बुद्धि और ज्ञान के वचन-धन्यवाद दीजिये।भाग 4/4 | 125+ quotes about knowledge and wisdom

बुद्धि और ज्ञान के वचन-धन्यवाद दीजिये।भाग 4/4 | 125+ Quotes About Knowledge And Wisdom

बुद्धि और ज्ञान के वचन-धन्यवाद दीजिये।भाग 4/4 | 125+ Quotes About Knowledge And Wisdom

बुद्धि और ज्ञान के वचन-धन्यवाद दीजिये। भाग- 4/4 | Quotes About Knowledge And Wisdom। सब को सही करने की कोशिश मत करो। लोगों से प्रेम करना है, उन्हें सुधारना नहीं है। लोगों के साथ दीनता और प्रेम से पेश आयें और अपने आप को बेहतर करते जाएँ, लोग आपको देख कर खुद सुधर जायेंगे।

सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो।

  1. जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा। इब्रानियों 12:14
  2.  ध्यान से देखते रहो, ऐसा न हो, कि कोई परमेश्वर के अनुग्रह से वंचित रह जाए, या कोई कड़वी जड़ फूट कर कष्ट दे, और उसके द्वारा बहुत से लोग अशुद्ध हो जाएं।इब्रानियों 12:15
  3.  जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं; और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्धकार ही में है। 1 यूहन्ना 2:9
  4.  जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 1 यूहन्ना 2:1
  5. पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्धकार में है, और अन्धकार में चलता है; और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्योंकि अन्धकार ने उस की आंखे अन्धी कर दी हैं॥ 1 यूहन्ना 2:11

“लक्ष्य ना ओझल होने पाये, कदम कदम बढ़ाए चल।

मंज़िल तुझको मिल जाएगी, आज नहीं तो कल”।

सच्चाई से अपने कामों को शांतिपूर्ण ढंग से करते जाओ, सफलता खुद शोर मचा देगी।

  1. अपनी बढ़ाई, अपनी तारीफ खुद मत बताते  फिरो, काम ऐसे करो कि लोग खुद आपकी तारीफ करते रहे।
  2.  आप अपने रास्ते पर, सच्चाई से, सत्य निष्ठा, समर्पण के साथ जाग्रत रहते हुए चलते रहो, आपकी निगाह  आपकी अपनी मंज़िल हो पर हो, उसके लिए अपने काम को और बेहतर से बेहतर बनाने के लिए उस पर पूरा  ध्यान दो, जिससे सफलता मिलती है। 
  3. आप बढ़ते रहो, प्रार्थना करते रहो, सच्चाई से जीवन बिताओ, भलाई करो, सीखो और सफलता प्राप्त करो ।
  4. अपने पहले उद्देश्य को मत भूलना।
  5. जब चुनोतियाँ हो सामने तो अपने हौसले को और बुलंद करो।

“कोई लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं,

हारा वही जो कभी लड़ा नहीं”।

“मंज़िल मिल ही जायेगी, भटकते ही सही,

गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं”।

“रख हौसला वो मंजर भी आयेगा; 

प्यासे के पास चल के समुन्दर भी आयेगा। 

थक कर न बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर;

मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आयेगा”।

“जिस दिन से चला हूँ मंज़िल की तरफ,

मैंने मील का पत्थर नहीं देखा”।

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कृतज्ञ रहें, धन्यवाद दीजिये। 

  1. ईश्वर को और लोगों को , धन्यवाद प्रेम का अनोखा रूप है।
  2. जो आपकी जिंदगी में आये और आपको नया अनुभव दिया। 
  3. ईश्वर ने आपको इतना सब कुछ मुफ्त में दिया है, तो उनका धन्यवाद कीजिये।

