सफलता का रहस्य-भाग 6

सफलता का रहस्य-भाग 6

8. (2) स्वयं का विकास करें: सीखते रहें-आगे बढ़ते रहें।

दोस्तो नमस्कार, हम सफलता के लिये जरूरी आयाम, नियम-सिद्धांतों के बारे में पढ़ रहे हैं, हमने पिछले 5 भागों में सफलता के लिये जरूरी आदतों, और कौशल के बारे में जाना था, सफलता का रहस्य-भाग 6 में अब और भी महत्वपूर्ण विषयों के लिये समझने जा रहे हैं, तो आगे बढ़ते हैं।

सफलता का रहस्य-भाग 6

(1) समय को पहचानें (समझें): समय बहुत कीमती और बलवान है।

  •  पौलुष के अनुसार “अवसर, समय को बहुमूल्य समझो”। 
  • “यदि आप समय को समझते हैं, तो आप अपनी पीढ़ी में एक सेनापति के रूप में जीने पायेंगे, और याद किये जाएंगे।” 
  • शिखर पर पहुंचने के लिए समय को पहचानना / समझना ही होगा, ये जरूरी है।
  • आपको ईश्वर की योजनाओं और नियुक्ति को समझना चाहिए।
  • समझना चाहिए कि आपके जीवन के लिए परमेश्वर का उद्देश्य क्या है।
  • आपको जीवन में अपना स्थान, अपनी बुलाहट और ज़िम्मेदारी के लिये नियुक्त समय को समझना चाहिए।
  • और भी बहुत कुछ है,जिसे आपको अपने अस्तित्व के निहितार्थ को समझना चाहिए। 

वे कारण कौन कौन से हैं।

  • जानते हैं, एस्तेर जानती थी कि वह इतने समय के लिए राज्य में क्यों है। 
  • यीशु अपने आने का कारण जानता था: “इस उद्देश्य के लिए परमेश्वर का पुत्र प्रकट हुआ, कि वह शैतान के कार्यों को नष्ट कर सकता है”। 1 यूहन्ना 3:8
  • दाऊद जानता था, कि वह युद्ध के मैदान में गोलियत के साथ आमने-सामने क्यों खड़ा हो सका।
  • जब उसका बड़ा भाई एलीआब युद्ध के मैदान में आने के कारण उस पर क्रोधित हुआ,
  • तो उसने पूछा, “मैंने अब क्या किया है? इसका कोई कारण नहीं है?” (1 शमूएल 17:29)।
  • यूसुफ जानता था कि उसे मिस्र में समस्या का समाधान करना है, क्योंकि उसने इसे बहुत पहले एक सपने में देखा था। 

अब सवाल यह है, कि आप अपने बारे में क्या जानते हैं? 

  • इस पीढ़ी में, आपके परिवार में, और समुदाय में आपके अस्तित्व के निहितार्थ के बारे में आपकी क्या समझ है? 

सफलता का रहस्य-भाग 6

सोचिये, वे कौन से कारण हैं?

  • क्या हम इसको नहीं जानते, कि एसाव एक ऐसा व्यक्ति था, जो अपने अस्तित्व के निहितार्थ को नहीं जानता था।
  •  याकूब भोजन के लिये कुछ दाल पका रहा था: और ऐसाव मैदान से थका हुआ आया। 
  •  तब ऐसाव ने याकूब से कहा, वह जो लाल वस्तु है, उसी लाल वस्तु में से मुझे कुछ खिला, क्योंकि मैं थका हूं।
  • इसी कारण उसका नाम एदोम भी पड़ा। 
  • याकूब ने कहा, अपना पहिलौठे का अधिकार आज मेरे हाथ बेच दे। 

