MY HEART’S FAVORITE BOOK”BIBLE” मेरी प्रिय पुस्तक-“बाइबिल”

9) छठवां दिन
48) 1. बाइबल की भाषाएं

MY HEART’S FAVORITE BOOK”BIBLE” मेरी प्रिय पुस्तक-“बाइबिल”। सृष्टि की रचना का वर्णन:- अध्याय -1:-पद 1-31 उत्पत्ति 1: 1-31

पहिला दिन

आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।
तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; 

दूसरा दिन

फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए। तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।

तीसरा दिन

फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया। और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उस ने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीजवाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया। तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया।

चौथा दिन

फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों।  वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों। और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देनेवाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया। तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया। परमेश्वर ने उनको आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें, तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया।

पांचवां दिन

फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश कें अन्तर में उड़ें। ठसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल- जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़नेवाले पक्षियों की भी सृष्टि की : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो- फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया।

मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार समानता में बनाया

फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात् घरेलू पशु, और रेंगनेवाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया। सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वनपशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगनेवाले जन्तुओं को बनाया : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।

परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया,

अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उस ने मनुष्यों की सृष्टि की। और परमेश्वर ने उनको आशीष दी : और उन से कहा, फूलो- फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगनेवाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो।

छठवां दिन

फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीजवाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीजवाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं : और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगनेवाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया। तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया।।


मेरी प्रिय पुस्तक – “बाइबिल”

उत्पत्ति अध्याय :-2 पद -1-25 यों आकाश और पृथ्वी और उनकी सारी सेना का बनाना समाप्त हो गया। और परमेश्वर ने अपना काम जिसे वह करता था सातवें दिन समाप्त किया। और उस ने अपने किए हुए सारे काम से सातवें दिन विश्राम किया। और परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीष दी और पवित्रा ठहराया; क्योंकि उस में उस ने अपनी सृष्टि की रचना के सारे काम से विश्राम लिया।

मनुष्य की उत्पत्ति

आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति का वृत्तान्त यह है कि जब वे उत्पन्न हुए अर्थात् जिस दिन यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया: तब मैदान का कोई पौधा भूमि पर न था, और न मैदान का कोई छोटा पेड़ उगा था, क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी पर जल नहीं बरसाया था, और भूमि पर खेती करने के लिये मनुष्य भी नहीं था; तौभी कुहरा पृथ्वी से उठता था जिस से सारी भूमि सिंच जाती थी।

जीवन का श्वास फूंक दिया;

 यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनो में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया। और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन देश में एक बाटिका लगाई; और वहां आदम को जिसे उस ने रचा था, रख दिया। और यहोवा परमेश्वर ने भूमि से सब भांति के वृक्ष, जो देखने में मनोहर और जिनके फल खाने में अच्छे हैं उगाए, और बाटिका के बीच में जीवन के वृक्ष को और भले या बुरे के ज्ञान के वृक्ष को भी लगाया।

परमेश्वर की महान आज्ञा

तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह आज्ञा दी, कि तू बाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है: पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना : क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा।।

परमेश्वर को मनुष्य का ध्यान है- फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं;

मै उसके लिये एक ऐसा सहायक बनाऊंगा जो उस से मेल खाए। और यहोवा परमेश्वर भूमि में से सब जाति के बनैले पशुओं, और आकाश के सब के भाँति पक्षियों को रचकर आदम के पास ले आया कि देखे, कि वह उनका क्या क्या नाम रखता है; और जिस जिस जीवित प्राणी का जो जो नाम आदम ने रखा वही उसका नाम हो गया। सो आदम ने सब जाति के घरेलू पशुओं, और आकाश के पक्षियों, और सब जाति के बनैले पशुओं के नाम रखे; परन्तु आदम के लिये कोई ऐसा सहायक न मिला जो उस से मेल खा सके।

पृथ्वी पर पहला ऑपरेशन-परमेश्वर द्वारा हुआ।

पहला एनेस्थीसिया-डॉक्टर (परमेश्वर)