1 थिस्सलुनीकियों

  1. और हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि जो ठीक चाल नहीं चलते, उन को समझाओ, कायरों को ढाढ़स दो, निर्बलों को संभालो, सब की ओर सहनशीलता दिखाओ।  1 थिस्सलुनीकियों 5:14
  2.  सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्पर रहो आपस में और सब से भी भलाई ही की चेष्टा करो।  1 थिस्सलुनीकियों 5:15
  3. सदा आनन्दित रहो।  1 थिस्सलुनीकियों 5:1

भजन संहिता

  1. मैं गीत गाकर तेरे नाम की स्तुति करूंगा, और धन्यवाद करता हुआ तेरी बड़ाई करूंगा। भजन संहिता 69:30
  2. हे मेरे परमेश्वर, मैं भी तेरी सच्चाई का धन्यवाद सारंगी बजाकर गाऊंगा; हे इस्राएल के पवित्र मैं वीणा बजा कर तेरा भजन गाऊंगा। भजन संहिता 71:22
  3. तब हम जो तेरी प्रजा और तेरी चराई की भेड़ें हैं, तेरा धन्यवाद सदा करते रहेंगे; और पीढ़ी से पीढ़ी तक तेरा गुणानुवाद करते रहेंगें॥ भजन संहिता 79:13
  4. हे परमेश्वर हम तेरा धन्यवाद करते, हम तेरा नाम का धन्यवाद करते हैं; क्योंकि तेरा नाम प्रगट हुआ है, तेरे आश्चर्यकर्मों का वर्णन हो रहा है॥ भजन संहिता 75:1
  5. हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। भजन संहिता 86:12

क्या तू मुर्दों के लिये अदभुत काम करेगा?

  1. क्या मरे लोग उठ कर तेरा धन्यवाद करेंगे? भजन संहिता 88:10
  2. यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना; भजन संहिता 92:1
  3. हम धन्यवाद करते हुए उसके सम्मुख आएं, और भजन गाते हुए उसका जयजयकार करें! भजन संहिता 95:2
  4. हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित हो; और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो! भजन संहिता 97:12
  5. वे तेरे महान और भययोग्य नाम का धन्यवाद करें! वह तो पवित्र है। भजन संहिता 99:3

भजन संहिता 100

  1. उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो! भजन संहिता 100:4
  2. यहोवा का धन्यवाद करो, उससे प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो! भजन संहिता 105:1
  3. याह की स्तुति करो! यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! भजन संहिता 106:1
  4. हे हमारे परमेश्वर यहोवा, हमारा उद्धार कर, और हमें अन्यजातियों में से इकट्ठा कर ले, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरे विषय में बड़ाई करें॥भजन संहिता 106:47

भजन संहिता 107

  1. यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! भजन संहिता 107:1
  2. लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें! भजन संहिता 107:8
  3. लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें! भजन संहिता 107:15
  4. और लोग यहोवा की करूणा के कारण और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें! भजन संहिता 107:21

भजन संहिता 107

  1. और वे धन्यवाद बलि चढ़ाएं, और जयजयकार करते हुए, उसके कामों का वर्णन करें॥ भजन संहिता 107:22
  2. लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें।भजन संहिता 107:31
  3. हे यहोवा, मैं देश देश के लोगों के मध्य में तेरा धन्यवाद करूंगा, और राज्य राज्य के लोगों के मध्य में तेरा भजन गाऊंगा। भजन संहिता 108:3
  4. मैं यहोवा का बहुत धन्यवाद करूंगा, और बहुत लोगों के बीच में उसकी स्तुति करूंगा। भजन संहिता 109:30
  5. याह की स्तुति करो। मैं सीधे लोगों की गोष्ठी में और मण्डली में भी सम्पूर्ण मन से यहोवा का धन्यवाद करूंगा। भजन संहिता 111:1
  6. मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा, और यहोवा से प्रार्थना करूंगा। भजन संहिता 116:17

