google.com, pub-9683471800292205, DIRECT, f08c47fec0942fa0 बुद्धि और ज्ञान देने वाले नीति वचन - Optimal Health

बुद्धि और ज्ञान देने वाले नीति वचन

बुद्धि और ज्ञान देने वाले नीति वचन

1. बुद्धि और ज्ञान देने वाले नीति वचन

बुद्धि और ज्ञान देने वाले नीति वचन । दोस्तो, नमस्कार, बाइबल  में नीतिवचन नामक पुस्तक में 31 अध्याय हैं, अगर हम एक तारीख को एक अध्याय पढ़ें, तो इस तरह पूरे माह में सारे 31 अध्याय पढ़ लेंगे, और इन सारे अध्यायों में दुनिया के सबसे बुद्धिमान राजा सुलेमान ने बहुत ही सार्थक, गूढ और भेद की बातों का वर्णन किया है, ये सारी बातें हमारे प्रतिदिन के जीवन के लिये बहुत उपयोगी हैं, और ज्ञान वर्धक भी। तो मेरा प्रयास है कि जीवन के लिये बुद्धि और ज्ञान देने वाले नीति वचन  को पढ़ कर आप भी उपदेशों को मानें और सफल हो जाएँ। कुछ विशेष पद आप याद रखें।

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मेरी सबसे प्रिय पुस्तक बाइबल है,

जैसे कि मैं अपनी गवाही में भी अनेक बार इस बात का जिक्र कर चुकीं हूँ, कि मेरी सबसे प्रिय पुस्तक बाइबल है,  बाइबल की पवित्र चर्चा करते हुये मैं बहुत कुछ लिख सकती हूँ, पर आज के विषय पर ध्यान देते हुये बस इतना कहना चाहती हूँ, कि आप जीवन की सच्चाईयों और नीतियों को समझने के लिये नीति वचन के अध्यायों को पढ़ने का प्रयास अवश्य कीजिये ।

बुद्धि और ज्ञान की बातें

बुद्धि और ज्ञान देने वाले नीति वचन

जब तू बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगा कर सोचे; नीतिवचन 2:2

  1. और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे,नीतिवचन 2:3
  2. ओर उस को चान्दी की नाईं ढूंढ़े, और गुप्त धन के समान उसी खोज में लगा रहे;नीतिवचन 2:4
  3. तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा।नीतिवचन 2:5
  4. क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं।नीतिवचन 2:6

विवेक तुझे सुरक्षित रखेगा; और समझ तेरी रक्षक होगी;

  1. विवेक तुझे सुरक्षित रखेगा; और समझ तेरी रक्षक होगी;नीतिवचन 2:11
  2. ताकि तुझे बुराई के मार्ग से, और उलट फेर की बातों के कहने वालों से बचाए,नीतिवचन 2:12
  3. हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना; अपने हृदय में मेरी आज्ञाओं को रखे रहना;नीतिवचन 3:1
  4. क्योंकि ऐसा करने से तेरी आयु बढ़ेगी, और तू अधिक कुशल से रहेगा।नीतिवचन 3:2

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना।

  1. तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना।नीतिवचन 3:5
  2. अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना।नीतिवचन 3:7
  3. क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो बुद्धि पाए, और वह मनुष्य जो समझ प्राप्त करे,नीतिवचन 3:13
  4. क्योंकि बुद्धि की प्राप्ति चान्दी की प्राप्ति से बड़ी, और उसका लाभ चोखे सोने के लाभ से भी उत्तम है।नीतिवचन 3:14

बुद्धि मूंगे से अधिक अनमोल है

  1. वह मूंगे से अधिक अनमोल है, और जितनी वस्तुओं की तू लालसा करता है, उन में से कोई भी उसके तुल्य न ठहरेगी।नीतिवचन 3:15
  2. उसके दहिने हाथ में दीर्घायु, और उसके बाएं हाथ में धन और महिमा है। नीतिवचन 3:16
  3. उसके मार्ग मनभाऊ हैं, और उसके सब मार्ग कुशल के हैं। नीतिवचन 3:17

जो बुद्धि को ग्रहण कर लेते हैं, उनके लिये वह जीवन का वृक्ष बनती है; और जो उस को पकड़े रहते हैं, वह धन्य हैं॥

  1. जो बुद्धि को ग्रहण कर लेते हैं, उनके लिये वह जीवन का वृक्ष बनती है; और जो उस को पकड़े रहते हैं, वह धन्य हैं॥ नीतिवचन 3:18
  2. यहोवा ने पृथ्वी की नेव बुद्धि ही से डाली; और स्वर्ग को समझ ही के द्वारा स्थिर किया। नीतिवचन 3:19
  3. उसी के ज्ञान के द्वारा गहिरे सागर फूट निकले, और आकाशमण्डल से ओस टपकती है॥ नीतिवचन 3:20

हे मेरे पुत्र, ये बातें तेरी दृष्टि की ओट न हाने पाएं; खरी बुद्धि और विवेक की रक्षा कर,

  1. हे मेरे पुत्र, ये बातें तेरी दृष्टि की ओट न हाने पाएं; खरी बुद्धि और विवेक की रक्षा कर, नीतिवचन 3:21
  2. तब इन से तुझे जीवन मिलेगा, और ये तेरे गले का हार बनेंगे। नीतिवचन 3:22
  3. और तू अपने मार्ग पर निडर चलेगा, और तेरे पांव में ठेस न लगेगी। नीतिवचन 3:23
  4. जब तू लेटेगा, तब भय न खाएगा, जब तू लेटेगा, तब सुख की नींद आएगी। नीतिवचन 3:24