बेहोशी का तरीका -परमेश्वर से सीखा – तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भारी नीन्द में डाल दिया, और जब वह सो गया तब उस ने उसकी एक पसुली निकालकर उसकी सन्ती मांस भर दिया। और यहोवा परमेश्वर ने उस पसुली को जो उस ने आदम में से निकाली थी, स्त्री बना दिया; और उसको आदम के पास ले आया। और आदम ने कहा अब यह मेरी हडि्डयों में की हड्डी और मेरे मांस में का मांस है : सो इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है। इस कारण पुरूष अपने माता पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक तन बनें रहेंगे। और आदम और उसकी पत्नी दोनों नंगे थे, पर लजाते न थे।।

परमेश्वर की अद्भुत बातें जानने के लिए -मसीही धर्म पुस्तक बाइबिल को सुनिये और पढ़िए ।

बाइबल की संरचना और विशेषताएं KNOW ABOUT THE HOLY BIBLE

1. बाइबल की भाषाएं

“बाइबल” शब्द यूनानी भाषा में “βιβλος(Bibloz = किताब)” शब्द से निकला है।

(1) पुराना नियम इब्रानी भाषा में लिखा गया था।

पुराने नियम की कुछ पुस्तकें(एज्रा 4:8–6:18; 7:12–26; यिर्म 10:11; दान 2:4–7:28) उस अरामी[कसदी] भाषा में लिखी गई थीं जिसका उपयोग बेबीलोन में होता था। यह कहा जाता है कि बेबीलोन में बंदी बनाए जाने के बाद, यहूदी लोग इब्रानी और अरामी दोनों भाषाओं में बात करते थे।

(2) नया नियम उस यूनानी भाषा में लिखा गया था जिसका उपयोग उस समय दुनिया भर में होता था। यूनानी भाषा पहली शताब्दी में रोमन साम्राज्य की आधिकारिक भाषा बन गई।

 नया नियम इब्रानी या अरामी में नहीं, लेकिन यूनानी में इसलिए लिखा गया था, क्योंकि सुसमाचार का प्रचार अन्यजातियों को भी किया जाना चाहिए था।(उन दिनों में जब सिकंदर महान ने पूर्वी देशों को जीता, ज्यादातर देश यूनानी भाषा का उपयोग करते थे)

बाइबल में कुछ 66 पुस्तकें हैं, और बाइबल 2 भागों में विभाजित है। 

  1. पुराना नियम

      2. नया नियम

पुराने नियम में कुल 39 पुस्तकें हैं 

नये नियम में 27 पुस्तकें हैं ,50 TRUTH ABOUT THE LORD JESUS CHRIST.

पुराने नियम में कुल 39 पुस्तकें हैं

2. बाइबल की विशेषताएं KNOW ABOUT THE HOLY BIBLE

मूसा के समय से लेकर, जिसने पुराने नियम की पहली पांच पुस्तकें लिखीं, प्रेरित यूहन्ना के समय तक, जिसने नए नियम की आखिरी कई पुस्तकें लिखीं, बाइबल लगभग 1,600 वर्षों की अवधि में लिखी गई थी।

चूंकि बाइबल के लेखक मनुष्य नहीं, पर परमेश्वर हैं, इसलिए बाइबल की सभी पुस्तकें परस्पर विरुद्ध नहीं हैं 

उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक बाइबल की 66 पुस्तकों के सभी वचन आपस में सुसंगत हैं। हर वचन के पास सामर्थ्य और अधिकार है, और सभी भविष्यवाणियां पूरी हो गई हैं और पूरी हो रही हैं। इसी के कारण बाइबल पवित्र मानी जाती है और बहुत सारे लोगों के द्वारा पढ़ी जाती है।

  • 2 तीम 3:16 सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है।
  • 2 पत 1:21 क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई, पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे।

3. वैधानिक ग्रंथ और गैर वैधानिक ग्रंथ

(1) वैधानिक ग्रंथ : पुराने नियम की 39 पुस्तकें, और नए नियम की 27 पुस्तकें

पुराने नियम की 39 पुस्तकों को आधिकारिक रूप से इब्रानी बाइबल का वैधानिक ग्रंथ माना गया।

(2) गैर वैधानिक ग्रंथ : अनेक बार जांच परख करने के बाद बाइबल के वैधानिक ग्रंथों में शामिल नहीं किए गए।