भजन संहिता

  1. हे जाति जाति के सब लोगों यहोवा की स्तुति करो! हे राज्य राज्य के सब लोगो, उसकी प्रशंसा करो!क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है; और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो! यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! भजन संहिता 118:1
  2. मेरे लिये धर्म के द्वार खोलो, मैं उन से प्रवेश करके याह का धन्यवाद करूंगा॥ भजन संहिता 118:19
  3. हे यहोवा मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, क्योंकि तू ने मेरी सुन ली है और मेरा उद्धार ठहर गया है। भजन संहिता 118:21
  4. वहां याह के गोत्र गोत्र के लोग यहोवा के नाम का धन्यवाद करने को जाते हैं; यह इस्राएल के लिये साक्षी है। भजन संहिता 122:4
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भजन संहिता 136:2

  1. यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है। भजन संहिता 136:1
  2. जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है। जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है॥ भजन संहिता 136:3
  3. स्वर्ग के परमेश्वर का धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।भजन संहिता 136:26
  4. मैं पूरे मन से तेरा धन्यवाद करूँगा; देवताओं के सामने भी मैं तेरा भजन गाऊँगा। भजन संहिता 138:1
  5. मैं तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत करूँगा, और तेरी करुणा और सच्चाई के कारण तेरे नाम का धन्यवाद करूँगा, क्योंकि तू ने अपने वचन को अपने बड़े नाम से अधिक महत्त्व दिया है। भजन संहिता 138:2

दानिय्येल 2:23

  1. हे मेरे पूर्वजों के परमेश्वर, मैं तेरा धन्यवाद और स्तुति करता हूं, क्योंकि तू ने मुझे बुद्धि और शक्ति दी है, और जिस भेद का खुलना हम लोगों न तुझ से मांगे था, उसे तू ने मुझ पर प्रगट किया है, तू ने हम को राजा की बात बताई है। दानिय्येल 2:23

होशे 14:2

  1. बातें सीख कर और यहोवा की ओर फिर कर, उस से कह, सब अधर्म दूर कर; अनुग्रह से हम को ग्रहण कर; तब हम धन्यवाद रूपी बलि चढ़ाएंगे।

योना 2:9

  1. परन्तु मैं ऊंचे शब्द से धन्यवाद कर के तुझे बलिदान चढ़ाऊंगा; जो मन्नत मैं ने मानी, उसको पूरी करूंगा। उद्धार यहोवा ही से होता है।
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मत्ती

  1. उसी समय यीशु ने कहा, हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु; मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है। मत्ती 11:25
  2. तब उस ने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पांच रोटियों और दो मछिलयों को लिया;स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को। मत्ती 14:19
  3. उन सात रोटियों और मछिलयों को ले धन्यवाद करके तोड़ा और अपने चेलों को देता गया; और चेले लोगों को। मत्ती 15:36
  4. फरीसी खड़ा होकर अपने मन में यों प्रार्थना करने लगा, कि हे परमेश्वर, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं,

लूका

  1. कि मैं और मनुष्यों की नाईं अन्धेर करने वाला, अन्यायी और व्यभिचारी नहीं, और न इस चुंगी लेने वाले के समान हूं। लूका 18:11

रोमियो

  1. मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं: निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूं॥ रोमियो 7:25
  2. जो किसी दिन को मानता है, वह प्रभु के लिये मानता है: जो खाता है, वह प्रभु के लिये खाता है, क्योंकि वह परमेश्वर का धन्यवाद करता है, और जा नहीं खाता, वह प्रभु के लिये नहीं खाता और परमेश्वर का धन्यवाद करता है। रोमियो 14:6
  3. और अन्यजाति भी दया के कारण परमेश्वर की बड़ाई करें, जैसा लिखा है, कि इसलिये मैं जाति जाति में तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम के भजन गाऊंगा। रोमियो 15:9
  4. उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं। रोमियो 16:4

