। रोमियो 6:20

  • सो जिन बातों से अब तुम लज्ज़ित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे? रोमियो 6:21
  • क्योंकि उन का अन्त तो मृत्यु है परन्तु अब पाप से स्वतंत्र होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्त होती है,
  • और उसका अन्त अनन्त जीवन है।रोमियो 6:22
  • क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है॥ रोमियो 6:23

 हे भाइयो, क्या तुम नहीं जानते मैं व्यवस्था के जानने वालों से कहता हूं,

  • कि जब तक मनुष्य जीवित रहता है, तक तक उस पर व्यवस्था की प्रभुता रहती है? रोमियो 7:1
  • क्योंकि विवाहिता स्त्री व्यवस्था के अनुसार अपने पति के जीते जी उस से बन्धी है, परन्तु यदि पति मर जाए, तो वह पति की व्यवस्था से छूट गई। रोमियो 7:2
  • सो यदि पति के जीते जी वह किसी दूसरे पुरूष की हो जाए, तो व्यभिचारिणी कहलाएगी, परन्तु यदि पति मर जाए, तो वह उस व्यवस्था से छूट गई,
  • यहां तक कि यदि किसी दूसरे पुरूष की हो जाए, तौभी व्यभिचारिणी न ठहरेगी। रोमियो 7:3
  • सो हे मेरे भाइयो, तुम भी मसीह की देह के द्वारा व्यवस्था के लिये मरे हुए बन गए, कि उस दूसरे के हो जाओ,

जो मरे हुओं में से जी उठा: ताकि हम परमेश्वर के लिये फल लाएं। रोमियो 7:4

  • क्योंकि जब हम शारीरिक थे, तो पापों की अभिलाषायें जो व्यवस्था के द्वारा थीं, मृत्यु का फल उत्पन्न करने के लिये हमारे अंगों में काम करती थीं। रोमियो 7:5
  • परन्तु जिस के बन्धन में हम थे उसके लिये मर कर, अब व्यवस्था से ऐसे छूट गए,
  • कि लेख की पुरानी रीति पर नहीं, वरन आत्मा की नई रीति पर सेवा करते हैं॥ रोमियो 7:6

तो हम क्या कहें? क्या व्यवस्था पाप है? कदापि नहीं!

  • वरन बिना व्यवस्था के मैं पाप को नहीं पहिचानता: व्यवस्था यदि न कहती, कि लालच मत कर तो मैं लालच को न जानता। रोमियो 7:7
  • परन्तु पाप ने अवसर पाकर आज्ञा के द्वारा मुझ में सब प्रकार का लालच उत्पन्न किया, क्योंकि बिना व्यवस्था पाप मुर्दा है। रोमियो 7:8
  • मैं तो व्यवस्था बिना पहिले जीवित था, परन्तु जब आज्ञा आई, तो पाप जी गया, और मैं मर गया। रोमियो 7:9
  • और वही आज्ञा जो जीवन के लिये थी; मेरे लिये मृत्यु का कारण ठहरी। रोमियो 7:10
  • क्योंकि पाप ने अवसर पाकर आज्ञा के द्वारा मुझे बहकाया, और उसी के द्वारा मुझे मार भी डाला। रोमियो 7:11
  • इसलिये व्यवस्था पवित्र है, और आज्ञा भी ठीक और अच्छी है। रोमियो 7:12
  • तो क्या वह जो अच्छी थी, मेरे लिये मृत्यु ठहरी? कदापि नहीं!
  • परन्तु पाप उस अच्छी वस्तु के द्वारा मेरे लिये मृत्यु का उत्पन्न करने वाला हुआ कि उसका पाप होना प्रगट हो,

और आज्ञा के द्वारा पाप बहुत ही पापमय ठहरे। रोमियो 7:13

  • क्योंकि हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है, परन्तु मैं शारीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं। रोमियो 7:14
  • और जो मैं करता हूं, उस को नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूं, वह नहीं किया करता, परन्तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूं। रोमियो 7:15
  • और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूं, तो मैं मान लेता हूं, कि व्यवस्था भली है। रोमियो 7:16
  • तो ऐसी दशा में उसका करने वाला मैं नहीं, वरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है। रोमियो 7:17
  • क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते। रोमियो 7:18
  • क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता,

परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं। रोमियो 7:19

  • परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करने वाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है। रोमियो 7:20
  • सो मैं यह व्यवस्था पाता हूं, कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है। रोमियो 7:21
  • क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं। रोमियो 7:2
  • परन्तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है,
  • और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है। रोमियो 7:23

मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा? रोमियो 7:24

  • मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं:
  • निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूं॥ रोमियो 7:25
  • इसलिये मैं कहता हूं, क्या परमेश्वर ने अपनी प्रजा को त्याग दिया?
  • कदापि नहीं; मैं भी तो इस्त्राएली हूं: इब्राहीम के वंश और बिन्यामीन के गोत्र में से हूं। रोमियो 11:
  • परमेश्वर ने अपनी उस प्रजा को नहीं त्यागा, जिसे उस ने पहिले ही से जाना:

क्या तुम नहीं जानते, कि पवित्र शास्त्र एलियाह की कथा में क्या कहता है;

  • कि वह इस्त्राएल के विरोध में परमेश्वर से बिनती करता है? रोमियो 11:2
  • कि हे प्रभु, उन्होंने तेरे भविष्यद्वक्ताओं को घात किया, और तेरी वेदियों को ढ़ा दिया है;
  • और मैं ही अकेला बच रहा हूं, और वे मेरे प्राण के भी खोजी हैं।रोमियो 11:3
  • परन्तु परमेश्वर से उसे क्या उत्तर मिला?
  • कि मैं ने अपने लिये सात हजार पुरूषों को रख छोड़ा है जिन्हों ने बाल के आग घुटने नहीं टेके हैं। रोमियो 11:4
  • सो इसी रीति से इस समय भी, अनुग्रह से चुने हुए कितने लोग बाकी हैं रोमियो 11:5
  • यदि यह अनुग्रह से हुआ है, तो फिर कर्मों से नहीं, नहीं तो अनुग्रह फिर अनुग्रह नहीं रहा। रोमियो 11:6

सो परिणाम क्या हुआ यह? कि इस्त्राएली जिस की खोज में हैं, वह उन को नहीं मिला;

  • परन्तु चुने हुओं को मिला और शेष लोग कठोर किए गए हैं। रोमियो 11:7
  • जैसा लिखा है, कि परमेश्वर ने उन्हें आज के दिन तक भारी नींद में डाल रखा है और ऐसी आंखें दी जो न देखें और ऐसे कान जो न सुने रोमियो 11:8 
  • और दाउद कहता है; उन का भोजन उन के लिये जाल, और फन्दा, और ठोकर, और दण्ड का कारण हो जाए। रोमियो 11:9
  • उन की आंखों पर अन्धेरा छा जाए ताकि न देखें, और तू सदा उन की पीठ को झुकाए रख। रोमियो 11:10

सो मैं कहता हूं क्या उन्होंने इसलिये ठोकर खाई, कि गिर पड़ें?

  • कदापि नहीं: परन्तु उन के गिरने के कारण अन्यजातियों को उद्धार मिला, कि उन्हें जलन हो।  रोमियो 11:11
  • सो यदि उन का गिरना जगत के लिये धन और उन की घटी अन्यजातियों के लिये सम्पत्ति का कारण हुआ, तो उन की भरपूरी से कितना न होगा॥ रोमियो 11:12
  • मैं तुम अन्यजातियों से यह बातें कहता हूं: जब कि मैं अन्याजातियों के लिये प्रेरित हूं, तो मैं अपनी सेवा की बड़ाई करता हूं। रोमियो 11:13
  • ताकि किसी रीति से मैं अपने कुटुम्बियों से जलन करवा कर उन में से कई एक का उद्धार कराऊं। रोमियो 11:14
  • क्योंकि जब कि उन का त्याग दिया जाना जगत के मिलाप का कारण हुआ,
  • तो क्या उन का ग्रहण किया जाना मरे हुओं में से जी उठने के बराबर न होगा? रोमियो 11:15
  • जब भेंट का पहिला पेड़ा पवित्र ठहरा, तो पूरा गुंधा हुआ आटा भी पवित्र है:

और जब जड़ पवित्र ठहरी, तो डालियां भी ऐसी ही हैं। रोमियो 11:16

  • और यदि कई एक डाली तोड़ दी गई, और तू जंगली जलपाई होकर उन में साटा गया, और जलपाई की जड़ की चिकनाई का भागी हुआ है। रोमियो 11:17
  • तो डालियों पर घमण्ड न करना: और यदि तू घमण्ड करे, तो जान रख, कि तू जड़ को नहीं, परन्तु जड़ तुझे सम्भालती है। रोमियो 11:18

फिर तू कहेगा डालियां इसलिये तोड़ी गई, कि मैं साटा जाऊं। रोमियो 11:19

  • भला, वे तो अविश्वास के कारण तोड़ी गई, परन्तु तू विश्वास से बना रहता है इसलिये अभिमानी न हो, परन्तु भय कर। रोमियो 11:20
  • क्योंकि जब परमेश्वर ने स्वाभाविक डालियां न छोड़ीं, तो तुझे भी न छोड़ेगा। रोमियो 11:21
  • इसलिये परमेश्वर की कृपा और कड़ाई को देख!
  • जो गिर गए, उन पर कड़ाई, परन्तु तुझ पर कृपा, यदि तू उस में बना रहे, नहीं तो, तू भी काट डाला जाएगा। रोमियो 11:22
  • और वे भी यदि अविश्वास में न रहें, तो साटे जाएंगे क्योंकि परमेश्वर उन्हें फिर साट सकता है। रोमियो 11:23
  • क्योंकि यदि तू उस जलपाई से, जो स्वभाव से जंगली है काटा गया,
  • और स्वभाव के विरूद्ध अच्छी जलपाई में साटा गया तो ये जो स्वाभाविक डालियां हैं,
  • अपने ही जलपाई में साटे क्यों न जाएंगे। रोमियो 11:24
  • हे भाइयों, कहीं ऐसा न हो, कि तुम अपने आप को बुद्धिमान समझ लो;
  • इसलिये मैं नहीं चाहता कि तुम इस भेद से अनजान रहो, कि जब तक अन्यजातियां पूरी रीति से प्रवेश न कर लें,
  • तब तक इस्त्राएल का एक भाग ऐसा ही कठोर रहेगा। रोमियो 11:25

और इस रीति से सारा इस्त्राएल उद्धार पाएगा;

  • जैसा लिखा है, कि छुड़ाने वाला सियोन से आएगा, और अभक्ति को याकूब से दूर करेगा। रोमियो 11:26
  • और उन के साथ मेरी यही वाचा होगी, जब कि मैं उन के पापों को दूर कर दूंगा। रोमियो 11:27
  • वे सुसमाचार के भाव से तो तुम्हारे बैरी हैं, परन्तु चुन लिये जाने के भाव से बाप दादों के प्यारे हैं। रोमियो 11:28
  • क्योंकि परमेश्वर अपने वरदानों से, और बुलाहट से कभी पीछे नहीं हटता। रोमियो 11:29
  • क्योंकि जैसे तुम ने पहिले परमेश्वर की आज्ञा न मानी परन्तु अभी उन के आज्ञा न मानने से तुम पर दया हुई। रोमियो 11:30
  • वैसे ही उन्होंने भी अब आज्ञा न मानी कि तुम पर जो दया होती है इस से उन पर भी दया हो। रोमियो 11:31
  • क्योंकि परमेश्वर ने सब को आज्ञा न मानने के कारण बन्द कर रखा ताकि वह सब पर दया करे॥ रोमियो 11:32

आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है!

उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं! रोमियो 11:33

प्रभु कि बुद्धि को किस ने जाना या उसका मंत्री कौन हुआ? रोमियो 11:34

  • या किस ने पहिले उसे कुछ दिया है जिस का बदला उसे दिया जाए। रोमियो 11:35
  • क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन॥ रोमियो 11:36
  •  हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। 1 कुरिन्थियों 3:9
  • परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नेव डाली,
  • और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है। 1 कुरिन्थियों 3:10

क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है,

  • और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता। 1 कुरिन्थियों 3:11
  • और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है। 1 कुरिन्थियों 3:12
  • तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा:
  • और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है। 1 कुरिन्थियों 3:13
  • जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा। 1 कुरिन्थियों 3:14
  • और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्तु जलते जलते॥
  • 1 कुरिन्थियों 3:15