4. बाइबल की संरचना

बाइबल में 66 पुस्तकें हैं – पुराने नियम की 39 पुस्तकें और नए नियम की 27 पुस्तकें

(1) पुराने नियम की पुस्तकों का क्रम

  •  1. पंचग्रंथ(मूसा की 5 पुस्तकें) : उत्पत्ति, निर्गमन, लैव्यव्यवस्था, गिनती, और व्यवस्थाविवरण
  • 2.  इतिहास की पुस्तकें : यहोशू, न्यायियों, रूत, 1शमूएल, 2शमूएल, 1राजाओं, 2 राजाओं, 1इतिहास, 2इतिहास, एज्रा, नेहम्याह, और एस्तेर
  • 3. कविता की पुस्तकें : अय्यूब, भजन संहिता, नीतिवचन, सभोपदेशक, और श्रेष्ठगीत
  • 4.  भविष्यवाणी की पुस्तकें : यशायाह, यिर्मयाह, विलापगीत, यहेजकेल, दानिय्येल, होशे, योएल, आमोस, ओबद्याह, योना, मीका, नहूम, हबक्कूक, सपन्याह, हाग्गै, जकर्याह, और मलाकी
  • एज्रा 1:1 उसकी पूर्णता का वर्णन किया गया।

   (2) नए नियम की पुस्तकों का क्रम

  • 1. चारों सुसमाचार (यीशु के कामों के अभिलेख) : मत्ती, मरकुस, लूका, और यूहन्ना
  • यूहन्ना रचित सुसमाचार मत्ती, मरकुस, लूका तीनों सुसमाचार के लगभग बीस और तीस वर्ष बाद लिखा गया है।
  • 2.  इतिहास की पुस्तक(प्रेरितों के कामों के अभिलेख) : प्रेरितों के काम
  • संदेशपत्र : रोमियों, 1कुरिन्थियों, 2कुरिन्थियों, गलातियों, 1थिस्सलुनीकियों, 2थिस्सलुनीकियों, 1तीमुथियुस, 2तीमुथियुस, तीतुस, इफिसियों, फिलिप्पियों, कुलुस्सियों, और फिलेमोन

3. यात्री पत्र   (प्रेरित पौलुस के मिशनरी यात्रा पर लिखे पत्र) :

  • रोमियों, 1कुरिन्थियों, 2कुरिन्थियों, गलातियों, 1थिस्सलुनीकियों, और 2थिस्सलुनीकियों
  •   मेषपालीय पत्र (पादरियों के लिए पौलुस के पत्र) : 1तीमुथियुस, 2तीमुथियुस, और तीतुस
  •  जेल से पत्र (पौलुस के बन्दीगृह से लिखे पत्र) : इफिसियों, फिलिप्पियों, कुलुस्सियों, और फिलेमोन
  •  सामान्य संदेशपत्र (अज्ञात या सामान्य इलाकों में ईसाई समुदाय को संबोधित पत्र) → इब्रानियों, याकूब, 1पतरस, 2पतरस, 1यूहन्ना, 2यूहन्ना, 3यूहन्ना, और यहूदा

4. भविष्यवाणी की पुस्तक : प्रकाशितवाक्य

  •  पुराने नियम की पुस्तकों के जैसे, नए नियम की पुस्तकें भी कालानुक्रमिक क्रम में नहीं, लेकिन विषयों के अनुसार व्यवस्थित की गई हैं। उदा.) 2पतरस की पुस्तक को नए नियम की बाईसवीं पुस्तक के स्थान पर व्यवस्थित किया गया है, लेकिन वह यूहन्ना रचित सुसमाचार के पहले लिखी गई थी जो बाइबल के नए नियम में चौथी पुस्तक के स्थान पर व्यवस्थित की गई है। 2पत 1:14 पतरस ने लिखा कि उसके शरीर के डेरे के गिराए जाने का समय शीघ्र आनेवाला है। यूह 21:19 यह साबित हुआ कि यूहन्ना की पुस्तक पतरस की मृत्यु के बाद लिखी गई।
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MY HEART’S FAVORITE BOOK”BIBLE” मेरी प्रिय पुस्तक-“बाइबिल”

MY HEART’S FAVORITE BOOK”BIBLE” मेरी प्रिय पुस्तक-“बाइबिल”। सृष्टि की रचना का वर्णन:- अध्याय -1:-पद 1-31 उत्पत्ति 1: 1-31

पहिला दिन

आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।
तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; 