1 कुरिन्थियों

  1. मैं तुम्हारे विषय में अपने परमेश्वर का धन्यवाद सदा करता हूं, इसलिये कि परमेश्वर का यह अनुग्रह तुम पर मसीह यीशु में हुआ। 1 कुरिन्थियों 1:4
  2. मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं, कि क्रिस्पुस और गयुस को छोड़, मैं ने तुम में से किसी को भी बपतिस्मा नहीं दिया। 1 कुरिन्थियों 1:14
  3. वह धन्यवाद का कटोरा, जिस पर हम धन्यवाद करते हैं, क्या मसीह के लोहू की सहभागिता नहीं? वह रोटी जिसे हम तोड़ते हैं, क्या वह मसीह की देह की सहभागिता नहीं? 1 कुरिन्थियों 10:16

2 तीमुथियुस

  1. जिस परमेश्वर की सेवा मैं अपने बाप दादों की रीति पर शुद्ध विवेक से करता हूं, उसका धन्यवाद हो कि अपनी प्रार्थनाओं में तुझे लगातार स्मरण करता हूं। 2 तीमुथियुस 1:3
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गलत तरह से पैसा बनाने से बचें।

  1. जल्दी धनी बनने के लिए गलत तरीकों से धन इकट्ठा ना करें, जो जल्दी अमीर बनना चाहते हैं वो बहुत से प्रलोभन में आकर मन की शांति और मान सम्मान खो देते हैं 
  2. पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं,
  3. जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं। 1 तीमुथियुस 6:9
  4. तो अब प्रसन्न हो कर अपने दास के घराने पर ऐसी आशीष दे, कि वह तेरे सम्मुख सदैव बना रहे; क्योंकि, हे प्रभु यहोवा, तू ने ऐसा ही कहा है, और तेरे दास का घराना तुझ से आशीष पाकर सदैव धन्य रहे। 2 शमूएल 7:29
  5. यहोवा जीवित है; मेरी चट्टान धन्य है, और परमेश्वर जो मेरे उद्धार की चट्टान है, उसकी महिमा हो। 2 शमूएल 22:47

भजन संहिता 37:16

  1. धर्मी का थोड़ा से माल दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है। भजन संहिता 37:16
  2. सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! भजन संहिता 39:6
  3. क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा। भजन संहिता 41:1

नीतिवचन

  1. धन और प्रतिष्ठा मेरे पास है, वरन ठहरने वाला धन और धर्म भी हैं। नीतिवचन 8:18
  2. इसलिये अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो; क्या ही धन्य हैं वे जो मेरे मार्ग को पकड़े रहते हैं। नीतिवचन 8:32
  3. क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो मेरी सुनता, वरन मेरी डेवढ़ी पर प्रति दिन खड़ा रहता, और मेरे द्वारों के खंभों के पास दृष्टि लगाए रहता है। नीतिवचन 8:34
  4. दुष्टों के रखे हुए धन से लाभ नही होता, परन्तु धर्म के कारण मृत्यु से बचाव होता है। नीतिवचन 10:2
  5. जो काम में ढिलाई करता है, वह निर्धन हो जाता है, परन्तु कामकाजी लोग अपने हाथों के द्वारा धनी होते हैं। नीतिवचन 10:4
  6. धनी का धन उसका दृढ़ नगर है, परन्तु कंगाल लोग निर्धन होने के कारण विनाश होते हैं। नीतिवचन 10:15
  7. धन यहोवा की आशीष ही से मिलता है, और वह उसके साथ दु:ख नहीं मिलाता। नीतिवचन 10:22
  8. कोप के दिन धन से तो कुछ लाभ नहीं होता, परन्तु धर्म मृत्यु से भी बचाता है। नीतिवचन 11:4
  9. जो अपने पड़ोसी को तुच्छ जानता, वह पाप करता है, परन्तु जो दीन लोगों पर अनुग्रह करता, वह धन्य होता है। नीतिवचन 14:21