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो,

  • और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? 1 कुरिन्थियों 3:16
  • यदि कोई परमेश्वर के मन्दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा;
  • क्योंकि परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है, और वह तुम हो। 1 कुरिन्थियों 3:
  • कोई अपने आप को धोखा न दे: यदि तुम में से कोई इस संसार में अपने आप को ज्ञानी समझे, तो मूर्ख बने; कि ज्ञानी हो जाए। 1 कुरिन्थियों 3:18
  • क्योंकि इस संसार का ज्ञान परमेश्वर के निकट मूर्खता है,
  • जैसा लिखा है; कि वह ज्ञानियों को उन की चतुराई में फंसा देता है। 1 कुरिन्थियों 3:19
  • और फिर प्रभु ज्ञानियों की चिन्ताओं को जानता है, कि व्यर्थ हैं। 1 कुरिन्थियों 3:20
  • इसलिये मनुष्यों पर कोई घमण्ड न करे, क्योंकि सब कुछ तुम्हारा है। 1 कुरिन्थियों 3:
  • और तुम मसीह के हो, और मसीह परमेश्वर का है॥ 1 कुरिन्थियों 3

क्या तुम नहीं जानते, कि पवित्र लोग जगत का न्याय करेंगे?

  • सो जब तुम्हें जगत का न्याय करना हे, तो क्या तुम छोटे से छोटे झगड़ों का भी निर्णय करने के योग्य नहीं?1 कुरिन्थियों

क्या तुम नहीं जानते, कि हम स्वर्गदूतों का न्याय करेंगे? तो क्या सांसारिक बातों का निर्णय न करें? 1 कुरिन्थियों 6:

 क्या तुम नहीं जानते, कि अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे?

  • धोखा न खाओ, न वेश्यागामी, न मूर्तिपूजक, न परस्त्रीगामी, न लुच्चे, न पुरूषगामी। 1 कुरिन्थियों 6:9

 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं?

  • सो क्या मैं मसीह के अंग लेकर उन्हें वेश्या के अंग बनाऊं? कदापि नहीं। 1 कुरिन्थियों 6:15

 क्या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है?

  • क्योंकि वह कहता है, कि वे दोनों एक तन होंगे। 1 कुरिन्थियों 6:16
  • और जो प्रभु की संगति में रहता है, वह उसके साथ एक आत्मा हो जाता है।
  • 1 कुरिन्थियों 6:17
  • व्यभिचार से बचे रहो: जितने और पाप मनुष्य करता है, वे देह के बाहर हैं,
  • परन्तु व्यभिचार करने वाला अपनी ही देह के विरूद्ध पाप करता है।1 कुरिन्थियों 6:18

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है;

  • जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? 1 कुरिन्थियों 6:19
  • क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो॥ 1 कुरिन्थियों 6:20
  • इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं,
  • परन्तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है। 1 कुरिन्थियों 9:26
  • हां, हमारे लिये ही लिखा गया, क्योंकि उचित है, कि जोतने वाला आशा से जोते, और दावने वाला भागी होने की आशा से दावनी करे। 1 कुरिन्थियों 9
  • सो जब कि हम ने तुम्हारे लिये आत्मिक वस्तुएं बोई, तो क्या यह कोई बड़ी बात है, कि तुम्हारी शारीरिक वस्तुओं की फसल काटें। 1 कुरिन्थियों 9:11
  • जब औरों का तुम पर यह अधिकार है, तो क्या हमारा इस से अधिक न होगा?
  • परन्तु हम यह अधिकार काम में नहीं लाए; परन्तु सब कुछ सहते हैं, कि हमारे द्वारा मसीह के सुसमाचार की कुछ रोक न हो। 1 कुरिन्थियों 9:12