दूसरा दिन

फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए। तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।

तीसरा दिन

फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया। और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उस ने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीजवाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया। तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया।

चौथा दिन

फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों।  वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों। और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देनेवाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया। तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया। परमेश्वर ने उनको आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें, तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया।

पांचवां दिन

फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश कें अन्तर में उड़ें। ठसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल- जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़नेवाले पक्षियों की भी सृष्टि की : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो- फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया।

मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार समानता में बनाया

फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात् घरेलू पशु, और रेंगनेवाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया। सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वनपशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगनेवाले जन्तुओं को बनाया : और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है।
फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।

परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया,

अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उस ने मनुष्यों की सृष्टि की। और परमेश्वर ने उनको आशीष दी : और उन से कहा, फूलो- फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगनेवाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो।

छठवां दिन

फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीजवाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीजवाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं : और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगनेवाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया। तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया।।


मेरी प्रिय पुस्तक – “बाइबिल”

उत्पत्ति अध्याय :-2 पद -1-25 यों आकाश और पृथ्वी और उनकी सारी सेना का बनाना समाप्त हो गया। और परमेश्वर ने अपना काम जिसे वह करता था सातवें दिन समाप्त किया। और उस ने अपने किए हुए सारे काम से सातवें दिन विश्राम किया। और परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीष दी और पवित्रा ठहराया; क्योंकि उस में उस ने अपनी सृष्टि की रचना के सारे काम से विश्राम लिया।

मनुष्य की उत्पत्ति

आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति का वृत्तान्त यह है कि जब वे उत्पन्न हुए अर्थात् जिस दिन यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया: तब मैदान का कोई पौधा भूमि पर न था, और न मैदान का कोई छोटा पेड़ उगा था, क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी पर जल नहीं बरसाया था, और भूमि पर खेती करने के लिये मनुष्य भी नहीं था; तौभी कुहरा पृथ्वी से उठता था जिस से सारी भूमि सिंच जाती थी।

जीवन का श्वास फूंक दिया;

 यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनो में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया। और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन देश में एक बाटिका लगाई; और वहां आदम को जिसे उस ने रचा था, रख दिया। और यहोवा परमेश्वर ने भूमि से सब भांति के वृक्ष, जो देखने में मनोहर और जिनके फल खाने में अच्छे हैं उगाए, और बाटिका के बीच में जीवन के वृक्ष को और भले या बुरे के ज्ञान के वृक्ष को भी लगाया।

परमेश्वर की महान आज्ञा

तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह आज्ञा दी, कि तू बाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है: पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना : क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा।।

परमेश्वर को मनुष्य का ध्यान है- फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं;

मै उसके लिये एक ऐसा सहायक बनाऊंगा जो उस से मेल खाए। और यहोवा परमेश्वर भूमि में से सब जाति के बनैले पशुओं, और आकाश के सब के भाँति पक्षियों को रचकर आदम के पास ले आया कि देखे, कि वह उनका क्या क्या नाम रखता है; और जिस जिस जीवित प्राणी का जो जो नाम आदम ने रखा वही उसका नाम हो गया। सो आदम ने सब जाति के घरेलू पशुओं, और आकाश के पक्षियों, और सब जाति के बनैले पशुओं के नाम रखे; परन्तु आदम के लिये कोई ऐसा सहायक न मिला जो उस से मेल खा सके।

पृथ्वी पर पहला ऑपरेशन-परमेश्वर द्वारा हुआ।

पहला एनेस्थीसिया-डॉक्टर (परमेश्वर)

बेहोशी का तरीका -परमेश्वर से सीखा – तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भारी नीन्द में डाल दिया, और जब वह सो गया तब उस ने उसकी एक पसुली निकालकर उसकी सन्ती मांस भर दिया। और यहोवा परमेश्वर ने उस पसुली को जो उस ने आदम में से निकाली थी, स्त्री बना दिया; और उसको आदम के पास ले आया। और आदम ने कहा अब यह मेरी हडि्डयों में की हड्डी और मेरे मांस में का मांस है : सो इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है। इस कारण पुरूष अपने माता पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक तन बनें रहेंगे। और आदम और उसकी पत्नी दोनों नंगे थे, पर लजाते न थे।।

