बुद्धिमान कौन है?

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बुद्धिमान कौन है?

बुद्धिमान कौन है? कुछ विशेष बातें जो बुध्दिमान व्यक्ति जरूर अपनाते हैं, अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं, तो बुध्दिमान बन जाईये – मूर्खतापूर्ण कार्यों को त्याग दीजिये। बाइबल के अनुसार- बुद्धिमान कौन है?  वह जो व्यवस्थित और समझदार होता है, वो समय का सदुपयोग करना जानता हैं, जो काम जब जब आवश्यक है, तब तब करता है। बातें जो बुध्दिमान व्यक्ति अपने जीवन में जरूर अपनाते हैं; आप भी बुद्धिमान बन जाएं इन बातों को अपना कर। कभी भी भाग्य के भरोसे ना बैठें औऱ ईश्वर को कोसना बंद कर दीजिए। ईश्वर की करुणा का गलत फायदा नहीं उठाते, बल्कि विश्वास के साथ साथ कर्म करते हैं। अगर आप केवल भाग्य या ईश्वर भरोसे बैठे हैं तो ये पता लगाइये, कि ईश्वर आपके भरोसे कौन से काम करवाना चाहते हैं।

बाइबिल में लिखा है:-

  • ये सच है, कि बाइबिल में लिखा है “क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएं मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानी की नहीं, वरन कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूंगा”। यिर्मयाह 29:11

बाइबल के अनुसार-बुद्धिमान कौन है?

  • सुलेमान कहते हैं- “सुन, जो भली बात मैं ने देखी है, वरन जो उचित है, वह यह कि मनुष्य खाए और पीए और अपने परिश्रम से जो वह धरती पर करता है, अपनी सारी आयु भर जो परमेश्वर ने उसे दी है, सुखी रहे: क्योंकि उसका भाग यही है।
    सभोपदेशक 5:18

 इस लिए भाग्य और ईश्वर के कार्यों को अपने काम ना करने की बहाना ना बनाएं, अपने हिस्से का काम कीजिये, ईश्वर आपको उसका प्रतिफल देंगे।

लक्ष्य बनाओ:  डायरी में लिखो और उनको सफ़ल करने के लिए योजनाएं बनाओ। योजनाओं के अनुसार काम करो।

  1. जहां दर्शन की बात नहीं होती, वहां लोग निरंकुश हो जाते हैं, और जो व्यवस्था को मानता है वह धन्य होता है। नीतिवचन 29:18
  2. बाइबिल कहती है “बिना सम्मति की कल्पनाएं निष्फल हुआ करती हैं, परन्तु बहुत से मंत्रियों की सम्मत्ति से बात ठहरती है”। नीतिवचन 15:22
  3. यहोवा ने मुझ से कहा, दर्शन की बातें लिख दे; वरन पटियाओं पर साफ साफ लिख दे कि दौड़ते हुए भी वे सहज से पढ़ी जाएं। हबक्कूक 2:2
  4. दर्शन की बात नियत समय में पूरी होने वाली है, वरन इसके पूरे होने का समय वेग से आता है; इस में धोखा न होगा। चाहे इस में विलम्ब भी हो, तौभी उसकी बाट जोहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उस में देर न होगी। हबक्कूक 2:3
  5. बिना लक्ष्य के दिशा हीन से कहीं भी मत चले जाओ।

बाइबल के अनुसार-बुद्धिमान कौन है? देखिये- नीति वचन पुस्तक के अंश: 

  1. जो बुराई से दूर रहे, और भलाई करने में लगा रहे। मत कह, कि मैं बुराई का पलटा लूंगा; वरन यहोवा की बाट जोहता रह, वह तुझ को छुड़ाएगा। नीतिवचन 20:22
  2. प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो। रोमियो 12:9
  3. भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। रोमियो 12:10
  4. बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। रोमियो 12:17
  5. जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। रोमियो 12:18
  6. बाइबिल कहती है, हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। रोमियो 12:19
  7. बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो॥ रोमियो 12:21