नीतिवचन

  1. बुद्धिमानों का धन उन का मुकुट ठहरता है, परन्तु मूर्खों की मूढ़ता निरी मूढ़ता है। नीतिवचन 14:24
  2. बड़े धन से अच्छा नाम अधिक चाहने योग्य है, और सोने चान्दी से औरों की प्रसन्नता उत्तम है। नीतिवचन 22:1
  3. धनी और निर्धन दोनों एक दूसरे से मिलते हैं; यहोवा उन दोनों का कर्त्ता है। नीतिवचन 22:2
  4. नम्रता और यहोवा के भय मानने का फल धन, महिमा और जीवन होता है। नीतिवचन 22:4
  5. धनी, निर्धन लोगों पर प्रभुता करता है, और उधार लेने वाला उधार देने वाले का दास होता है। नीतिवचन 22:7
  6. जो अपने लाभ के निमित्त कंगाल पर अन्धेर करता है, और जो धनी को भेंट देता, वे दोनो केवल हानि ही उठाते हैं॥ नीतिवचन 22:16
  7. क्योंकि यहोवा उनका मुकद्दमा लड़ेगा, और जो लोग उनका धन हर लेते हैं, उनका प्राण भी वह हर लेगा।नीतिवचन 22:23
  8. निर्धन और अन्धेर करने वाला पुरूष एक समान है; और यहोवा दोनों की आंखों में ज्योति देता है। नीतिवचन 29:13

नीतिवचन 29:18

  1. जहां दर्शन की बात नहीं होती, वहां लोग निरंकुश हो जाते हैं, और जो व्यवस्था को मानता है वह धन्य होता है। नीतिवचन 29:18
  2. अर्थात व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर। नीतिवचन 30:8
  3. ऐसे लोग हैं, जो अपने पिता को शाप देते और अपनी माता को धन्य नहीं कहते। नीतिवचन 30:11
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सभोपदेशक 4:8

  1. कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तौभी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आंखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किस के लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुखरहित रखता हूं? यह भी व्यर्थ और निरा दु:खभरा काम है। सभोपदेशक 4:8
  2. यदि तू किसी प्रान्त में निर्धनों पर अन्धेर और न्याय और धर्म को बिगड़ता देखे, तो इस से चकित न होना;
  3. क्योंकि एक अधिकारी से बड़ा दूसरा रहता है जिसे इन बातों की सुधि रहती है, और उन से भी ओर अधिक बड़े रहते हैं। सभोपदेशक 5:8

यहेजकेल 7:21

  1. और मैं उसे लूटने के लिये परदेशियों के हाथ, और धन छीनने के लिये पृथ्वी के दुष्ट लोगों के वश में कर दूंगा; और वे उसे अपवित्र कर डालेंगे। यहेजकेल 7:21
  2. देश के साधारण लोग भी अन्धेर करते और पराया धन छीनते हैं, वे दीन दरिद्र को पीसते और न्याय की चिन्ता छोड़ कर परदेशी पर अन्धेर करते हैं। यहेजकेल 22:29
  3. और लोग तेरा धन लूटेंगे और तेरे व्यापार की वस्तुएं छीन लेंगे; वे तेरी शहरपनाह ढा देंगे और तेरे मनभाऊ घर तोड़ डालेंगे; तेरे पत्थर और काठ, और तेरी धूलि वे जल में फेंक देंगे। यहेजकेल 26:12
  4. तू ने अपनी बुद्धि और समझ के द्वारा धन प्राप्त किया, और अपने भण्डारों में सोना-चान्दी रखा है; यहेजकेल 28:4