परमेश्वर की अद्भुत बातें जानने के लिए -मसीही धर्म पुस्तक बाइबिल को सुनिये और पढ़िए ।

बाइबल की संरचना और विशेषताएं KNOW ABOUT THE HOLY BIBLE

1. बाइबल की भाषाएं

“बाइबल” शब्द यूनानी भाषा में “βιβλος(Bibloz = किताब)” शब्द से निकला है।

(1) पुराना नियम इब्रानी भाषा में लिखा गया था।

पुराने नियम की कुछ पुस्तकें(एज्रा 4:8–6:18; 7:12–26; यिर्म 10:11; दान 2:4–7:28) उस अरामी[कसदी] भाषा में लिखी गई थीं जिसका उपयोग बेबीलोन में होता था। यह कहा जाता है कि बेबीलोन में बंदी बनाए जाने के बाद, यहूदी लोग इब्रानी और अरामी दोनों भाषाओं में बात करते थे।

(2) नया नियम उस यूनानी भाषा में लिखा गया था जिसका उपयोग उस समय दुनिया भर में होता था। यूनानी भाषा पहली शताब्दी में रोमन साम्राज्य की आधिकारिक भाषा बन गई।

 नया नियम इब्रानी या अरामी में नहीं, लेकिन यूनानी में इसलिए लिखा गया था, क्योंकि सुसमाचार का प्रचार अन्यजातियों को भी किया जाना चाहिए था।(उन दिनों में जब सिकंदर महान ने पूर्वी देशों को जीता, ज्यादातर देश यूनानी भाषा का उपयोग करते थे)

बाइबल में कुछ 66 पुस्तकें हैं, और बाइबल 2 भागों में विभाजित है। 

  1. पुराना नियम

      2. नया नियम

पुराने नियम में कुल 39 पुस्तकें हैं 

नये नियम में 27 पुस्तकें हैं ,50 TRUTH ABOUT THE LORD JESUS CHRIST.

पुराने नियम में कुल 39 पुस्तकें हैं

2. बाइबल की विशेषताएं KNOW ABOUT THE HOLY BIBLE

मूसा के समय से लेकर, जिसने पुराने नियम की पहली पांच पुस्तकें लिखीं, प्रेरित यूहन्ना के समय तक, जिसने नए नियम की आखिरी कई पुस्तकें लिखीं, बाइबल लगभग 1,600 वर्षों की अवधि में लिखी गई थी।

चूंकि बाइबल के लेखक मनुष्य नहीं, पर परमेश्वर हैं, इसलिए बाइबल की सभी पुस्तकें परस्पर विरुद्ध नहीं हैं 

उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक बाइबल की 66 पुस्तकों के सभी वचन आपस में सुसंगत हैं। हर वचन के पास सामर्थ्य और अधिकार है, और सभी भविष्यवाणियां पूरी हो गई हैं और पूरी हो रही हैं। इसी के कारण बाइबल पवित्र मानी जाती है और बहुत सारे लोगों के द्वारा पढ़ी जाती है।

  • 2 तीम 3:16 सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है।
  • 2 पत 1:21 क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई, पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे।

3. वैधानिक ग्रंथ और गैर वैधानिक ग्रंथ

(1) वैधानिक ग्रंथ : पुराने नियम की 39 पुस्तकें, और नए नियम की 27 पुस्तकें

पुराने नियम की 39 पुस्तकों को आधिकारिक रूप से इब्रानी बाइबल का वैधानिक ग्रंथ माना गया।

(2) गैर वैधानिक ग्रंथ : अनेक बार जांच परख करने के बाद बाइबल के वैधानिक ग्रंथों में शामिल नहीं किए गए।

4. बाइबल की संरचना

बाइबल में 66 पुस्तकें हैं – पुराने नियम की 39 पुस्तकें और नए नियम की 27 पुस्तकें

(1) पुराने नियम की पुस्तकों का क्रम

  •  1. पंचग्रंथ(मूसा की 5 पुस्तकें) : उत्पत्ति, निर्गमन, लैव्यव्यवस्था, गिनती, और व्यवस्थाविवरण
  • 2.  इतिहास की पुस्तकें : यहोशू, न्यायियों, रूत, 1शमूएल, 2शमूएल, 1राजाओं, 2 राजाओं, 1इतिहास, 2इतिहास, एज्रा, नेहम्याह, और एस्तेर
  • 3. कविता की पुस्तकें : अय्यूब, भजन संहिता, नीतिवचन, सभोपदेशक, और श्रेष्ठगीत
  • 4.  भविष्यवाणी की पुस्तकें : यशायाह, यिर्मयाह, विलापगीत, यहेजकेल, दानिय्येल, होशे, योएल, आमोस, ओबद्याह, योना, मीका, नहूम, हबक्कूक, सपन्याह, हाग्गै, जकर्याह, और मलाकी
  • एज्रा 1:1 उसकी पूर्णता का वर्णन किया गया।