बाइबल के अनुसार- बुद्धिमान कौन है? – बुद्धिमान बनो और समझदारी से चलो

  1. कभी भी नियमों, व्यवस्था, आज्ञाओं का उल्लंघन मत करो, कानून को अपने हाथों में मत लो, मूर्खों की तरह अपनी दृष्टि में ज्यादा बुध्दिमान मत बनो।
    आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो। रोमियो 12:16

बाइबल के अनुसार- बुद्धिमान कौन है? नीतिवचन 1:2 बुद्धि और शिक्षा प्राप्त करे, और समझ की बातें समझे, 

  1. और काम करने में प्रवीणता, और धर्म, न्याय और सीधाई की शिक्षा पाए; नीतिवचन 1:3
  2. कि भोलों को चतुराई, और जवान को ज्ञान और विवेक मिले; नीतिवचन 1:4
  3.  बुद्धिमान सुन कर अपनी विद्या बढ़ाए, और समझदार बुद्धि का उपदेश पाए, नीतिवचन 1:5
  4. यहोवा का भय मानना बुद्धि का मूल है; बुद्धि और शिक्षा को मूढ़ ही लोग तुच्छ जानते हैं॥ नीतिवचन 1:7
  5. बुद्धि सड़क में ऊंचे स्वर से बोलती है; और चौकों में प्रचार करती है; नीतिवचन 1:20
  6. वह बाजारों की भीड़ में पुकारती है; वह फाटकों के बीच में और नगर के भीतर भी ये बातें बोलती है: नीतिवचन 1:21
  7. हे भोले लोगो, तुम कब तक भोलेपन से प्रीति रखोगे? और हे ठट्ठा करने वालो, तुम कब तक ठट्ठा करने से प्रसन्न रहोगे?

 बाइबल के अनुसार- बुद्धिमान कौन है?- हे मूर्खों, तुम कब तक ज्ञान से बैर रखोगे? नीतिवचन 1:22

  1. तुम मेरी डांट सुन कर मन फिराओ; सुनो, मैं अपनी आत्मा तुम्हारे लिये उण्डेल दूंगी; मैं तुम को अपने वचन बताऊंगी। नीतिवचन 1:23
  2. मैं ने तो पुकारा परन्तु तुम ने इनकार किया, और मैं ने हाथ फैलाया, परन्तु किसी ने ध्यान न दिया, नीतिवचन 1:24
  3. वरन तुम ने मेरी सारी सम्मति को अनसुनी किया, और मेरी ताड़ना का मूल्य न जाना; नीतिवचन 1:25
  4. इसलिये मैं भी तुम्हारी विपत्ति के समय हंसूंगी; और जब तुम पर भय आ पड़ेगा, नीतिवचन 1:26
  5. वरन आंधी की नाईं तुम पर भय आ पड़ेगा, और विपत्ति बवण्डर के समान आ पड़ेगी, और तुम संकट और सकेती में फंसोगे, तब मैं ठट्ठा करूंगी। नीतिवचन 1:27
  6. उस समय वे मुझे पुकारेंगे, और मैं न सुनूंगी; वे मुझे यत्न से तो ढूंढ़ेंगे, परन्तु न पाएंगे। नीतिवचन 1:28

क्योंकि उन्होंने ज्ञान से बैर किया, और यहोवा का भय मानना उन को न भाया। नीतिवचन 1:29

  1. उन्होंने मेरी सम्मति न चाही वरन मेरी सब ताड़नाओं को तुच्छ जाना। नीतिवचन 1:30
  2. इसलिये वे अपनी करनी का फल आप भोगेंगे, और अपनी युक्तियों के फल से अघा जाएंगे। नीतिवचन 1:31
  3. क्योंकि भोले लोगों का भटक जाना, उनके घात किए जाने का कारण होगा, और निश्चिन्त रहने के कारण मूढ़ लोग नाश होंगे; नीतिवचन 1:32
  4. परन्तु जो मेरी सुनेगा, वह निडर बसा रहेगा, और बेखटके सुख से रहेगा॥ नीतिवचन 1:3

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