  •  ऐसाव ने कहा, देख, मैं तो अभी मरने पर हूं: सो पहिलौठे के अधिकार से मेरा क्या लाभ होगा? 
  • याकूब ने कहा, मुझ से अभी शपथ खा: सो उसने उससे शपथ खाई: और अपना पहिलौठे का अधिकार याकूब के हाथ बेच डाला।
  • इस पर याकूब ने ऐसाव को रोटी और पकाई हुई मसूर की दाल दी; और उसने खाया पिया, तब उठ कर चला गया।यों ऐसाव ने अपना पहिलौठे का अधिकार तुच्छ जाना॥ उत्पत्ति 25:29-34
  • एसाव ने अपना पहिलौठा अधिकार खो दिया; उसने अपना भाग्य की आशीषें हमेशा के लिए खो दीं।
  • बाइबिल में, शिमशोन एक और व्यक्ति है, जो अपने अस्तित्व को नहीं जानता था। वह अपने सिर पर तेल की गंभीरता को नहीं जानता था; इसलिए वह एक कंगाल की तरह मर गया।
  • आदम और हव्वा अदन की वाटिका में अपने अस्तित्व को नहीं पहचानते / जानते थे; जब तक उन्हें उस बाटिका से बाहर नहीं निकाला गया।
  • प्रिय, आपको अपने अस्तित्व के निहितार्थ को समझने की आवश्यकता है,
  • ईश्वर से पूँछे: “हे प्रभु, मैं कौन हूँ? मैं यहाँ क्यों हूँ? अपनी पीढ़ी के लिए किस प्रकार का प्रतिनिधित्व कर सकता हूं?”

  • इतिहास की पहली पुस्तक में बारहवें अध्याय और बत्तीसवें पद में,
  • हम इस्साकार के पुत्रों के बारे में पढ़ते हैं:इस्साकार और के बच्चों के बारे में, जो समय की समझ रखने वाले लोग थे,
  • यह जानने के लिए कि इस्राएल को क्या करना चाहिए; उसके मुख्य आसान पर दो सौ लोग थे; और उनके सब भाई उनकी आज्ञा पर चलते थे।
  • आप देखिए, यदि आप समय को समझते हैं, तो आप अपनी पीढ़ी में एक सेनापति के रूप में जीवन बिता पाएंगे, आप उच्च आसान पर विराजमान होंगे।

(2) स्वयं का विकास करें: सीखते रहें-आगे बढ़ते रहें। 

“सूचना पदोन्नति का आधार है।” 

  • यदि आप ऊँचाई को छूना चाहते हैं, यानि शीर्ष आपका सपना है, तो आपको खुद को विकसित करना होगा।
  • अपने आप को कभी मत ऐसे बेकार मत छोड़ो। अपने आप को विकसित करें! 
  • अब तक आप जो जानते हैं, वही आपको उस मुकाम तक ले आया है, जहां आप इस समय हैं।
  • आप अभी जहां हैं, उससे कहीं आगे जाने के लिए, आपको अभी जितना आप जानते हैं, उससे अधिक जानना चाहिए।
  • आप जो कुछ भी जानते हैं – हर रहस्योद्घाटन, हर जानकारी, और बाइबल की हर समझ, जो आपके पास अभी है, इस बात का हिसाब है कि आप अभी कहां हैं।
  • यदि आप अभी जहां हैं, उससे आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आपको आवश्यकता होगी, जो आप अभी जितना जानते हैं, उससे परे और अधिक जानें; क्योंकि सूचना, जानकारी, प्रचार का आधार है।
  • उदाहरण के लिए, प्राथमिक विद्यालय में एक बच्चे को माध्यमिक विद्यालय के लिए,
  • आगे के लिये और ज्ञान प्राप्त करने के लिए, उच्च शिक्षा को जानना ही होगा,  प्राथमिक विद्यालय स्तर से परे जानना चाहिए।
  • जब वह जूनियर सेकेंडरी स्कूल स्तर पर पर्याप्त जानकारी प्राप्त करता है, तो वह सीनियर सेकेंडरी स्कूल लिए ज्ञान प्राप्त कर लेता है और एक और स्तर पर आगे बढ़ जाता है।
  • और फिर वह ऐसे ही क्रम चलता रहता है, जब तक कि वह विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए शिक्षित, योग्यता प्राप्त नहीं कर लेता।
  • आपका सूचना जानकारी, ज्ञान, की बढ़ोतरी का स्तर, आपके प्रचार की दर निर्धारित करता है; और फिर आपका रहस्योद्घाटन (आदर्श वादी विजयी रवैया) आपके उत्थान को निर्धारित करता है।