   (2) नए नियम की पुस्तकों का क्रम

  • 1. चारों सुसमाचार (यीशु के कामों के अभिलेख) : मत्ती, मरकुस, लूका, और यूहन्ना
  • यूहन्ना रचित सुसमाचार मत्ती, मरकुस, लूका तीनों सुसमाचार के लगभग बीस और तीस वर्ष बाद लिखा गया है।
  • 2.  इतिहास की पुस्तक(प्रेरितों के कामों के अभिलेख) : प्रेरितों के काम
  • संदेशपत्र : रोमियों, 1कुरिन्थियों, 2कुरिन्थियों, गलातियों, 1थिस्सलुनीकियों, 2थिस्सलुनीकियों, 1तीमुथियुस, 2तीमुथियुस, तीतुस, इफिसियों, फिलिप्पियों, कुलुस्सियों, और फिलेमोन

3. यात्री पत्र   (प्रेरित पौलुस के मिशनरी यात्रा पर लिखे पत्र) :

  • रोमियों, 1कुरिन्थियों, 2कुरिन्थियों, गलातियों, 1थिस्सलुनीकियों, और 2थिस्सलुनीकियों
  •   मेषपालीय पत्र (पादरियों के लिए पौलुस के पत्र) : 1तीमुथियुस, 2तीमुथियुस, और तीतुस
  •  जेल से पत्र (पौलुस के बन्दीगृह से लिखे पत्र) : इफिसियों, फिलिप्पियों, कुलुस्सियों, और फिलेमोन
  •  सामान्य संदेशपत्र (अज्ञात या सामान्य इलाकों में ईसाई समुदाय को संबोधित पत्र) → इब्रानियों, याकूब, 1पतरस, 2पतरस, 1यूहन्ना, 2यूहन्ना, 3यूहन्ना, और यहूदा

4. भविष्यवाणी की पुस्तक : प्रकाशितवाक्य

  •  पुराने नियम की पुस्तकों के जैसे, नए नियम की पुस्तकें भी कालानुक्रमिक क्रम में नहीं, लेकिन विषयों के अनुसार व्यवस्थित की गई हैं। उदा.) 2पतरस की पुस्तक को नए नियम की बाईसवीं पुस्तक के स्थान पर व्यवस्थित किया गया है, लेकिन वह यूहन्ना रचित सुसमाचार के पहले लिखी गई थी जो बाइबल के नए नियम में चौथी पुस्तक के स्थान पर व्यवस्थित की गई है। 2पत 1:14 पतरस ने लिखा कि उसके शरीर के डेरे के गिराए जाने का समय शीघ्र आनेवाला है। यूह 21:19 यह साबित हुआ कि यूहन्ना की पुस्तक पतरस की मृत्यु के बाद लिखी गई।
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Harshit Brave

I am a Health Care Advisor, Guide, Teacher, and Trainer. I am also a Life Counselling Coach. I have served in the healthcare field for over three decades. My work has focused on patient care, counselling, teaching, and guiding young professionals. This journey has given me profound insight into health, human behaviour, emotional resilience, and achieving a balanced life. I created Optimal Health to share practical knowledge gained through real experience. My goal is to help you build a healthy body, cultivate a calm mind, develop financial awareness, make informed decisions, and achieve spiritual peace. I believe true health means complete well-being. When your body, mind, purpose, and spirit work together, life becomes meaningful. Through my articles, videos, and guidance, I support you in: • Managing health challenges • Building positive habits • Strengthening mental resilience • Finding life direction • Growing in wisdom and spirituality I walk this path with you, not ahead of you. My role is to guide, teach, and support your journey toward a balanced and fulfilling life. Welcome to Optimal Health.