नकारात्मक प्रभाव से कैसे बचें? How to Avoid Negative Impact?

नकारात्मक प्रभाव से कैसे बचें? How to Avoid Negative Impact? मनुष्य “भावनात्मक लगाव” के प्रति बेहद ग्रहणशील होते हैं, जिसका अर्थ है कि हमारे इर्द-गिर्द उपस्थित लोगों की भावनाएं हमारी अपनी भावनाओं को प्रभावित करती हैं। खराब व्यावहार और नकारात्मकता से दूर रहें ताकि वह आपको खरोंच भी न लगा सके।

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नकारात्मक प्रभाव से कैसे बचें? How to Avoid Negative Impact?

1. नकारात्मक प्रभावों से बचें:

  • अपने मित्रों का चुनाव बुद्धिमानी से करें।
  • जिन मित्रों के बीच में हम रहते हैं वे हमारे दृष्टिकोण पर अत्यधिक प्रभाव,अच्छा और बुरा दोनों ही, डाल सकते हैं ।
  • यदि आपके मित्र हमेशा नकारात्मक रहते हैं तो आप अपनी स्वयं की सकारात्मकता को उनसे बांटने का विचार करें।
  • सकारात्मक बनना सीखने के लिए भी आप उन्हें प्रोत्साहित करें।
  • यदि इसके बाद भी वे नकारात्मक बने रहने पर अड़े रहते हैं तो, अपने स्वयं के हित में, आप अपने को उनसे दूर कर लें।
  • केवल वही करें जिसको करना आपको सुविधाजनक लगे। यदि किसी कार्य को करना आपको असुविधाजनक लगे तो इस बात की पूरी संभावना है, कि आप उस कार्य को करते समय बुरा, दोषी या चिंतित महसूस करें।
  • इससे किसी सकारात्मक अनुभव की भरपाई नहीं होती है।
  • जिस कार्य को आप नहीं करना चाहते हैं उसे करने से “मना करना” सीखने से आपको शक्तिशाली अनुभव महसूस करने में, और स्वयं के साथ सहज महसूस करने में सहायता मिलती है, मित्रों और प्रियजनों के साथ तथा कार्यस्थल की परिस्थितियों में यही सत्य होता है।
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नकारात्मक प्रभाव से कैसे बचें? How to Avoid Negative Impact?

2. नकारात्मक विचारों को चुनौती दें:

  • “स्वचालित” या आदतन नकारात्मक सोच के पैटर्न में बह जाना बेहद आसान होता है, विशेषकर यदि वह स्वयं के बारे में हो तो।
  • अपना सबसे खराब आलोचक आप स्वयं बन सकते हैं।
  • हर बार जब आपका सामना किसी नकारात्मक विचार से हो तो समय निकाल कर आप उसे चुनौती दें।
  • उसे सकारात्मक विचारों में बदलने का प्रयास करें या फिर नकारात्मक विचारों में कोई तर्क-सम्मत खामी ढूंढें।
  • यदि आप इसे लंबे समय तक करें तो यह आपकी आदत में शामिल हो जाएगा,
  • जो आपकी सकारात्मक सोच के कौशल में बहुत बड़ा बदलाव लाएगा।
  • “मैं नहीं कर सकता हूँ” की तुलना में “मैं कर सकता हूँ” को ज्यादा बार कहें।
  • याद रखें, हर चीज को सकारात्मक रूप दिया जा सकता है इसलिए, बिना थके उसके लिए प्रयास करते ही रहें।
  • उदाहरण के लिए, यदि आप क्रोधवश अपने किसी मित्र पर चिल्ला बैठते हैं, तो आपका अन्तर्मन शायद यही कहेगा, “मैं एक भयानक व्यक्ति हूँ।“

यह एक संज्ञानात्मक विकृति है:

  • यह एक विशिष्ट घटना के बारे में एक सामान्य कथन है।
  • यह आपके अंदर दोषी होने का भाव उत्पन्न करेगा और आप उससे कुछ भी सीख नहीं पाएंगे।
  • बेहतर होगा कि आप अपने कार्यों की ज़िम्मेदारी को स्वीकार करें और विचार करें कि प्रतिक्रिया-स्वरूप आपको क्या करना है।
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उदाहरण के लिए

  • “मैं अपने मित्र पर चिल्लाया, जिससे शायद उसकी भावनायेँ आहत हुईं, शायद मैं गलत था। मैं उससे क्षमा माँगूँगा और अगली बार जब हम किसी गंभीर विषय पर वार्ता कर रहे होंगे तो मैं एक ब्रेक लेने के लिए कहूँगा।”
  • इस तरह से सोचने से आप अपने को सामान्यतया एक भयानक व्यक्ति नहीं कह पाएंगे, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखेंगे जिसने एक भूल की, उससे सीखा और उससे आगे बढ़ गया।
  • यदि आप पाएँ कि आपके अंदर अपने बारे में या अन्य किसीके बारे में बार-बार नकारात्मक विचार उत्पन्न हो रहे हैं, तो ऐसी तीन सकारात्मक चीजों को ढूंढें जिसे आप अपने बारे में या अन्य व्यक्ति के बारे में कह सकते हैं।
  • उदाहरण के लिए, यदि विचार ऐसा दर्शाएँ कि आप “बेवकूफ” हैं, तो उस विचार को तीन सकारात्मक बातों से चुनौती दें: “मेरे अंदर ये विचार हैं कि मैं बेवकूफ हूँ। परंतु, पिछले सप्ताह ही मैंने उस बड़े प्रोजेक्ट को प्रशंसनीय रीव्युज के लिए सम्पन्न किया है।