मत्ती 19:21

  1. यीशु ने उस से कहा, यदि तू सिद्ध होना चाहता है; तो जा, अपना माल बेचकर कंगालों को दे;
  2. और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा; और आकर मेरे पीछे हो ले। मत्ती 19:21
  3. परन्तु वह जवान यह बात सुन उदास होकर चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था॥ मत्ती 19:22
  4. तब यीशु ने अपने चेलों से कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि धनवान का स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना कठिन है। मत्ती 19:23
  5. फिर तुम से कहता हूं, कि परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है। मत्ती 19:24
  6. उसके स्वामी ने उससे कहा, धन्य हे अच्छे और विश्वासयोग्य दास, तू थोड़े में विश्वासयोग्य रहा;
  7. मैं तुझे बहुत वस्तुओं का अधिकारी बनाऊंगा अपने स्वामी के आनन्द में सम्भागी हो। मत्ती 25:21
  8. उसके स्वामी ने उस से कहा, धन्य हे अच्छे और विश्वासयोग्य दास, तू थोड़े में विश्वासयोग्य रहा, मैं तुझे बहुत वस्तुओं का अधिकारी बनाऊंगा अपने स्वामी के आनन्द में सम्भागी हो। मत्ती 25:23

मत्ती 25:27, 57

  1. तो तुझे चाहिए था, कि मेरा रुपया सर्राफों को दे देता, तब मैं आकर अपना धन ब्याज समेत ले लेता। मत्ती 25:27
  2. जब सांझ हुई तो यूसुफ नाम अरिमतियाह का एक धनी मनुष्य जो आप ही यीशु का चेला था आया:
  3. उस ने पीलातुस के पास जाकर यीशु की लोथ मांगी। मत्ती 27:57

मरकुस

  1. और संसार की चिन्ता, और धन का धोखा, और और वस्तुओं का लोभ उन में समाकर वचन को दबा देता है।
  2. और वह निष्फल रह जाता है। मरकुस 4:19
  3. यीशु ने उस पर दृष्टि करके उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है;
  4. जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।मरकुस 10:21
  5. इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था।मरकुस 10:22
  6. यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!मरकुस 10:23
  7. चेले उस की बातों से अचम्भित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बाल को, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!मरकुस 10:24
  8. परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है! मरकुस 10:25
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लूका

  1. जो झाड़ियों में गिरा, सो वे हैं, जो सुनते हैं, पर होते होते चिन्ता और धन और जीवन के सुख विलास में फंस जाते हैं, और उन का फल नहीं पकता। लूका 8:14
  2. ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं॥ लूका 12:21
  3. अपनी संपत्ति बेचकर दान कर दो; और अपने लिये ऐसे बटुए बनाओ,
  4. जो पुराने नहीं होते, अर्थात स्वर्ग पर ऐसा धन इकट्ठा करो जो घटता नहीं और जिस के निकट चोर नहीं जाता, और कीड़ा नहीं बिगाड़ता। लूका 12:33

लूका: जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन

  1. क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा॥ लूका 12:34
  2. कोई दास दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता: क्योंकि वह तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम रखेगा; या एक से मिल रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा: तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते॥ लूका 16:13
  3. एक धनवान मनुष्य था जो बैंजनी कपड़े और मलमल पहिनता और प्रति दिन सुख-विलास और धूम-धाम के साथ रहता था। लूका 16:19
  4. और वह चाहता था, कि धनवान की मेज पर की जूठन से अपना पेट भरे; वरन कुत्ते भी आकर उसके घावों को चाटते थे। लूका 16:21
  5. और ऐसा हुआ कि वह कंगाल मर गया, स्वर्गदूतों ने उसे लेकर इब्राहीम की गोद में पहुंचाया; वह धनवान भी मरा; और गाड़ा गया। लूका 16:22

लूका 19:2 देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था

  1. देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था। लूका 19:2
  2. सो उस ने कहा, एक धनी मनुष्य दूर देश को चला ताकि राजपद पाकर फिर आए।लूका 19:12
  3. उस ने उस से कहा; धन्य हे उत्तम दास, तुझे धन्य है, तू बहुत ही थोड़े में विश्वासी निकला अब दस नगरों पर अधिकार रख। लूका 19:17