क्या तुम नहीं जानते कि जो पवित्र वस्तुओं की सेवा करते हैं,

  • वे मन्दिर में से खाते हैं; और जो वेदी की सेवा करते हैं; वे वेदी के साथ भागी होते हैं?1 कुरिन्थियों 9:13
  • इसी रीति से प्रभु ने भी ठहराया, कि जो लोग सुसमाचार सुनाते हैं, उन की जीविका सुसमाचार से हो। 1 कुरिन्थियों 9:14
  • परन्तु मैं इन में से कोई भी बात काम में न लाया, और मैं ने तो ये बातें इसलिये नहीं लिखीं, कि मेरे लिये ऐसा किया जाए,
  • क्योंकि इस से तो मेरा मरना ही भला है; कि कोई मेरा घमण्ड व्यर्थ ठहराए। 1 कुरिन्थियों 9:15
  • और यदि मैं सुसमाचार सुनाऊं, तो मेरा कुछ घमण्ड नहीं; क्योंकि यह तो मेरे लिये अवश्य है;
  • और यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊं, तो मुझ पर हाय। 1 कुरिन्थियों 9:16
  • क्योंकि यदि अपनी इच्छा से यह करता हूं, तो मजदूरी मुझे मिलती है,
  • और यदि अपनी इच्छा से नहीं करता, तौभी भण्डारीपन मुझे सौंपा गया है। 1 कुरिन्थियों 9:17

सो मेरी कौन सी मजदूरी है?

  • यह कि सुसमाचार सुनाने में मैं मसीह का सुसमाचार सेंत मेंत कर दूं;
  • यहां तक कि सुसमाचार में जो मेरा अधिकार है, उस को मैं पूरी रीति से काम में लाऊं।1 कुरिन्थियों 9:18
  • क्योंकि सब से स्वतंत्र होने पर भी मैं ने अपने आप को सब का दास बना दिया है; कि अधिक लोगों को खींच लाऊं। 1 कुरिन्थियों 9:19
  • मैं यहूदियों के लिये यहूदी बना कि यहूदियों को खींच लाऊं,
  • जो लोग व्यवस्था के आधीन हैं उन के लिये मैं व्यवस्था के आधीन न होने पर भी व्यवस्था के आधीन बना,
  • कि उन्हें जो व्यवस्था के आधीन हैं, खींच लाऊं। 1 कुरिन्थियों 9:20
  • व्यवस्थाहीनों के लिये मैं (जो परमेश्वर की व्यवस्था से हीन नहीं, परन्तु मसीह की व्यवस्था के आधीन हूं) व्यवस्थाहीन सा बना, कि व्यवस्थाहीनों को खींच लाऊं। 1 कुरिन्थियों 9:21
  • मैं निर्बलों के लिये निर्बल सा बना, कि निर्बलों को खींच लाऊं,
  • मैं सब मनुष्यों के लिये सब कुछ बना हूं, कि किसी न किसी रीति से कई एक का उद्धार कराऊं। 1 कुरिन्थियों 9:22
  • और मैं सब कुछ सुसमाचार के लिये करता हूं, कि औरों के साथ उसका भागी हो जाऊं। 1 कुरिन्थियों 9:

क्या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो।

1 कुरिन्थियों 9:24

  • हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझाने वाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं,
  • परन्तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं।
  • 1 कुरिन्थियों 9:25
  • इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं,
  • परन्तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है।1 कुरिन्थियों 9:26

50 TRUTH ABOUT THE LORD JESUS CHRIST.

“KNOW 35 AMAZING SCRIPTURES THAT DEFINE YOUR WORTH”.

BIBLICAL PROVERBS: THE WAY OF WISDOM. WISDOM IS BETTER THAN ALL THE MOST PRECIOUS THINGS.

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Bible Society of India

क्या तुम नहीं जानते? "Do You Not Know"? [Hindi] 
क्या तुम नहीं जानते? "Do You Not Know"? [Hindi] 

क्या तुम नहीं जानते? “Do You Not Know”? [Hindi] 

Harshit Brave

I am a Health Care Advisor, Guide, Teacher, and Trainer. I am also a Life Counselling Coach. I have served in the healthcare field for over three decades. My work has focused on patient care, counselling, teaching, and guiding young professionals. This journey has given me profound insight into health, human behaviour, emotional resilience, and achieving a balanced life. I created Optimal Health to share practical knowledge gained through real experience. My goal is to help you build a healthy body, cultivate a calm mind, develop financial awareness, make informed decisions, and achieve spiritual peace. I believe true health means complete well-being. When your body, mind, purpose, and spirit work together, life becomes meaningful. Through my articles, videos, and guidance, I support you in: • Managing health challenges • Building positive habits • Strengthening mental resilience • Finding life direction • Growing in wisdom and spirituality I walk this path with you, not ahead of you. My role is to guide, teach, and support your journey toward a balanced and fulfilling life. Welcome to Optimal Health.