सफलता का रहस्य-भाग 6- प्रेरित पौलुस ने गलातियों 2:2 में कहा, 

  • “मेरा जाना ईश्वरीय प्रकाश के अनुसार हुआ: और जो सुसमाचार मैं अन्यजातियों में प्रचार करता हूं,
  • उस को मैं ने उन्हें बता दिया, पर एकान्त में उन्हीं को जो बड़े समझे जाते थे, ताकि ऐसा न हो, कि मेरी इस समय की, या अगली दौड़ धूप व्यर्थ ठहरे।”
  •  तो, आपके लिए जीवन में ऊपर जाने के लिए, रहस्यों का सम्पूर्ण ज्ञान (रहस्योद्घाटन) प्राप्त होना चाहिए। 
  • आपको खुद को विकसित करने के लिए अपना मन बनाना होगा।
  • जीवन भर सीखने वाले बनें।
  • ब्रह्मांड के विश्वविद्यालय से स्नातक होने से इनकार ना करें।
  • अपने आप को वास्तव में विकसित करने के लिए, आपको अपने आप को दैनिक विकास के लिए प्रतिबद्ध करना होगा।

 प्रतिदिन बढ़ते रहें।

  •  हर दिन जो आता है, परमेश्वर के ज्ञान में आपको बढ़ने के लिए दृढ़ संकल्प सहित व्यतीत करना चाहिए ।
  • अपने करियर, पेशे या प्रयास के क्षेत्र के ज्ञान में।
  •  वित्तीय शिक्षा में ज्ञानवान होना।
  • अपने मानवीय संबंधों में:  आपको बढ़ने का निश्चय करना चाहिए। 
  • स्मिथ विगल्सवर्थ ने कहा था, कि जो कोई भी लगातार दो दिनों तक एक ही आध्यात्मिक तल पर है, वह पीछे हट गया है। 

  • दौड़ते रहो। 
  • उड़ते रहो।
  • तैरते रहो।
  • अगर दौड़ना नहीं आता है, दौड़ना मुश्किल है तो, रेंगो । पर रुको नहीं, आगे बढ़ो।
  • उड़ना नहीं आता, तो चलो, चाहे गिरो, फिर उठो, पर आगे बढ़ो।
  • गिरना अच्छा है, क्योंकि संभलना भी सीखने के लिए, गिरना जरूरी है ।
  • तैरना नहीं आता, तो सीखो, पर डुबो मत।
  • जब तक आप जो जानते हैं, जिस विषय के बारे में जाने जाते हैं, उसकी परिपक्वता तक नहीं पहुँचते,
  • उस ज्ञान को हाँसिल करने के आगे बढ़ो, सीखो, और सिखाना जारी रखो।
  • शीर्ष के नेता बनने तक जानना जारी रखें।
  • दाऊद जंगल में था। वह वाद्य बजाना जानता था; और जो कुछ वह जानता था उसका ज्ञान उसे जंगल से निकालकर महल में ले आया।

  • तब एक जवान ने उत्तर देके कहा, सुन, मैं ने बेतलहमी यिशै के एक पुत्र को देखा जो वीणा बजाना जानता है,
  • और वह वीर योद्धा भी है, और बात करने में बुद्धिमान और रूपवान भी है; और यहोवा उसके साथ रहता है।
  • तब शाऊल ने दूतों के हाथ यिशै के पास कहला भेजा, कि अपने पुत्र दाऊद को जो भेड़-बकरियों के साथ रहता है मेरे पास भेज दे। 
  • और जब जब परमेश्वर की ओर से वह आत्मा शाऊल पर चढ़ता था, तब तब दाऊद वीणा ले कर बजाता;
  • और शाऊल चैन पाकर अच्छा हो जाता था, और वह दुष्ट आत्मा उस में से हट जाता था॥ 1 शमूएल 16:18-19,23
  • तौभी  यद्यपि वह जंगल में खो गया था, दाऊद जो जानता था, वह उसे बाहर ले आया। 
  • इसलिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां स्थित हैं। 
  • यदि आप केवल जान सकते हैं, तो जो आप जानते हैं, वह आपको अंधकार से बाहर लाएगा। 
  • आपको सब ज्ञात है, ये काफी है, इसी सोच में ना रहें, कुछ अलग बन जाने के लिए कुछ सीखने का प्रयास करें।
  • ज्ञान और जानकारी हाँसिल करने के बजाय और भी गूढ़, भेद की बातों को जानने के लिए समय निर्धारित करें; और जो कुछ तुम जानते हो वह तुम्हें प्रगट करेगा।
  • लेकिन, आपको प्रासंगिक बातों को जानने के लिए दृढ़ संकल्प होना चाहिए: 