प्रेरितों के काम 19:25, रोमियो 11:33, 1 कुरिन्थियों 4:8, 2 कुरिन्थियों 12:14

  1. उस ने उन को, और, और ऐसी वस्तुओं के कारीगरों को इकट्ठे करके कहा; हे मनुष्यो, तुम जानते हो, कि इस काम में हमें कितना धन मिलता है। प्रेरितों के काम 19:25
  2. आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं! रोमियो 11:33
  3. तुम तो तृप्त हो चुके; तुम धनी हो चुके, तुम ने हमारे बिना राज्य किया; परन्तु भला होता कि तुम राज्य करते कि हम भी तुम्हारे साथ राज्य करते। 1 कुरिन्थियों 4:8
  4. देखो, मैं तीसरी बार तुम्हारे पास आने को तैयार हूं, और मैं तुम पर कोई भार न रखूंगा; क्योंकि मैं तुम्हारी सम्पत्ति नहीं, वरन तुम ही को चाहता हूं: क्योंकि लड़के-बालों को माता-पिता के लिये धन बटोरना न चाहिए, पर माता-पिता को लड़के-बालों के लिये। 2 कुरिन्थियों 12:14

इफिसियों

  1. और तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों कि तुम जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है,
  2. और पवित्र लोगों में उस की मीरास की महिमा का धन कैसा है। इफिसियों 1:18
  3. परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उस ने हम से प्रेम किया। इफिसियों 2:4
  4. कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। इफिसियों 2:7
  5. मुझ पर जो सब पवित्र लोगों में से छोटे से भी छोटा हूं, यह अनुग्रह हुआ, कि मैं अन्यजातियों को मसीह के अगम्य धन का सुसमाचार सुनाऊं। इफिसियों 3:8
  6. कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ। इफिसियों 3:16

फिलिप्पियों, कुलुस्सियों

  1. और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। फिलिप्पियों 4:19
  2. ताकि उन के मनों में शान्ति हो और वे प्रेम से आपस में गठे रहें,
  3.  वे पूरी समझ का सारा धन प्राप्त करें, और परमेश्वर पिता के भेद को अर्थात मसीह को पहिचान लें। कुलुस्सियों 2:2
  4. और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ;
  5. जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्त धन्यवाद करते रहो॥ कुलुस्सियों 2:7

प्रार्थना में लगे रहो, और धन्यवाद के साथ उस में जागृत रहो। कुलुस्सियों 4:2

  1. इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें,
  2. परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है। 1 तीमुथियुस 6:17
  3. और भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्पर हों। 1 तीमुथियुस 6:18
  4. और मसीह के कारण निन्दित होने को मिसर के भण्डार से बड़ा धन समझा:
  5. क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं। इब्रानियों 11:26
  6. इस कारण हम इस राज्य को पाकर जो हिलने का नहीं, उस अनुग्रह को हाथ से न जाने दें,
  7. जिस के द्वारा हम भक्ति, और भय सहित, परमेश्वर की ऐसी आराधना कर सकते हैं जिस से वह प्रसन्न होता है। इब्रानियों 12:28

याकूब, 1 पतरस

  1.  धनवान अपनी नीच दशा पर: क्योंकि वह घास के फूल की नाईं जाता रहेगा। याकूब 1:10
  2. क्योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है,
  3. उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा। याकूब 1:11
  4. धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है। याकूब 1:12
  5. हे मेरे प्रिय भाइयों सुनो; क्या परमेश्वर ने इस जगत के कंगालों को नहीं चुना कि विश्वास में धनी, और उस राज्य के अधिकारी हों, जिस की प्रतिज्ञा उस ने उन से की है जो उस से प्रेम रखते हैं, याकूब 2:5

याकूब: हे धनवानों सुन तो लो;