मैं एक सक्षम व्यक्ति हूँ

  • भूतकाल में, मैंने कठिन समस्याओं को हल किया है। मैं एक सक्षम व्यक्ति हूँ परंतु इस समय मैं एक कठिन दौर से गुजर रहा हूँ।”
  • यहाँ तक कि जब हम अपनी इच्छित चीज नहीं पाते हैं तो भी हम बहुमूल्य अनुभव प्राप्त करते हैं। अक्सर भौतिक चीजों की तुलना में अनुभव ज्यादा मूल्यवान होते हैं।
  • भौतिक चीजों का धीरे-धीरे ह्रास हो जाता है, जबकि अनुभव जीवन भर स्थायी रूप से हमारे साथ रहते हैं और उनमें सतत बृद्धि होती रहती है।
  • अधिकांश परिस्थितियों के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही पहलू होते हैं। हमें  जिस पर फोकस करना है उसी को चुनना होता है।
  • जब भी हम नकारात्मक हो रहे होते हैं तो हम अपने को रोकने का प्रयास कर सकते हैं, और विपरीत दिशा में सोचने का प्रयास कर सकते हैं।
  • नकारात्मक चीजों को लेकर चिंता करने से कोई लाभ नहीं होता है खासकर यदि उन्हें परिवर्तित न किया जा सके।
  • जीवन के कुछ हिस्से “अन्यायपूर्ण” होते हैं। ऐसा इसलिए कि जीवन सिर्फ होता “है।” यदि हम उन चीजों पर अपनी ऊर्जा और खुशियाँ बर्बाद करते हैं, जिन्हें हम बदल नहीं सकते हैं तो हम महज अपने को और अधिक निराश करते हैं।
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नकारात्मक प्रभाव से कैसे बचें? How to Avoid Negative Impact?

3. भूतकाल के ट्रामाज़ (traumas) से निबटें:

  • यदि आप लगातार अपने को दुखी, अप-सेट, या नकारात्मक पाएँ, तो उसके कुछ संभावित कारण हो सकते हैं जिन्हें हल करना आवश्यक होगा।
  • ट्रामाज़ जैसे की, भूतकाल के दुर्व्यवहार, तनाव, प्राकृतिक आपदा,शोक और हानि आदि से निबटने के लिए पेशेवर लोगों की मदद लें।
  • किसी लाइसेंसधारक मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक को ढूंढें खासकर यदि कोई ऐसा मिल जाये जो ट्रामाज़ के उपचार का विशेषज्ञ हो।
  • अपने ट्रामाज़ का उपचार किसी परामर्शदाता या चिकित्सक के जरिये करवाना दुखद भी हो सकता है, परंतु अंत में आप ज्यादा मजबूत और सकारात्मक होकर उभरेंगे।

4. विफलताओं से न डरें:

  • फ्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट (Franklin D. Roosevelt) की संक्षिप्त व्याख्या के अनुसार जिस एक चीज का हमे डर होना चाहिए वह स्वयं “डर” ही है।
  • हम गिरेंगे और गलतियाँ करेंगे। जो चीज मायने रखती है वो यह है कि हम वापस खड़े कैसे होते हैं।
  • यदि हम सफल होने की उम्मीद रखते हैं, और हमें विफलताओं का भय नहीं है तो इसका अर्थ है कि हमारे लिए सदैव सकारात्मक बने रहने का सर्वोत्तम अवसर है।
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सलाह

  1. जब आपको लगे कि आप टूटने वाले हैं तो एक गहरी सांस लें, 10 तक गिनें, पानी पियेँ और मुस्कुराएं। भले ही आप जबरन मुस्कुरा रहे हों लेकिन होगा तो वो मुस्कुराहट ही और उससे आपको निश्चित ही बेहतर महसूस होगा।
  2. अच्छी चीजों पर फोकस करें। प्रत्येक सुबह शीशे में खुद को देखें और उन पाँच अच्छे गुणों के बारे में सोचें जो आप में हैं।
  3. निराश होकर न बैठें। सतत प्रयासों से अच्छी आदतें, बुरी आदतों को प्रतिस्थापित कर सकती हैं।
  4. सकारात्मक सोच को उद्देश्यपूर्ण कारणों से विकसित करें, अपने जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए और दूसरों के भी।
  5. याद रखें कि अपने विचारों को हम नियंत्रित कर सकते हैं। यदि हम नकारात्मक रूप से सोच रहे हैं तो हम किसी सकारात्मक चीज के बारे में सोच कर, उसे किसी भी समय परिवर्तित कर सकते हैं।
  6. अपने परिवार और मित्रों से मिले कार्ड्स और पत्रों को एक फाइल में रखें।
  7. जब भी आप निराश महसूस करें तो उस फाइल को बाहर निकालें और स्वयं को स्मरण कराएं कि लोगों के लिए आप महत्वपूर्ण हैं। ये लोग आपको प्रेम करते हैं और आपका ध्यान रखते हैं।

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Harshit Brave

I am a Health Care Advisor, Guide, Teacher, and Trainer. I am also a Life Counselling Coach. I have served in the healthcare field for over three decades. My work has focused on patient care, counselling, teaching, and guiding young professionals. This journey has given me profound insight into health, human behaviour, emotional resilience, and achieving a balanced life. I created Optimal Health to share practical knowledge gained through real experience. My goal is to help you build a healthy body, cultivate a calm mind, develop financial awareness, make informed decisions, and achieve spiritual peace. I believe true health means complete well-being. When your body, mind, purpose, and spirit work together, life becomes meaningful. Through my articles, videos, and guidance, I support you in: • Managing health challenges • Building positive habits • Strengthening mental resilience • Finding life direction • Growing in wisdom and spirituality I walk this path with you, not ahead of you. My role is to guide, teach, and support your journey toward a balanced and fulfilling life. Welcome to Optimal Health.