अचानक आने वाले भय से न डरना,

  1. अचानक आने वाले भय से न डरना, और जब दुष्टों पर विपत्ति आ पड़े, तब न घबराना; नीतिवचन 3:25
  2. क्योंकि यहोवा तुझे सहारा दिया करेगा, और तेरे पांव को फन्दे में फंसने न देगा। नीतिवचन 3:26

जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना॥

  1. जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना॥ नीतिवचन 3:27
  2. बुद्धिमान महिमा को पाएंगे, और मूर्खों की बढ़ती अपमान ही की होगी॥ नीतिवचन 3:35
  3. हे मेरे पुत्रो, पिता की शिक्षा सुनो, और समझ प्राप्त करने में मन लगाओ। नीतिवचन 4:1
  4. और मेरा पिता मुझे यह कह कर सिखाता था, कि तेरा मन मेरे वचन पर लगा रहे; तू मेरी आज्ञाओं का पालन कर, तब जीवित रहेगा नीतिवचन 4:4

बुद्धि को प्राप्त कर, समझ को भी प्राप्त कर; उन को भूल न जाना, न मेरी बातों को छोड़ना।

  1. बुद्धि को प्राप्त कर, समझ को भी प्राप्त कर; उन को भूल न जाना, न मेरी बातों को छोड़ना। नीतिवचन 4:5
  2. बुद्धि को न छोड़, वह तेरी रक्षा करेगी; उस से प्रीति रख, वह तेरा पहरा देगी। नीतिवचन 4:6
  3. बुद्धि श्रेष्ट है इसलिये उसकी प्राप्ति के लिये यत्न कर; जो कुछ तू प्राप्त करे उसे प्राप्त तो कर परन्तु समझ की प्राप्ति का यत्न घटने न पाए। नीतिवचन 4:7
  4. उसकी बड़ाई कर, वह तुझ को बढ़ाएगी; जब तू उस से लिपट जाए, तब वह तेरी महिमा करेगी। नीतिवचन 4:8
  5. वह तेरे सिर पर शोभायमान भूषण बान्धेगी; और तुझे सुन्दर मुकुट देगी॥ नीतिवचन 4:9

शिक्षा को पकड़े रह, उसे छोड़ न दे; उसकी रक्षा कर, क्योंकि वही तेरा जीवन है।

  1. मैं ने तुझे बुद्धि का मार्ग बताया है; और सीधाई के पथ पर चलाया है। नीतिवचन 4:11
  2. चलने में तुझे रोक टोक न होगी, और चाहे तू दौड़े, तौभी ठोकर न खाएगा। नीतिवचन 4:12
  3. शिक्षा को पकड़े रह, उसे छोड़ न दे; उसकी रक्षा कर, क्योंकि वही तेरा जीवन है। नीतिवचन 4:13
  4. अपने पांव धरने के लिये मार्ग को समथर कर, और तेरे सब मार्ग ठीक रहें। नीतिवचन 4:26

न तो दहिनी ओर मुढ़ना, और न बाईं ओर; अपने पांव को बुराई के मार्ग पर चलने से हटा ले॥

  1. न तो दहिनी ओर मुढ़ना, और न बाईं ओर; अपने पांव को बुराई के मार्ग पर चलने से हटा ले॥ नीतिवचन 4:27
  2. हे मेरे पुत्र, मेरी बुद्धि की बातों पर ध्यान दे, मेरी समझ की ओर कान लगा; नीतिवचन 5:1
  3. जिस से तेरा विवेक सुरक्षित बना रहे, और तू ज्ञान के वचनों को थामे रहे। नीतिवचन 5:2

हे मेरे पुत्र, मेरी आज्ञा को मान, और अपनी माता की शिक्षा का न तज।

  1. हे मेरे पुत्र, मेरी आज्ञा को मान, और अपनी माता की शिक्षा का न तज। नीतिवचन 6:20
  2. इन को अपने हृदय में सदा गांठ बान्धे रख; और अपने गले का हार बना ले। नीतिवचन 6:21
  3. वह तेरे चलने में तेरी अगुवाई, और सोते समय तेरी रक्षा, और जागते समय तुझ से बातें करेगी। नीतिवचन 6:22

आज्ञा तो दीपक है और शिक्षा ज्योति, और सिखाने वाले की डांट जीवन का मार्ग है,

  1. आज्ञा तो दीपक है और शिक्षा ज्योति, और सिखाने वाले की डांट जीवन का मार्ग है, नीतिवचन 6:23
  2. हे मेरे पुत्र, मेरी बातों को माना कर, और मेरी आज्ञाओं को अपने मन में रख छोड़। नीतिवचन 7:1
  3. जो बुद्धिमान है, वह आज्ञाओं को स्वीकार करता है, परन्तु जो बकवादी और मूढ़ है, वह पछाड़ खाता है। नीतिवचन 10:8
  4. समझ वालों के वचनों में बुद्धि पाई जाती है, परन्तु निर्बुद्धि की पीठ के लिये कोड़ा है।नीतिवचन 10:13 

आज्ञाकारिता और परमेश्वर के प्रति भक्ति

दोस्तो, आपको ये जानकर होगी, कि इस एक एक लाइन में व्याख्या करते हुये अनेक लेखकों ने अनगिनत पुस्तकें लिख दीं हैं, आज्ञाकारिता और परमेश्वर के प्रति भक्ति हमेशा आपको शिखर पर ही ले कर जायेगी, बस नियत साफ हो, तो रहमतों में खुदा कभी कंजूसी नहीं करते। आपको ये पोस्ट कैसी लगी, मुझे अवश्य बतायें । अगर ये पोस्ट लाभदायक लगे तो इसे अन्य लोगों को भी सांझा कीजिये। मेरे साथ बने रहने के लिये धन्यवाद।

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