  1. हे धनवानों सुन तो लो; तुम अपने आने वाले क्लेशों पर चिल्ला-चिल्लाकर रोओ। याकूब 5:1
  2. तुम्हारा धन बिगड़ गया और तुम्हारे वस्त्रों को कीड़े खा गए। याकूब 5:2
  3. तुम्हारे सोने-चान्दी में काई लग गई है; और वह काई तुम पर गवाही देगी,
  4.  आग की नाईं तुम्हारा मांस खा जाएगी: तुम ने अन्तिम युग में धन बटोरा है।याकूब 5:3
  5. और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। 1 पतरस 3:14

प्रकाशित वाक्य

  1. तू जो कहता है, कि मैं धनी हूं, और धनवान हो गया हूं, और मुझे किसी वस्तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्छ और कंगाल और अन्धा, और नंगा है। प्रकाशित वाक्य 3:17
  2. इसी लिये मैं तुझे सम्मति देता हूं, कि आग में ताया हुआ सोना मुझ से मोल ले, कि धनी हो जाए;और श्वेत वस्त्र ले ले कि पहिन कर तुझे अपने नंगेपन की लज्ज़ा न हो;अपनी आंखों में लगाने के लिये सुर्मा ले, कि तू देखने लगे। प्रकाशित वाक्य 3:18

प्रकाशित वाक्य 5:12

  1.  वे ऊंचे शब्द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, ज्ञान, शक्ति,आदर, महिमा, और धन्यवाद के योग्य है। प्रकाशित वाक्य 5:12
  2. फिर मैं ने स्वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्तुओं को,और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे। प्रकाशित वाक्य 5:13
  3.  पृथ्वी के राजा, और प्रधान, और सरदार, और धनवान और सामर्थी लोग,
  4.  हर एक दास, और हर एक स्वतंत्र, पहाड़ों की खोहों में, और चट्टानों में जा छिपे। प्रकाशित वाक्य 6:15
  5.  उस ने छोटे, बड़े, धनी, कंगाल, स्वत्रंत, दास सब के दाहिने हाथ या उन के माथे पर एक एक छाप करा दी। प्रकाशित वाक्य 13:16

प्रकाशित वाक्य: देख, मैं चोर की नाईं आता हूं;

  1. धन्य वह है, जो जागता रहता है, और अपने वस्त्र कि चौकसी करता है, कि नंगा न फिरे, और लोग उसका नंगापन न देखें।प्रकाशित वाक्य 16:15
  2. क्योंकि उसके व्यभिचार के भयानक मदिरा के कारण सब जातियां गिर गई हैं, और पृथ्वी के राजाओं ने उसके साथ व्यभिचार किया है; और पृथ्वी के व्यापारी उसके सुख-विलास की बहुतायत के कारण धनवान हुए हैं। प्रकाशित वाक्य 18:3
  3. इन वस्तुओं के व्यापारी जो उसके द्वारा धनवान हो गए थे, उस की पीड़ा के डर के मारे दूर खड़े होंगे, और रोते और कलपते हुए कहेंगे। प्रकाशित वाक्य 18:15

प्रकाशित वाक्य 18:15

  1. घड़ी ही भर में उसका ऐसा भारी धन नाश हो गया: हर एक मांझी, जलयात्री, और मल्लाह, और जितने समुद्र से कमाते हैं, सब दूर खड़े हुए। प्रकाशित वाक्य 18:17
  2.  अपने अपने सिरों पर धूल डालेंगे, और रोते हुए और कलपते हुए चिल्ला चिल्ला कर कहेंगे, कि हाय! हाय!
  3. यह बड़ा नगर जिस की सम्पत्ति के द्वारा समुद्र के सब जहाज वाले धनी हो गए थे घड़ी ही भर में उजड़ गया। प्रकाशित वाक्य 18:19
  1. बुद्धि और ज्ञान के वचन-भाग 3/4
  2. MUKTI DILAYE YEESHU NAAM
  3. https://hindibible.live/
  4. 70 PLUS BIBLE VERSES ABOUT ATTITUDE OF GRATITUDE
  5. The Power of Yoga
  6. https://www.goodreads.com/book/show/41881472-the-psychology-of-money

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