  • परमेश्वर का ज्ञान; 
  • आपके करियर का ज्ञान; 
  • अपने भाग्य का ज्ञान; 

आपके अस्तित्व के होने के तीन विभाग हैं: आपकी आत्मा, आत्मा (मन, इच्छा और भावनाएँ) और आपका शरीर। 

  • अपने भाग्य उदय होने, रहस्योद्घाटन को पूरा करने के लिए, आपको एक उत्कट आत्मा, एक स्वस्थ दिमाग और एक स्वस्थ शरीर की आवश्यकता होती है। 
  • एक स्वस्थ शरीर अच्छे पोषण और पर्याप्त व्यायाम का स्वरूप मिलता  है।
  • एक स्वस्थ दिमाग सूचना और बुद्धिमान तर्क वितर्क, सीखने, समझने, के द्वारा मिलने वाला परिणाम है, उस का मानो एक उत्पाद है।
  • उत्कट आत्मा सर्वशक्तिमान ईश्वर के साथ रहस्योद्घाटन, मध्यस्थता और जुड़ाव का एक उत्पाद/ नतीज़ा है। 
  • ऐसे लोग हैं जिनके शरीर स्वस्थ हैं और उनकी आत्माएं ठीक हैं, लेकिन उनका दिमाग सुस्त है।
  • सब मनुष्य पशु सरीखे ज्ञानरहित है; सब सोनारों को अपनी खोदी हुई मूरतों के कारण लज्जित होना पड़ेगा;
  • क्योंकि उनकी ढाली हुई मूरतें धोखा देने वाली हैं, और उनके कुछ भी सांस नहीं चलती।  यिर्मयाह 51:17

उपरोक्त शास्त्रवचन में, लोगों के मन सुस्त हैं, क्योंकि वे याद नहीं रख सकते,

  • कि पिछली बार उन्होंने अपने दिमाग को अच्छे भोजन से कब तृप्त किया था, आत्मिक मन्ना कब खिलाया था। 
  • जैसे आपके शरीर को भोजन की आवश्यकता होती है, वैसे ही आपके मन और आत्मा दोनों को भी भोजन की आवश्यकता होती है। 
  • शरीर के लिए भोजन वह भौतिक भोजन है जिसे आप खाते हैं।
  •  मन का भोजन है ज्ञान; और आत्मा का भोजन परमेश्वर के वचन से प्रकाशित होना है।
  • यीशु ने उत्तर दिया और कहा, लिखा है, मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। मत्ती 4:4
  • जब आपके शरीर, मन और आत्मा में संतुलित आहार पर्याप्त मात्रा में मौजूद होता है, तो कोई शैतानी बातें जैसे, बीमारी, गरीबी, नासमझी, अवसाद, नहीं होगा, जो आपको आपके भाग्य को उदय होने से, आपके कार्यों को पूरा करने से रोक सके।
  • आपको याद होगा, जब आप विश्वविद्यालय से स्नातक हुए होंगे और आपने आखिरी बार कोई किताब तब खोली थी, जब आप स्कूल में थे?
  • अगर आप नहीं पढ़ते थे तो, असफल हो जाते थे, अब आप अपने साथ क्यों अन्याय कर रहे हैं।
  • मैं आपसे कहना चाहती हूं,  मैं अब से निरंतर अध्ययन करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ, और आप निश्चित रूप से अपने विजयी भाग्य को प्राप्त करेंगे।

सफलता का रहस्य-भाग 5

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जैसी गति, वैसी मति।श्री एस. पी. भारिल्ल जी का संदेश